राजस्थान के भरतपुर जिले में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पुख्ता करने और भारी वाहन चलाने वाले चालकों को आधुनिक ट्रैफिक नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग तकनीकों से अवगत कराने के लिए एक नई पहल की शुरुआत की गई है। इसके तहत आरडीटीसी की तरफ से एक नि:शुल्क रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन आरंभ किया गया है। अजमेर के सिंगावल स्थित आरडीटीसी द्वारा चलाई जा रही इस व्यवस्था का दायरा अब बढ़ाते हुए भरतपुर तक लाया गया है। इससे पहले सीकर, जयपुर, उदयपुर, बालोतरा, जोधपुर और चूरू में भी इसके उप-केंद्र सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।
रोजगार और प्रमाणन के नए द्वार
इस संस्था के माध्यम से पिछले दो साल और चार महीने की अवधि में लगभग 27 हजार भारी वाहन चालकों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कोर्स सफलता पूर्वक पूरा करने वाले सभी चालकों को एनएसक्यूएफ लेवल-4 सर्टिफिकेट से नवाजा जाता है। इस महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र के मिल जाने से प्रशिक्षित चालकों के लिए भारत के भीतर ही नहीं, बल्कि दुनिया के करीब 90 देशों में भी रोजगार हासिल करने के नए रास्ते प्रशस्त होने की पूरी उम्मीद है। इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य चालकों के ड्राइविंग कौशल को निखारना और उन्हें सड़क पर अधिक जिम्मेदार व सुरक्षित बनाना है, ताकि लगातार होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में प्रभावी कमी लाई जा सके।
सुविधाओं और ट्रेनिंग का पूरा विवरण
इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह चालकों के लिए पूरी तरह नि:शुल्क रखा गया है। इसमें भाग लेने वाले प्रत्येक चालक को आभा आईडी, दुर्घटना बीमा सुरक्षा, भोजन, चाय और एक विशेष ड्राइवर किट भी बिल्कुल मुफ्त दी जा रही है। ट्रेनिंग के दौरान विशेषज्ञों द्वारा चालकों को रोड सेफ्टी, यातायात संकेत, वाहन की सुरक्षा, सुरक्षित ड्राइविंग के गुर, गाड़ियों में आने वाली नई आधुनिक तकनीकों और गुड सेमैरिटन से जुड़े अहम विषयों की विस्तृत जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही सड़क पर किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से निपटने के तरीके और दुर्घटना में घायल व्यक्ति की तुरंत सहायता करने के तौर-तरीके भी सिखाए जाते हैं।
अधिकारियों का निरीक्षण और अपील
इस प्रशिक्षण केंद्र के निरीक्षण के दौरान रोड सेफ्टी के डिप्टी कमिश्नर डॉ. वीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने भारी वाहन चलाने वाले सभी चालकों से आग्रह किया कि वे आगे आएं और इस नि:शुल्क प्रशिक्षण का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं। उनका कहना था कि सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए वाहन चलाने वाले हर एक शख्स का प्रशिक्षित और जागरूक होना बेहद जरूरी है। इस तरह के आयोजनों से न केवल यातायात के नियमों की समझ गहरी होती है, बल्कि सुरक्षित ड्राइविंग को लेकर चालकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है।
स्थानीय चालकों को बड़ी राहत
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान एआरटीओ अभय मुद्गल और परिवहन निरीक्षक देवेन्द्र सुंडा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। विभाग के अधिकारियों ने भरतपुर और डीग क्षेत्र के ज्यादा से ज्यादा भारी वाहन चालकों को इस मुमकिन मुहिम से जोड़ने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। भरतपुर में ही उप-केंद्र खुल जाने से अब जिले के चालकों को ट्रेनिंग के सिलसिले में दूसरे शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। स्थानीय स्तर पर ही निशुल्क प्रशिक्षण, आधिकारिक प्रमाण पत्र, बीमा कवर और अन्य तमाम सुविधाएं मिल जाने से भारी संख्या में चालकों के इससे जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।



















