देश भर में नई पीढ़ी यानी जेन जी के आचरण, जीवनशैली और सोच को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवाओं के मार्गदर्शन के लिए कई महत्वपूर्ण बातें सामने रखी हैं। एक विस्तृत बातचीत के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने वर्तमान युवा पीढ़ी की क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि आज के युवा बेहद तेज, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सतर्क हैं। वे अपनी बात मजबूती से रखना जानते हैं और अपना हक पाना भी जानते हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने युवाओं के समक्ष आ रही सबसे बड़ी चुनौती पर चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, आज के युवा डिजिटल माध्यमों के जरिए पूरी दुनिया से तो जुड़ चुके हैं, लेकिन वे खुद से, अपने परिवार से और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से लगातार दूर होते जा रहे हैं।
डिजिटल भटकाव और 'माइंडसेट लाइफ सेट' पहल
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवाओं को सलाह दी कि उन्हें अपने विचार आधुनिक रखने चाहिए, परंतु संस्कारों के मामले में मजबूत और प्राचीन परंपराओं से जुड़ा रहना चाहिए। युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें सही दिशा देने के उद्देश्य से उन्होंने 'माइंडसेट लाइफ सेट' नामक विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की। यह 3 दिनों का एक ऑफलाइन कार्यक्रम होगा, जिसमें सुबह ध्यान और मेडिटेशन के सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके अवचेतन मन की शक्ति को समझने में मदद करना और सोशल मीडिया की लत से मुक्ति दिलाना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और रील्स का प्रभाव इतना अधिक बढ़ चुका है कि युवा घंटों तक स्क्रीन स्क्रॉल करते रहते हैं और उन्हें समय बीतने का आभास तक नहीं होता। सोशल मीडिया पर जहां एक ओर उपयोगी जानकारी उपलब्ध है, वहीं दूसरी ओर लोगों के मानसिक कचरे का एक बड़ा हिस्सा भी भरा पड़ा है। इसलिए युवाओं के लिए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना और इंटरनेट का नियंत्रित इस्तेमाल करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
युवाओं के लिए 5 मुख्य जीवन मंत्र
बातचीत के दौरान उन्होंने नई पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए 5 अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत रेखांकित किए
- रील्स और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: सोशल मीडिया पर बिना वजह घंटों समय बर्बाद करने के बजाय अपनी भावनाओं और मोबाइल के इस्तेमाल पर स्वयं का नियंत्रण स्थापित करें।
- अपनी जड़ों और परिवार से जुड़ाव: आधुनिक दुनिया से जुड़ने के साथ-साथ अपने परिवार, नैतिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना उतना ही अनिवार्य है।
- ऊर्जा का सही दिशा में नियोजन: केवल सूचनाएं जुटाने में समय नष्ट न करें। अपने जीवन का एक स्पष्ट लक्ष्य तय करें और उसी लक्ष्य से संबंधित ज्ञान और कौशल प्राप्त करें।
- सत्यता की जांच किए बिना भरोसा न करना: सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अधूरी वीडियो क्लिप या वायरल खबरों को देखकर तुरंत कोई धारणा न बनाएं। किसी भी विषय पर फैसला लेने से पहले उसकी पूरी सच्चाई और तथ्यों को समझें।
- अभद्र भाषा के स्थान पर संवाद का चयन: अपनी बात और विरोध को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, लेकिन गाली-गलौज और अभद्रता से बचें। हर समस्या का हल सडकों पर आंदोलन करने से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण संवाद से निकल सकता है।
मनुस्मृति और महिला सम्मान पर विचार
राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति पर उठाए गए सवालों के संदर्भ में धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वे राजनीतिक नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देते, लेकिन विषय की सैद्धांतिक व्याख्या अवश्य कर सकते हैं। मनुस्मृति को महिला विरोधी बताए जाने के दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भारतीय संस्कृति में 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता' का विधान हो, वहां महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी परंपरा में सदैव महिलाओं का नाम पहले लिया जाता है, जैसे सीता-राम, राधा-कृष्ण और पार्वती-शिव। धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, किसी भी प्राचीन ग्रंथ की एक पंक्ति या संदर्भ को बिना समझे पूरे शास्त्र को गलत ठहराना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मगुरुओं और संतों का यह दायित्व है कि वे प्राचीन ग्रंथों को सही संदर्भ में समाज के सामने रखें और आवश्यकता पड़ने पर उनमें सुधार या पुनर्विचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।
