सर्दियों का मौसम दस्तक देते ही तापमान में गिरावट आने लगती है और कोहरा छाने लगता है। यह बदलाव गार्डन में सजे पौधों की सेहत पर सीधा असर डालता है। इस दौरान पौधों को ठंड के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतनी जरूरी हो जाती है। सबसे पहले गमलों की दिशा ऐसी जगह तय करें जहां सुबह की पहली धूप सीधे पहुंच सके। अधिकांश फूलों और सब्जियों के पौधों को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे धूप की दरकार होती है। मौसम के इस कड़े मिजाज में जरा सी लापरवाही पौधों की रौनक छीन सकती है।
खाद और कटिंग से संवारें पौधे
नर्सरी संचालक नेक सिंह ने सर्दियों की शुरुआत को लेकर खास सलाह दी है। अक्टूबर का महीना खत्म होने के साथ ही नवंबर की शुरुआत में कोहरा अपनी दस्तक देने लगता है। इस अवधि में गार्डन की देखरेख का तरीका थोड़ा बदलना पड़ता है। सबसे पहले पौधों पर नजर डालें और उनकी सूखी हुई टहनियों की तुरंत कटिंग कर दें। इसके अलावा इस मौसम में मौसमी फूलों के पौधे रोपने का भी सही समय होता है। पौधों की सेहत सुधारने के लिए रासायनिक की जगह जैविक खाद को प्राथमिकता दें। गुड़ाई करने के बाद हर पौधे में डीएपी खाद के 10 से 15 दाने डाले जा सकते हैं, लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि खाद सीधे तने या जड़ों के संपर्क में न आए।
पोषण और पानी का रखें संतुलन
जरूरत के हिसाब से एनपीके 19:19:19 दानेदार खाद का इस्तेमाल भी पौधों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इससे पौधों को सभी जरूरी पोषक तत्व समय पर मिलते हैं और उनकी ग्रोथ लगातार बनी रहती है। संतुलित पोषण और सही समय पर देखभाल मिलने से कड़ाके की ठंड में भी पौधों पर नई पत्तियां और रंग-बिरंगे फूल खिलने लगते हैं। जब भी दिन में धूप निकले, पौधों को खुली धूप में जरूर रखें ताकि नमी का सही स्तर बना रहे। इसके अलावा पानी देते वक्त यह सावधानी बरतें कि जरूरत से ज्यादा पानी न पड़े, क्योंकि अतिरिक्त नमी से जड़ें सड़ सकती हैं। इन तमाम छोटी-छोटी बातों को अपनाकर आप अपने पूरे गार्डन को हरा-भरा और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।

















