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बीजिंग रोबोट गेम्स में तियानगोंग और ऑनर ने तोड़ा उसेन बोल्ट का स्प्रिंट रिकॉर्डएआई
26 अग॰ 2026, 11:59 pm (1 घंटे पहले)· 3

बीजिंग रोबोट गेम्स में तियानगोंग और ऑनर ने तोड़ा उसेन बोल्ट का स्प्रिंट रिकॉर्ड

चीन की राजधानी बीजिंग में संपन्न हुए विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स में रोबोट्स ने दौड़ और कूद के नए रिकॉर्ड बनाए, वहीं बारीक कामों में भी अपनी क्षमता साबित की।

चीन की राजधानी बीजिंग में 22 अगस्त से शुरू हुए विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स का 26 अगस्त को औपचारिक समापन हो गया। पांच दिनों तक चली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में आधुनिक रोबोटिक्स तकनीक, उन्नत एल्गोरिदम और रोबोट्स के मनोरंजक हादसों का अनूठा संगम देखने को मिला। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल हुए गति और लंबी कूद के नए रिकॉर्ड्स के अलावा, इस बार की प्रतियोगिता में बारीक हाथों के काम से जुड़ी कई नई चुनौतियां भी शामिल की गईं। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य रोबोटिक्स कंपनियों को ऐसी प्रणालियां विकसित करने के लिए प्रेरित करना था, जो केवल प्रदर्शन तक सीमित न रहकर कारखानों, गोदामों और आम जीवन में व्यावहारिक रूप से काम आ सकें।

स्प्रिंट ट्रैक पर टूटे इंसानी रिकॉर्ड और एथलेटिक प्रदर्शन

इस वैश्विक आयोजन का विशाल पैमाना उद्घाटन समारोह से ही स्पष्ट हो गया था, जहां आयोजकों के अनुसार 600 से अधिक टीमों ने 2,000 से अधिक रोबोट्स के साथ हिस्सा लिया। अकेले चीन में ही 100 से अधिक ह्यूमनॉइड रोबोट निर्माता कंपनियां काम कर रही हैं, जबकि 15 अन्य देशों के इंजीनियरिंग दल भी इस प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे थे। प्रतियोगिता के दौरान जजों ने रोबोट्स के शारीरिक संतुलन और कार्य क्षमता को परखने के लिए कई तरह के कड़े मुकाबले आयोजित किए।

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प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण 100 मीटर की स्प्रिंट दौड़ रही। बीजिंग ह्यूमनॉइड रोबोट इनोवेशन सेंटर द्वारा तैयार किए गए तियानगोंग अल्ट्रा रोबोट ने 100 मीटर की दूरी महज 8.86 सेकंड में पूरी कर नया इतिहास रच दिया। इससे कुछ ही दिन पहले स्मार्टफोन बनाने वाली प्रमुख कंपनी ऑनर के लाइटनिंग रोबोट ने इसी 100 मीटर की दूरी को 9.47 सेकंड में तय किया था। ये दोनों समय प्रसिद्ध धावक उसेन बोल्ट द्वारा बनाए गए 100 मीटर के इंसानी विश्व रिकॉर्ड से भी तेज़ हैं। तियानगोंग रोबोट ने बहुमुखी क्षमता का परिचय देते हुए 7.97 मीटर की छलांग लगाकर लंबी कूद प्रतियोगिता में भी पहला स्थान हासिल किया। वहीं, एक अन्य कंपनी के रोबोट ने टेबल टेनिस के खेल में ओलंपिक चैंपियन खिलाड़ी का मुकाबला किया।

रिंग में बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग के हादसे और मोटर की सीमाएं

तेज़ रफ्तार दौड़ के अलावा, रोबोट्स ने बॉक्सिंग रिंग में घूंसे बरसाए, फुटबॉल मैदान में गोल दागे, वेटलिफ्टिंग में भारी वजन उठाने का प्रयास किया और रंग-बिरंगी पोशाक पहनकर चीयरलीडिंग की। रोबोट्स की इंसानी जैसी बनावट के कारण उनकी गलतियां दर्शकों के लिए काफी मनोरंजक साबित हुईं। एक मुकाबले के दौरान एक रोबोट चीयरलीडर्स के प्रदर्शन को देखने में व्यस्त सा लगा और अपना संतुलन खोकर बालकनी की रेलिंग से नीचे गिर गया।

