अगर आपको भी घर की बालकनी, छत या आंगन में बागवानी का शौक है, तो इस बार अपने छोटे से किचन गार्डन में ऐसे पौधे उगाने पर विचार करना चाहिए जो न केवल घर की शोभा बढ़ाएं बल्कि आपके दैनिक घरेलू कामकाज और सेहत में भी काम आ सकें। इसके लिए आपको किसी बड़े बगीचे या महंगे गमलों की कोई आवश्यकता नहीं है। आप आसानी से ग्रो बैग, पुराने डिब्बों से तैयार किए गए जुगाड़ वाले गमलों या साधारण मिट्टी में भी कई प्रकार के औषधीय पौधों को विकसित कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें से कई पौधे बहुत कम समय में तैयार हो जाते हैं और आप इनकी पत्तियों का इस्तेमाल बिना किसी लंबी प्रतीक्षा के शुरू कर सकते हैं। सतना के किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में साझा किया कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के मध्य तक घर पर तुलसी, एलोवेरा, लेमन ग्रास, गिलोय और पुदीना जैसे पांच प्रमुख औषधीय पौधे बहुत सरलता से उगाए जा सकते हैं। इन सभी पौधों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि इन्हें सही देखभाल और उपयुक्त स्थान मिल जाए, तो ये लंबे समय तक आपके घर के वातावरण को हरा-भरा बनाए रखने में पूरी मदद करते हैं।
तुलसी की देखभाल और उपयोग
तुलसी हमारे देश के लगभग हर घर में बहुत आसानी से पाया जाने वाला एक बेहद पवित्र और उपयोगी पौधा है, जिसका गहरा धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ पारंपरिक घरेलू उपयोग भी बहुत अधिक है। इसकी ताजी पत्तियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से चाय और काढ़े जैसी गर्म पेय पदार्थों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-जुकाम जैसी आम समस्याओं के दौरान भी देश के तमाम घरों में लोग तुलसी का सेवन करना पसंद करते हैं। इस पौधे को घर में ऐसी जगह पर लगाना सबसे बेहतर रहता है जहां इसे रोजाना कम से कम 4 से 6 घंटे तक लगातार सीधी धूप मिल सके। जब यह पौधा करीब 6 से 8 इंच तक बड़ा हो जाए, तब आप इससे पत्तियां तोड़ना शुरू कर सकते हैं। आमतौर पर एक छोटे पौधे को पत्तियों के उपयोग लायक बनने में लगभग 30 से 45 दिनों का समय लग सकता है। तुलसी के पौधे को घना और स्वस्थ बनाने के लिए समय-समय पर इसके ऊपरी हिस्सों की कोपलों को पिंच यानी काटते रहना चाहिए। इसके अलावा जब पौधे में फूलों की मंजरी बनने लगे, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए ताकि पौधे की लगातार बढ़वार बनी रहे।
कम पानी में आसानी से पनपने वाला एलोवेरा
यदि आपके पास अपने पौधों की नियमित देखभाल के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं बचता है, तो एलोवेरा का पौधा आपके लिए एक बेहतरीन और सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकता है। इसकी मोटी और मांसल पत्तियों के अंदर भरे हुए प्राकृतिक जेल का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधनों, त्वचा की देखभाल और बालों को स्वस्थ रखने से जुड़े तमाम उत्पादों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस पौधे को अपने घर में उगाने के लिए हमेशा ऐसे गमले का चुनाव करना चाहिए जिसके नीचे पानी बाहर निकलने के लिए पर्याप्त छेद हो। एलोवेरा को अच्छी धूप बहुत पसंद है लेकिन इसे बार-बार पानी देने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इसकी मिट्टी जब पूरी तरह से सूख जाए, केवल तभी इसमें पानी डालें क्योंकि गमले में जरूरत से ज्यादा नमी या पानी बने रहने से इसकी जड़ें सड़ सकती हैं। इस पौधे को उपयोग लायक पत्तियां देने में लगभग 3 से 6 महीने का वक्त लग सकता है। जब आपका पौधा अच्छी तरह बड़ा हो जाए, तो हमेशा सबसे बाहर की ओर मौजूद मोटी और निचली पत्तियों को उसके आधार के पास से काटना चाहिए।
लेमन ग्रास से घर पर बनाएं खुशबूदार हर्बल चाय
