पाकिस्तान के सियासी गलियारों में एक बार फिर सेना के शीर्ष नेतृत्व को लेकर तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने देश के आर्मी चीफ को आड़े हाथों लेते हुए एक गंभीर बयान दिया है। उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना पाकिस्तान के इतिहास के सबसे काले और शर्मनाक अध्यायों में से एक से की है। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह हिंसा और तनाव का माहौल लंबे समय से बना हुआ है, वह भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
1971 की हार और झूठे दावों का जिक्र
अपनी बात को मजबूती देते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दिसंबर, 1971 की ऐतिहासिक घटनाओं का विशेष तौर पर हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भारत के सामने पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक आत्मसमर्पण से ठीक एक दिन पहले, उस दौर के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जनरल याह्या खान ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। उस भाषण में बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि पाकिस्तानी फौज देश की एक-एक गली, खेत और पहाड़ पर डटकर मुकाबला जारी रखेगी। लेकिन ठीक अगले ही दिन पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकते हुए हथियार डालने पड़े थे।
सेना प्रमुख पर सीधा और तीखा निशाना
फजलुर रहमान ने सीधे तौर पर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपने निशाने पर लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह सेना की कुल ताकत और उसकी क्षमताओं से कोई इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐतिहासिक सच्चाइयों और पिछली गलतियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मौलाना का मुख्य तर्क यह था कि अतीत की तरह वर्तमान दौर में भी केवल खोखले दावे और बड़े भाषण दिए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।




