राजनीतिक तटस्थता, विरोध प्रदर्शन और नेतृत्व
युवाओं द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शनों और आंदोलनों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं और मांगों को सुना जाना चाहिए, लेकिन हर बात पर सडकों पर उतरना उचित समाधान नहीं है। उन्होंने आंदोलन की तुलना में संवाद को अधिक प्रभावी और रचनात्मक माध्यम बताया। उन्होंने छात्रों को सचेत किया कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल का मोहरा नहीं बनना चाहिए।
प्रदर्शनों के दौरान होने वाली गाली-गलौज को उन्होंने नैतिक संस्कारों की कमी से जोड़ा, यद्यपि उन्होंने यह भी माना कि अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना युवाओं का अधिकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विषय में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनका व्यक्तित्व असाधारण है और वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के हित में सोचते हैं। किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि देश की सत्ता पर उसी विचार या दल को होना चाहिए जो राष्ट्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करे।
सामाजिक समरसता, आरक्षण और प्रेरणास्रोत
आरक्षण के मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे आरक्षण व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं और समाज के जरूरतमंद वर्गों को इसका लाभ अवश्य मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि समाज में आर्थिक स्थिति यानी अमीर और गरीब के धरातल पर भी सहायता देने की दिशा में विचार किया जाना चाहिए।
जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि जाति का अहंकार देश को आंतरिक रूप से कमजोर करता है। उनके अनुसार, जातियों को पूरी तरह समाप्त करना भले ही संभव न हो, लेकिन ऊंच-नीच और श्रेष्ठता के अहंकार को समाप्त करना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे स्वामी विवेकानंद, अल्बर्ट आइंस्टीन, एपीजे अब्दुल कलाम और रानी लक्ष्मीबाई जैसी महान हस्तियों के जीवन से प्रेरणा लें और उन्हें अपना रोल मॉडल बनाएं। युवाओं द्वारा गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे संगठनों या नामों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन का नाम रखना व्यक्तिगत पसंद हो सकती है, लेकिन युवाओं को किसी भी विचार या संगठन से जुड़ने से पहले तर्क और विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए।
जापान यात्रा का अनुभव और वैश्विक संदेश
अपनी हालिया जापान यात्रा का उल्लेख करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि वहां पहली बार किसी भारतीय धर्मगुरु के रूप में उनकी कथा का आयोजन हुआ, जिसमें अनिवासी भारतीयों के साथ-साथ जापानी नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने जापान में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप के क्षणों को भी याद किया। वे एक ऊंची इमारत में मौजूद थे और उन्होंने लगभग 18 सेकंड तक धरती में कंपन महसूस किया।
उन्होंने जापान की अत्याधुनिक बुलेट ट्रेन, बुनियादी ढांचे और वहां के नागरिकों के अनुशासन व व्यवस्था की सराहना की। उल्लेखनीय है कि इस यात्रा से पूर्व वे श्रीलंका के प्रवास पर भी गए थे, जहां उन्होंने विश्व बंधुत्व और 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना के साथ योग और शांति का संदेश दिया था।
करियर, व्यक्तिगत जीवन, जनसंख्या नीति और साधना
युवाओं के करियर और प्रेम संबंधों से जुड़े प्रश्नों पर उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में युवाओं को अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। यदि जीवन में कभी धोखा मिले, तब भी खुद किसी के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए। किसी व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले उसकी प्रतिबद्धता और जीवनभर साथ निभाने की क्षमता को परखना आवश्यक है।
अपने द्वारा दिए गए 4 बच्चों के आह्वान पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह अपील देश में घटती जन्मदर और भविष्य में बुजुर्ग आबादी के बढ़ते अनुपात की चिंता से जुड़ी है। उन्होंने देश में एक समान जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने माना कि महंगाई और बेरोजगारी बड़ी समस्याएं हैं, लेकिन युवाओं की संख्या में लगातार कमी आना भविष्य में देश के लिए एक गंभीर जनसांख्यिकी संकट खड़ा कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल असीमित जानकारी की नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य और उस लक्ष्य को हासिल करने की कार्यक्षमता की आवश्यकता है। अंत में, उन्होंने बताया कि वे हाल ही में नारायण पर्वत पर 21 दिनों की कठिन एकांत नारायण और हनुमत साधना पूरी करके लौटे हैं।



















