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न्यायपालिका में आंतरिक मामलों का फैसला स्थापित प्रक्रियाओं से ही होगा, मीडिया दावों से नहीं, बोले CJI सूर्यकांतराजस्थान
26 अग॰ 2026, 11:58 pm (1 घंटे पहले)· 3

न्यायपालिका में आंतरिक मामलों का फैसला स्थापित प्रक्रियाओं से ही होगा, मीडिया दावों से नहीं, बोले CJI सूर्यकांत

राजस्थान हाईकोर्ट विवाद पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि जजों के खिलाफ शिकायतों का निपटारा केवल तय संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मीडिया दावों के आधार पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता और प्रभावित पक्ष को निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर मिलेगा।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश की उच्च न्यायपालिका की आंतरिक कार्यप्रणाली और उसकी संवैधानिक गरिमा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। राजस्थान हाईकोर्ट से सामने आए हालिया विवाद और जस्टिस संदीप मेहता द्वारा प्रेषित पत्रों के संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने संस्थागत रुख को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि उच्च न्यायालयों या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों, व्यक्तिगत आक्षेपों या प्रशासनिक मुद्दों का समाधान सार्वजनिक बयानों, टीवी डिबेट्स या मीडिया रिपोर्टों के जरिए तय नहीं किया जा सकता। न्यायपालिका एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, और इसके भीतर उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रशासनिक या अनुशासनिक विषय का निस्तारण केवल पूर्व-निर्धारित संस्थागत नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत ही संपन्न होगा।

प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई का सिद्धांत

मामले की संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लिखे गए पत्रों में उठाए गए विषयों या शिकायतों को किसी सार्वजनिक मंच पर विचार-विमर्श का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी भी न्यायाधीश के विरुद्ध आरोप प्रस्तुत होने मात्र से उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर विशेष बल दिया कि संबंधित न्यायाधीश (जस्टिस शर्मा) को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष अवसर प्रदान किया जाना न्यायशास्त्र का बुनियादी नियम है। बिना किसी विस्तृत सुनवाई, साक्ष्य सत्यापन और संस्थागत समीक्षा के किसी भी प्रशासनिक निष्कर्ष पर पहुंचना प्राकृतिक न्याय के स्थापित सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन होगा।

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शिकायतों की गहन जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया

प्रशासकीय एवं सुधारात्मक जांच की प्रक्रिया को रेखांकित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि संपूर्ण प्रकरण की समीक्षा सक्षम एवं उचित स्तर पर की जा रही है। संस्थागत तंत्र के अंतर्गत जस्टिस संदीप मेहता द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री और जस्टिस शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए लिखित जवाब, दोनों का ही अत्यंत सूक्ष्मता और निष्पक्षता से विश्लेषण किया जा रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के दायित्व पर बने रहने, किसी संभावित प्रशासनिक तबादले या अन्य अनुशासनात्मक कदमों से जुड़े निर्णय केवल सक्षम ट्रांसफर अथॉरिटी द्वारा लिए जाएंगे। सभी अभिलेखों, दस्तावेजों और आधिकारिक पक्षों का निष्पक्ष मूल्यांकन पूरा होने के पश्चात ही कोई अंतिम प्रशासनिक कदम उठाया जाएगा।

हाईकोर्ट्स में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति और कॉलेजियम की भूमिका

इसके अतिरिक्त, मुख्य न्यायाधीश ने देश के विभिन्न राज्यों में स्थित हाईकोर्ट्स में मुख्य न्यायाधीशों के रिक्त पड़े पदों और उन पर प्रस्तावित नियुक्तियों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। CJI सूर्यकांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम देश भर के उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों के रिक्त स्थानों को भरने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। जस्टिस संदीप मेहता की चिंताओं और उनके पत्रों में उल्लेखित प्रशासनिक बिंदुओं का कॉलेजियम द्वारा उचित संज्ञान लिया जा चुका है। मुख्य न्यायाधीश के इस स्पष्टीकरण से यह संदेश भी पूर्णतः स्पष्ट हो गया है कि न्यायपालिका की आंतरिक नियुक्तियों एवं प्रशासनिक फैसलों पर किसी भी बाहरी दबाव या मीडिया अभियानों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

संस्थागत स्वायत्तता और जनविश्वास की सुरक्षा

CJI सूर्यकांत के इस कड़े रुख से यह रेखांकित होता है कि भारतीय न्यायपालिका अपनी आंतरिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी न्यायिक संस्था की साख और जनता का उस पर विश्वास तभी बना रहता है जब फैसले मीडिया ट्रायल के बजाय विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया से संचालित हों। राजस्थान हाईकोर्ट विवाद में सर्वोच्च अदालत का यह रुख यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रशासनिक जांचें निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और संस्थागत मर्यादा के दायरे में रहकर पूरी की जाएंगी।

सवाल-जवाब

CJI सूर्यकांत ने राजस्थान हाईकोर्ट विवाद पर क्या मुख्य बात कही?
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जजों के खिलाफ शिकायतों का फैसला मीडिया दावों से नहीं, बल्कि संस्थागत प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच के तहत होता है।
क्या केवल आरोपों के आधार पर किसी जज के खिलाफ सीधी कार्रवाई हो सकती है?
नहीं, CJI ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप लगना अंतिम निष्कर्ष नहीं है और संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का पूरा निष्पक्ष अवसर दिया जाएगा।
जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों और जवाबों की जांच कैसे की जाएगी?
सक्षम स्तर पर जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री और जस्टिस शर्मा द्वारा दिए गए लिखित जवाब दोनों का गहनता से निष्पक्ष अध्ययन किया जाएगा।
हाईकोर्ट में तबादले या प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला कौन लेगा?
सभी दस्तावेजों और पक्षों की निष्पक्ष जांच करने के बाद ही केवल ट्रांसफर अथॉरिटी द्वारा तबादले या प्रशासनिक कदम उठाने का फैसला लिया जाएगा।
देश भर के हाईकोर्ट्स में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर क्या प्रगति है?
CJI ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम देश के विभिन्न हाईकोर्ट्स में मुख्य न्यायाधीशों की खाली जगहों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रहा है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·34 मिनट पहले

राजस्थान उच्च न्यायालय से जुड़े इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि न्यायपालिका अपने आंतरिक अनुशासन को सार्वजनिक मंचों पर ले जाने से सख्त परहेज कर रही है। भविष्य में कॉलेजियम की नियुक्तियों और प्रशासनिक फेरबदल पर इसके क्या दूरगामी प्रभाव होंगे, यह आने वाले हफ्तों में तय करेगा कि संस्था किस प्रकार अपनी आंतरिक स्वायत्तता की रक्षा करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि न्यायपालिका के आंतरिक मामलों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन साधना एक बड़ी चुनौती है। जब प्रशासनिक विवादों की खबरें बाहर आती हैं, तो कॉलेजियम की नियुक्तियों और सुधारात्मक कदमों पर पड़ने वाला असर संस्था की कार्यकुशलता को सीधे प्रभावित करता है। यह प्रकरण इस बात की पुष्टि करता है कि बाहरी दबावों के बिना, स्थापित वैधानिक नियमों और निष्पक्ष जांच के जरिए ही न्याय व्यवस्था अपनी गरिमा और संस्थागत स्वायत्तता की रक्षा कर सकती है।

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