इन मनोरंजक दृश्यों के पीछे कई गंभीर तकनीकी चुनौतियां भी उजागर हुईं। तेज़ गति से दौड़ रहे कई रोबोट्स को अचानक रुकने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे कई रोबोट्स की इलेक्ट्रिक मोटर अत्यधिक गर्मी के कारण खराब हो गई। रोबोटिक्स इंजीनियरों ने जानबूझकर रोबोट्स को उनकी शारीरिक सीमाओं तक धकेला ताकि हार्डवेयर की कमजोरियों की पहचान की जा सके और उन्हें सुधारा जा सके।

गति के पीछे का विज्ञान: मोटर तकनीक और सिमुलेशन AI

ह्यूमनॉइड रोबोट तकनीक पर दशकों से शोध हो रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में आए बदलाव का मुख्य कारण छोटे और उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक मोटर हैं। ये मोटर तेज़ गति के दौरान भी रोबोट्स को गतिशील संतुलन प्रदान करते हैं। ब्राउन यूनिवर्सिटी की रोबोटिक्स विशेषज्ञ स्टेफनी टेलेक्स के अनुसार, चीन ने रोबोट हार्डवेयर के निर्माण में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। हांगझोऊ के हाई-टेक शहर से शुरू हुई यूनिट्री कंपनी, जो हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई है, इन्हीं मोटर और हार्डवेयर नवाचारों के बल पर दुनिया भर में प्रसिद्ध हुई।

हार्डवेयर के साथ-साथ, रोबोट्स को दौड़ते या कूदते समय गिरने से बचाने के लिए वर्चुअल सिमुलेशन में प्रशिक्षित AI एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है। कंप्यूटर सिमुलेशन के भीतर लाखों बार अभ्यास करके एल्गोरिदम संतुलन बनाए रखने की सबसे उपयुक्त रणनीति तलाशते हैं। यही कारण है कि कई रोबोट्स के दौड़ने का तरीका इंसानों से अलग दिखता है, क्योंकि AI ऐसे शारीरिक आंदोलनों को चुनता है जो यांत्रिक अंगों के लिए गणितीय रूप से सबसे बेहतर होते हैं, भले ही वे इंसानी शरीर की संरचना से मेल न खाते हों।

मोरावेक का विरोधाभास और बारीक कामों की चुनौती

रोबोट्स की शारीरिक शक्ति के साथ-साथ उनके दिमाग की क्षमता को परखने के लिए इस बार कुछ नए कार्य शामिल किए गए थे। इनमें सॉकेट में बिजली का केबल लगाना और नकली बेडरूम के भीतर कचरा उठाकर कूड़ेदान में डालना शामिल था। स्टेफनी टेलेक्स ने समझाया कि जटिल वातावरण में किसी वस्तु को पकड़ना या संभालना रोबोट्स को दौड़ाने या कुदाने की तुलना में कहीं अधिक कठिन है। रोबोटिक्स के क्षेत्र में वस्तुओं का बारीक संचालन एक अत्यंत जटिल लक्ष्य माना जाता है, जिसे अमेरिका के कई स्टार्टअप्स उन्नत AI प्रणालियों के माध्यम से हल करने का प्रयास कर रहे हैं।

उंगलियों से बारीक काम करना रोबोट्स के लिए कठिन होता है क्योंकि इसमें घर्षण और फिसलन जैसे अनिश्चित भौतिक कारक शामिल होते हैं। इंसानों के पास स्पर्श की सूक्ष्म समझ और भौतिकी की सहज समझ होती है, जिससे वे तुरंत परिस्थिति के अनुसार ढल जाते हैं। रोबोट्स में इन जैविक क्षमताओं की कमी होती है। स्टेफनी टेलेक्स के अनुसार, यह मोरावेक के विरोधाभास का सटीक उदाहरण है। इस विरोधाभास के अनुसार, रोबोट्स के लिए बैकफ्लिप जैसी कठिन लगने वाली शारीरिक क्रियाएं करना आसान होता है, जबकि केबल प्लग करने जैसा साधारण लगने वाला काम उनके लिए बेहद जटिल होता है।

