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समस्तीपुर कॉलेज के बाहर मिलता है ये मशहूर छोले-कुलचा, महज 30 रुपये में मिलता है लाजवाब स्वादजीवनशैली
10 जुल॰ 2026, 6:29 pm (45 दिन पहले)· 2

समस्तीपुर कॉलेज के बाहर मिलता है ये मशहूर छोले-कुलचा, महज 30 रुपये में मिलता है लाजवाब स्वाद

समस्तीपुर कॉलेज के समीप लगने वाला एक छोटा सा फूड स्टॉल अपने स्वादिष्ट छोले-कुलचे के कारण शहर में काफी चर्चा बटोर रहा है। यहाँ के जायके के दीवाने दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं।

अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और समस्तीपुर में एक बेहतरीन चटपटा अनुभव तलाश रहे हैं, तो समस्तीपुर कॉलेज के पास मिलने वाला छोले-कुलचा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। बदलते मौसम और बढ़ते स्वाद के रुझान के बीच यह छोटा सा ठेला शहर के फूड प्रेमियों की पहली पसंद बना हुआ है। कॉलेज के बगल में स्थित इस स्टॉल पर रोजाना भारी भीड़ उमड़ती है। रविवार का दिन छोड़ दें, तो बाकी पूरे सप्ताह यहां ग्राहकों का तांता लगा रहता है। न केवल स्थानीय लोग, बल्कि शहर के दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इस खास स्वाद का अनुभव लेने यहां पहुंचते हैं। इस छोले-कुलचे की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां महज 30 रुपये में एक प्लेट का आनंद लिया जा सकता है, जो ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है।

स्वाद का असली राज और सामग्री

इस ठेले को चलाने वाले संतोष कुमार बताते हैं कि उनके व्यंजन का सबसे बड़ा आकर्षण छोले तैयार करने की विधि है। छोले वे हर दिन अपने घर पर ताजा तैयार करके लाते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है। पारंपरिक तांबे के बर्तनों में इन छोलों को रखा जाता है, जिससे इनका जायका लंबे समय तक बरकरार रहता है और इनके जल्दी खराब होने का डर भी नहीं रहता। छोले बनाने के लिए सफेद मटर को पूरी तरह उबाला जाता है, जिसके बाद उसमें बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरा धनिया और हरी मिर्च मिलाई जाती है। स्वाद को चटपटा बनाने के लिए इमली का पानी, लाल मिर्च पाउडर और गरम मसाले का सटीक मिश्रण इस्तेमाल होता है। कुल मिलाकर, लगभग छह से सात तरह के मसालों का उपयोग करके इसे तैयार किया जाता है, जो इसे बाजार के अन्य विकल्पों से अलग बनाता है।

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कुलचे की खासियत और वैरायटी

इस स्टॉल पर इस्तेमाल होने वाला कुलचा उत्तर प्रदेश से मंगवाया जाता है। इसे इस खास तरह से तैयार किया जाता है कि इसकी कोमलता और स्वाद लंबे समय तक बना रहे। संतोष कुमार के अनुसार, कुलचा काफी हद तक पाव रोटी जैसा होता है, जिसे तीन से चार दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ग्राहकों के लिए यहां दो विकल्प मौजूद हैं। यदि आप सादे स्वाद में कुलचा लेना चाहते हैं, तो यह रिफाइंड में सेंका जाता है, जिसकी कीमत 30 रुपये प्रति प्लेट है। वहीं, अगर आप इसका आनंद बटर (मक्खन) के साथ लेना चाहते हैं, तो यह विकल्प 40 रुपये प्रति प्लेट में उपलब्ध है।

ग्राहक और लोकप्रिय समय

इस ठेले पर ग्राहकों की भारी आवाजाही सुबह से लेकर शाम तक बनी रहती है। कॉलेज के छात्र-छात्राओं के बीच यह जगह बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि यह न केवल सस्ता है बल्कि स्वाद में भी लाजवाब है। इसके अलावा, राहगीर, दफ्तरों में काम करने वाले लोग और अपने परिवारों के साथ आने वाले ग्राहक भी यहां नियमित रूप से देखे जाते हैं। शाम का समय यहां सबसे अधिक भीड़ वाला होता है। साफ-सफाई और ताजा सामग्री के प्रति संतोष कुमार की प्रतिबद्धता ने इस स्टॉल को समस्तीपुर की एक प्रमुख पहचान बना दिया है। यही कारण है कि जो भी व्यक्ति एक बार यहां आकर छोले-कुलचे का स्वाद चखता है, वह न केवल दोबारा लौटकर आता है बल्कि दूसरों को भी यहां आने की सलाह देता है।

सवाल-जवाब

छोले-कुलचे की प्लेट की कीमत क्या है?
सादा कुलचा (रिफाइंड) 30 रुपये और बटर कुलचा 40 रुपये प्रति प्लेट की कीमत पर उपलब्ध है।
यह स्टॉल कहां स्थित है?
यह स्टॉल समस्तीपुर कॉलेज के बगल में स्थित है।
क्या यह स्टॉल रविवार को खुला रहता है?
नहीं, यह स्टॉल रविवार को बंद रहता है।
कुलचा कहां से मंगवाया जाता है?
यहां इस्तेमाल होने वाले कुलचे उत्तर प्रदेश से मंगवाए जाते हैं।
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