सर्दियों का मौसम दस्तक दे चुका है और इस दौरान घर पर हरी सब्जियां उगाना काफी आसान हो जाता है। यदि आपके घर में बालकनी, छत या किसी खिड़की के पास धूप आने की जगह है, तो आप वहां आसानी से अपना छोटा किचन गार्डन बना सकते हैं और पालक, मेथी जैसी पौष्टिक चीजें पा सकते हैं।
इस प्रक्रिया की सबसे अच्छी बात यह है कि इन तीनों सब्जियों के लिए अलग-अलग गमले खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। एक ही आयताकार ग्रो बैग में पालक, मेथी और धनिया को एक साथ आसानी से बोया जा सकता है। अक्टूबर से फरवरी तक का समय इनकी बुवाई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है क्योंकि ठंड के दिनों में ये पौधे बहुत तेजी से विकसित होते हैं और बेहतरीन पैदावार देते हैं। यदि आप बागवानी में नए हैं, तो कुछ सरल बातों का ध्यान रखकर घर पर ही ताजी पत्तियां प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि इन पौधों को लगाने की सही विधि क्या है।
सही ग्रो बैग और धूप वाली जगह का चयन
बुवाई की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले 8 से 12 इंच गहरे और कम से कम 2 फीट लंबे आयताकार ग्रो बैग की जरूरत होती है। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बैग की तली में अतिरिक्त पानी निकलने के लिए उचित निकासी छिद्र बने हों। इसे घर में ऐसी जगह पर स्थापित करें जहां हर रोज कम से कम 4 से 6 घंटे की धूप आसानी से मिल सके। गर्म दिनों में सुबह की धूप और दोपहर के समय हल्की छांव वाला स्थान पौधों की सेहत के लिए सबसे उत्तम रहता है।
उपजाऊ मिट्टी का मिश्रण तैयार करना
पालक, मेथी और धनिया के बेहतर विकास के लिए भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी होना आवश्यक है। इसके लिए साधारण मिट्टी, कोकोपीट और अच्छी तरह से डीकंपोज हुई खाद या वर्मीकम्पोस्ट को बराबर अनुपात में मिलाना चाहिए। ग्रो बैग में मिट्टी भरते समय ऊपर की तरफ लगभग एक इंच की जगह खाली छोड़नी चाहिए। बीज डालने से पहले मिट्टी को पानी से हल्का गीला कर लें ताकि नमी बनी रहे।
पंक्तियों में बीजों की अलग-अलग बुवाई
तैयार किए गए ग्रो बैग की मिट्टी की सतह पर तीन अलग-अलग कतारें बनानी होंगी। पहली कतार में पालक के बीजों को करीब आधा इंच की गहराई पर और दो इंच की दूरी पर रखना चाहिए। दूसरी कतार में मेथी के बीजों को छिड़ककर उनके ऊपर मिट्टी की हल्की परत बिछा देनी चाहिए। तीसरी कतार में धनिया के बीजों की बुवाई की जाती है, जिन्हें बोने से पहले थोड़ा सा दबाकर दो भागों में विभाजित किया जा सकता है ताकि अंकुरण प्रक्रिया तेज हो सके। अंत में पानी की हल्की फुहार मारनी चाहिए।
पौधों की देखभाल और सिंचाई के नियम
मिट्टी के अंदर नमी बरकरार रखनी जरूरी है लेकिन अत्यधिक पानी डालने से बचना चाहिए। सुबह के वक्त हल्के हाथों से सिंचाई करना पौधों के लिए फायदेमंद होता है। आमतौर पर सात दिन के भीतर बीज अंकुरित होना शुरू हो जाते हैं। यदि पौधे अत्यधिक घने उग आएं तो कुछ पौधों को वहां से हटा देना चाहिए। दो से तीन सप्ताह बीत जाने के बाद थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट या हल्की तरल जैविक खाद दी जानी चाहिए। यदि किसी प्रकार के कीट नजर आएं तो नीम के तेल का सही घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है।
फसल तैयार होने का समय और कटाई का तरीका
मेथी की पत्तियां लगभग 3 सप्ताह के भीतर ही कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं, जबकि पालक और धनिया को पूरी तरह विकसित होने में 4 से 5 सप्ताह का वक्त लगता है। पौधों की केवल बाहरी पत्तियों को ही कैंची की मदद से काटना चाहिए और बीच के हिस्से को सुरक्षित रखना चाहिए ताकि नई पत्तियां लगातार फूटती रहें। मेथी के पौधों को भी जमीन से थोड़ा ऊपर की तरफ से काटने पर उन्हें दोबारा बढ़ने का मौका मिल जाता है। इस प्रकार लगातार कटाई करने से ताजी सब्जियां मिलती रहती हैं। जब पौधे पीले पड़ने लगें या उनमें फूल खिलने लगें, तो समझ लीजिए कि नए सिरे से बीज बोने का समय आ चुका है।



