औद्योगिक स्वचालन, रिमोट कंट्रोल और स्वायत्त प्रदर्शन

प्रतियोगिता के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई प्रदर्शनों में रोबोट्स को इंसानी तकनीशियनों द्वारा रिमोट से संचालित (टेलीऑपरेशन) किया जा रहा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूर्ण स्वायत्तता हासिल करना अभी बाकी है। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी नियंत्रण में भी रोबोटिक हाथों से चिमटी के जरिए छोटी वस्तुओं को पकड़ना एक बड़ी तकनीकी प्रगति है। प्रतियोगिता के विस्तृत कार्यक्रम में ब्लॉक बनाने और चिमटी से राजमा के दाने उठाने जैसी गतिविधियां शामिल थीं। ये परीक्षण चीन की उन कोशिशों को दर्शाते हैं जिनके तहत वह ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स कारखानों के जटिल असेंबली कार्यों को स्वचालित करना चाहता है।

गैलबॉट नाम की कंपनी ने सुपरमार्केट परिदृश्य प्रतियोगिता में भाग लिया, जहां रोबोट्स को दुकानों की अलमारियों में सामान रखना था। गैलबॉट की प्रतिनिधि इवोन युआन के अनुसार, उनकी कंपनी रोबोट्स को कठिन परिस्थितियों में परखकर व्यावसायिक क्षमताओं को आगे बढ़ा रही है। उनका लक्ष्य रोबोट्स को बंद प्रयोगशालाओं से निकालकर खुले और अनिश्चित वातावरण में ले जाना है, जहां वे इंसानों के साथ मिलकर काम कर सकें। रिमोट संचालन के बावजूद, गैलबॉट ने पूर्ण स्वायत्तता का प्रदर्शन करते हुए एक रोबोट से इंसानी खिलाड़ी के खिलाफ टेनिस का मैच खिलवाया, जिसमें रोबोट ने त्वरित प्रतिक्रिया और दृष्टि बोध का उत्कृष्ट परिचय दिया।

जनता का उत्साह और रोबोटिक्स का वैश्विक परिदृश्य

एक ऐसे समय में जब AI के कारण नौकरियों के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, इस प्रतियोगिता ने रोबोटिक्स तकनीक के प्रति जनता में सकारात्मक उत्साह पैदा करने का काम किया। कारनेगी मेलन यूनिवर्सिटी के जाने-माने रोबोटिक्स विशेषज्ञ क्रिस एटकेसन ने चीन की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि कोई देश विज्ञान और इंजीनियरिंग के प्रति इतना उत्साह दिखा रहा है और तकनीकी भविष्य को सकारात्मक दृष्टिकोण से देख रहा है। उन्होंने यह भी अफसोस जताया कि ऐसा माहौल अमेरिका में देखने को नहीं मिल रहा है।

सवाल-जवाब

बीजिंग ह्यूमनॉइड रोबोट गेम्स का आयोजन कब और कहां हुआ?
यह आयोजन चीन की राजधानी बीजिंग में 22 अगस्त से 26 अगस्त तक आयोजित किया गया था।
किस रोबोट ने 100 मीटर दौड़ में सबसे तेज़ समय दर्ज किया?
बीजिंग ह्यूमनॉइड रोबोट इनोवेशन सेंटर द्वारा विकसित तियानगोंग अल्ट्रा ने 100 मीटर की दौड़ 8.86 सेकंड में पूरी की।
क्या रोबोट्स ने इंसानी विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया?
हां, तियानगोंग अल्ट्रा (8.86 सेकंड) और ऑनर के लाइटनिंग रोबोट (9.47 सेकंड) दोनों ने उसेन बोल्ट के 100 मीटर स्प्रिंट रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
मोरावेक का विरोधाभास क्या है?
मोरावेक के विरोधाभास के अनुसार रोबोट्स के लिए बैकफ्लिप जैसी कठिन शारीरिक क्रियाएं करना आसान होता है, लेकिन बिजली का प्लग लगाने जैसे साधारण काम अधिक कठिन होते हैं।
इस प्रतियोगिता में कितनी टीमों ने भाग लिया?
प्रतियोगिता में 600 से अधिक टीमों ने 2,000 से अधिक रोबोट्स के साथ भाग लिया, जिनमें 15 अन्य देशों के प्रतिभागी शामिल थे।
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