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पश्चिम चम्पारण के वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में मिला खतरनाक लियाना बेल, पेड़ों के लिए बनता है कालजीवनशैली
21 अक्तू॰ 2026, 1:42 am (15 मिनट पहले)· 1

पश्चिम चम्पारण के वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में मिला खतरनाक लियाना बेल, पेड़ों के लिए बनता है काल

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के जंगलों में पाया जाने वाला लियाना या पायथन बेल पेड़ों के लिए एक बड़ा खतरा है। यह बेल विशालकाय पेड़ों को चारों तरफ से जकड़कर उन्हें अंदर से खोखला कर देता है।

आज हम आपको प्रकृति के एक ऐसे अनोखे और खतरनाक पहलू से रूबरू करा रहे हैं, जो घने जंगलों के हरे-भरे पेड़ों के लिए किसी बड़े अभिशाप से कम नहीं है। पश्चिम चम्पारण के प्राकृतिक वनों में एक ऐसा खास बेल पाया जाता है, जिसके संपर्क में आते ही बड़े से बड़ा और स्वस्थ पेड़ भी कुछ ही दिनों में सूखकर अंदर से पूरी तरह खोखला हो जाता है। स्थानीय स्तर पर लोग इसे जंगल का श्राप या दैत्य तक कहकर पुकारते हैं, क्योंकि इसकी कार्यशैली किसी जीवित शरीर से उसकी जान निकाल लेने जैसी प्रतीत होती है। विशेषज्ञ इस खतरनाक वनस्पति को लियाना या पायथन बेल के नाम से संबोधित करते हैं।

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में प्रचुर मात्रा में मौजूद है यह घातक बेल

पश्चिम चम्पारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के सघन वनों में लियाना की भारी भरकम मौजूदगी देखने को मिलती है। धरती पर उगने वाली सामान्य लताओं और बेलों की तुलना में यह प्रजाति बेहद अनोखी होने के साथ-साथ अत्यंत आक्रामक और घातक होती है। यह अपने आसपास खड़े सभी पेड़-पौधों को अपनी मजबूत गिरफ्त में जकड़ लेती है और फिर धीरे-धीरे उनके भीतर के जीवन को सोखकर उन्हें खोखला बना देती है। नतीजा यह होता है कि विशालकाय और मजबूत पेड़ भी अंदर से मृत होकर सूख जाते हैं और अंततः मिट्टी में बिखर जाते हैं।

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अजगर की तरह शिकार को जकड़ लेता है यह पौधा

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के मंगुराहा रेंज में सेवाएं दे रहे नेचर गाइड सूरज के अनुसार, लियाना वनों के संतुलन के लिए एक गंभीर संकट पैदा करता है। इसका फैलाव इतना अधिक व्यापक होता है कि यह केवल अपने नजदीकी पौधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि करीब 50 मीटर की दूरी तक फैलकर वहां मौजूद अन्य वनस्पतियों को भी अपने जाल में फंसा लेता है। पेड़ों को लपेटने के बाद इनकी स्थिति ऐसी हो जाती है मानो किसी पर कोई नियंत्रण स्थापित हो गया हो। यह पेड़ों के तनों के चारों ओर एक मजबूत छल्ले की तरह घेरा बना लेता है और समय के साथ उस पेड़ के संपूर्ण अस्तित्व को ही समाप्त कर डालता है。

पायथन बेल नाम पड़ने के पीछे की रोचक वजह

इस प्रक्रिया को बेहद आसानी से इस प्रकार समझा जा सकता है जैसे कोई विशालकाय अजगर यानी पाइथन अपने किसी भी शिकार पर अपनी कुंडली मारकर उसे पूरी तरह जकड़ लेता है। इसके बाद वह जीव का दम घोंटने के बाद उसके प्राण छूटने का इंतजार करता है और उसके बाद उसे निगलने की प्रक्रिया शुरू करता है। लियाना की शिकार करने और पौधों को लपेटने की यही अनोखा तरीका इसे वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच पायथन बेल के नाम से लोकप्रिय बनाता है। इसकी बनावट और फंसाने का अंदाज बिल्कुल किसी सांप की कुंडलियों जैसा ही नजर आता है।

विस्तृत क्षेत्र में फैला है इसका साम्राज्य

लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व के विस्तृत और घने जंगलों में लियाना बहुतायत में नजर आते हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय बेतिया से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बैरिया प्रखंड के अंतर्गत आने वाली उदयपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में भी इनकी संख्या काफी अधिक है। चूंकि ये दोनों ही जंगल पूरी तरह प्राकृतिक और सघन हैं, इसलिए वन अधिकारियों द्वारा वन्यजीव व्यवस्था में अत्यधिक इंसानी दखलंदाजी न करते हुए प्रकृति को अपने नियमों के अनुसार कार्य करने दिया जाता है।

वनों के संरक्षण के लिए नियंत्रण बेहद जरूरी

वन विशेषज्ञों का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि यदि समय रहते इस आक्रामक बेल के प्रसार पर उचित लगाम नहीं कसी गई, तो यह जंगल में मौजूद अन्य सभी पेड़-पौधों को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में लेकर उन्हें अंदर से खोखला कर देगा। यही एक मुख्य वजह है कि जंगल की सेहत और हरियाली को बचाए रखने के लिए समय-समय पर इस बेल की सुनियोजित कटाई करना बेहद अनिवार्य हो जाता है, ताकि बहुमूल्य वृक्षों को बचाया जा सके।

सवाल-जवाब

लियाना बेल को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
लियाना बेल को इसके शिकार करने और जकड़ने के तरीके के कारण 'पायथन बेल' भी कहा जाता है।
यह बेल पेड़ों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
यह पेड़ों के चारों तरफ छल्ले की तरह घेरा बनाकर उन्हें जकड़ लेती है और धीरे-धीरे अंदर से खोखला कर देती है।
यह बेल मुख्य रूप से कहाँ पाई जाती है?
यह बेल वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व और उदयपुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के घने जंगलों में बहुतायत से पाई जाती है।
इस बेल का फैलाव कितनी दूरी तक हो सकता है?
यह बेल अपने मूल स्थान से करीब 50 मीटर दूर तक फैलकर आसपास के पौधों को अपनी गिरफ्त में ले सकती है।
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