दीपावली के बाद आने वाली ग्यारस यानी देवउठनी एकादशी के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चार महीनों के शयन के बाद देवता जागते हैं, जिससे शुभ मुहूर्तों की झड़ी लग जाती है। लेकिन देवउठनी एकादशी के साथ ही उत्तर और मध्य भारत में ठंड भी तेजी से दस्तक देती है। इस दौरान शादी और उत्सवों में शामिल होने वाली महिलाओं के लिए पारंपरिक परिधान पहनना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। अकसर महिलाएं सजने-संवरने के चक्कर में कंपकंपाती ठंड के बीच केवल सामान्य साड़ी पहनकर कार्यक्रमों में पहुंच जाती हैं, जिससे उनके बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी मुश्किल का समाधान करते हुए हथकरघा बुनकरों ने अब एक खास परिधान तैयार किया है।
तापमान के हिसाब से ढलने वाला ताना-बाना
शादी और पार्टियों के शौकीनों के लिए अब ऐसी साड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं जो स्वेटर और जैकेट जैसी गर्माहट देती हैं। इन्हें क्लाइमेट वेदर साड़ी अथवा मौसम स्पेशल साड़ी का नाम दिया गया है। इन परिधानों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वातावरण के मिजाज को भांपकर अपना असर दिखाती हैं। जब बाहर तेज ठंड होती है तो यह शरीर को गर्म रखती हैं, वहीं मौसम सामान्य या गर्म होने पर यह ठंडक का सुखद अहसास कराती हैं। इस वजह से किसी भी शादी समारोह में महिलाओं को साड़ी के ऊपर भारी-भरकम कार्डिगन या शॉल ओढ़ने की मजबूरी नहीं रह जाती।
10 से 12 दिन की मेहनत से हथकरघा पर निर्माण
यह पूरी तरह से हाथों से तैयार होने वाला उत्पाद है। इसके निर्माण में सिल्क और वूल (ऊन) दोनों प्रकार के धागों का बारीकी से उपयोग किया जाता है। बुनकर वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल फॉर्मेट में इन धागों को एक साथ पिरोते हैं। दोनों धागों के इस संतुलन की वजह से ही वस्त्र को विभिन्न मौसमों के अनुकूल बनने की क्षमता मिलती है। एक साड़ी को हथकरघा पर तैयार करने में लगभग 10 से 12 दिन तक का समय लग जाता है। हाथ से बुने जाने के कारण इनका कपड़ा न केवल काफी मजबूत होता है बल्कि शरीर पर लपेटने के बाद यह फूला-फूला भी नहीं दिखता। असली सिल्क के प्रयोग से इनकी चमक और उम्र बहुत लंबी होती है।
प्रेस करने का झंझट खत्म और कश्मीरी किस्मों की भरमार
कश्मीर से मध्य प्रदेश के सागर पहुंचे वाहिद जावेद ने पारंपरिक कश्मीरी कपड़ों के कई नायाब नमूने पेश किए हैं। उनके संग्रह में कानि पशमीना, पश्तून, रिंग पास पशमीना, कश्मीरी चिनाना, क्लाइमेट वेदर साड़ी और डाईएबल साड़ी जैसी प्रमुख किस्में शामिल हैं। इन साड़ियों की सबसे व्यावहारिक खूबी यह है कि इन्हें सामान्य तौर पर प्रेस करने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कभी कभार इन पर प्रेस कर भी ली जाए तो कपड़े को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता। इस तरह यह परिधान आधुनिक महिलाओं की कामकाजी दिनचर्या और पार्टियों के हिसाब से बेहद सुगम साबित हो रहे हैं।
कीमत और डाईएबल साड़ी पर 20 प्रतिशत कटौती का विकल्प
दाम की बात करें तो क्लाइमेट वेदर साड़ी 2200 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की रेंज में मिल रही है। यह किफायती दायरा मध्यम वर्ग से लेकर खास खरीदारों तक सभी को आकर्षित कर रहा है। इसके साथ ही संग्रह में शामिल डाईएबल साड़ी भी काफी ध्यान खींच रही है। इस साड़ी को महिलाएं अपनी व्यक्तिगत पसंद, जरूरत या थीम के अनुसार कभी भी मनचाहे रंग में रंगवा सकती हैं। इतना ही नहीं, डाईएबल साड़ी के लिए एक विशेष वापसी सुविधा भी रखी गई है, जिसके तहत यदि कोई ग्राहक इसे वापस करना चाहे तो खरीद मूल्य से 20 प्रतिशत लेस करके बाकी पैसे लौटा दिए जाते हैं।


