लेमन ग्रास की पत्तियों से एक बहुत ही भीनी और ताजी नींबू जैसी मनमोहक खुशबू आती है, जिसका उपयोग विशेष रूप से हर्बल चाय तैयार करने में किया जाता है। इसकी यह प्राकृतिक खुशबू और एक गर्म पेय के रूप में इसका सेवन करना कई लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से सुकून महसूस कराने में मदद कर सकता है। इस उपयोगी पौधे को घर में ऐसी जगह पर लगाना चाहिए जहां पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो। पौधे को ठीक से बढ़ने के लिए पानी की जरूरत तो जरूर होती है, लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि गमले की मिट्टी में पानी कभी भी जमा न हो पाए। सामान्य तौर पर लगभग 60 से 90 दिनों के भीतर इस खास घास की फसल उपयोग के लायक हो जाती है। जब इसके तने पर्याप्त रूप से मोटे हो जाएं, तब जमीन या मिट्टी की सतह से करीब दो से तीन इंच ऊपर से इसकी पत्तियों और घास की कटाई करनी चाहिए। यदि आप इसकी सही देखभाल करते हैं, तो यह पौधा दोबारा तेजी से बढ़ जाता है और भविष्य में भी इस्तेमाल के लिए आपको लगातार हरी पत्तियां मिलती रहती हैं।
दीवार या सहारे से बढ़ने वाली गिलोय की बेल
गिलोय मुख्य रूप से एक बेल के रूप में उगने वाला ऐसा पौधा है, जिसे आप अपने घर की किसी खाली दीवार, लोहे की जाली या किसी मजबूत सहारे के पास आसानी से लगा सकते हैं। हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस पौधे का इस्तेमाल प्राचीन काल से ही बहुत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। इसे घर में लगाने के बाद सबसे जरूरी बात यह होती है कि इस बेल को फैलने के लिए खुला स्थान और ऊपर चढ़ने के लिए एक मजबूत सहारा प्रदान किया जाए। लगभग तीन से चार महीनों की अवधि में इसकी डंडी या तना पेंसिल जितना मोटा हो जाता है, जिसके बाद आप अपनी आवश्यकतानुसार इसके तने के हिस्सों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सबसे तेजी से बढ़ने वाला उपयोगी पुदीना
पुदीना उन लोगों के लिए एक बहुत ही शानदार विकल्प है जो बहुत कम समय के भीतर अपने खुद के किचन गार्डन से ताजी पत्तियां तोड़कर इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसकी हरी-भरी पत्तियां चटनी, ठंडा शरबत, सलाद और रसोई में बनने वाले कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के काम आती हैं। पारंपरिक मान्यताओं और घरेलू नुस्खों के अनुसार इसका इस्तेमाल पेट और पाचन से जुड़ी कई तरह की परेशानियों को दूर करने में भी किया जाता है। पुदीने को हमेशा हल्की छांव वाली जगह या फिर सुबह की हल्की धूप मिलने वाले स्थान पर उगाना चाहिए। कटिंग के जरिए लगाया गया पुदीना लगभग 15 से 30 दिनों के भीतर ही उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है। जब इसकी हरी टहनियां लगभग 6 इंच लंबी हो जाएं, तब ऊपर-ऊपर से इसकी पत्तियां तोड़नी चाहिए। चूँकि इसकी बढ़वार बहुत तेजी से होती है, इसलिए इसे हमेशा किसी अलग गमले में लगाना ही सबसे समझदारी भरा कदम रहता है।
गमले की मिट्टी और सही देखभाल के जरूरी नियम
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी औषधीय पौधों को अपने घर में सफलताપૂર્વक उगाने के लिए जरूरी है कि गमले की मिट्टी में पानी की निकासी की बहुत अच्छी व्यवस्था हो। इसके लिए आप 50 प्रतिशत सामान्य बागवानी मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कंपोस्ट और 20 प्रतिशत रेत को आपस में मिलाकर एक बेहतरीन उपजाऊ मिश्रण तैयार कर सकते हैं। हर गमले के निचले हिस्से में जल निकासी के लिए उचित छेद अवश्य होना चाहिए। तुलसी और पुदीने की मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, जबकि एलोवेरा को पानी तभी दें जब उसकी मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी हो। इसके अलावा तुलसी, लेमन ग्रास और एलोवेरा को हमेशा पर्याप्त धूप वाले स्थान पर रखें, जबकि पुदीने को आप हल्की छांव वाली जगह पर भी आसानी से उगा सकते हैं। पौधों से नियमित रूप से सूखी हुई पत्तियों को हटाते रहना और तुलसी व पुदीने की ऊपरी कोपलों की समय पर छंटाई करना उन्हें घना और स्वस्थ बनाए रखने में बहुत मदद करता है। इस तरह थोड़ी सी जगह और थोड़ी सी सही देखभाल के जरिए आप भी अपने घर में अपना खुद का एक छोटा और सुंदर औषधीय किचन गार्डन तैयार कर सकते हैं। हालांकि यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि ये औषधीय पौधे केवल हमारे घरेलू उपयोग और स्वास्थ्य में सहायक हो सकते हैं, लेकिन किसी भी गंभीर बीमारी के पक्के इलाज या डॉक्टर की दवा के विकल्प के रूप में कभी भी पूरी तरह से इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।





















