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पुराने घरों के आंगन में क्यों लगाया जाता था तुलसी का पौधा? जानिए इसके पीछे का विज्ञान और परंपराजीवनशैली
25 अग॰ 2026, 12:23 pm (1 घंटे पहले)· 3

पुराने घरों के आंगन में क्यों लगाया जाता था तुलसी का पौधा? जानिए इसके पीछे का विज्ञान और परंपरा

पुराने घरों के आंगन में तुलसी का पौधा सिर्फ धार्मिक आस्था के कारण नहीं, बल्कि साफ-सफाई, प्राकृतिक वेंटिलेशन और स्वास्थ्य से जुड़े व्यावहारिक फायदों के कारण रखा जाता था।

पारंपरिक भारतीय घरों की पुरानी तस्वीरों को याद करें तो अक्सर बीच में एक खुला हुआ आंगन और उसके ठीक केंद्र में बना एक छोटा-सा तुलसी चौरा नजर आ जाता है। उस दौर में दिन की शुरुआत उसी पवित्र स्थान से होती थी। कोई पौधे में जल अर्पित करता, कोई संध्या के समय दीपक जलाता और घर के छोटे बच्चे उसी के आसपास खेलते रहते थे। पहली नजर में यह पूरी तरह से एक धार्मिक अनुष्ठान या आस्था से जुड़ी परंपरा लगती है, लेकिन इसके पीछे घर की वास्तुकला, साफ-सफाई और प्राकृतिक माहौल से जुड़े कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलू भी छिपे हुए थे। उस समय के दौर में आज की तरह आधुनिक एयर प्यूरिफायर, मच्छर भगाने के रासायनिक साधन या घर के हर कोने तक कृत्रिम रोशनी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हुआ करती थी।

वास्तुकला और वेंटिलेशन का पुराना मेल

उस समय के भारतीय घरों की बनावट आज के आधुनिक फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स से काफी अलग हुआ करती थी। मकान के बिल्कुल बीचों-बीच एक खुला आंगन होता था, जहां सूरज की धूप और ताजी हवा आसानी से पहुंच जाती थी। तुलसी के पौधे को ऐसे खुले और प्रमुख स्थान पर रखने से पौधे को भरपूर प्राकृतिक रोशनी मिलती थी और परिवार के सदस्यों के लिए उसकी देखभाल करना भी बेहद आसान हो जाता था। सुबह उठकर तुलसी को जल देना और उसके आसपास के हिस्से की साफ-सफाई करना रोजमर्रा की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा हुआ करता था। इस छोटी-सी आदत का एक बड़ा फायदा यह भी था कि घर का मुख्य आंगन हमेशा साफ-सुथरा रहता था, जिससे धार्मिक परंपरा के साथ-साथ स्वच्छता का अनुशासन भी अपने आप जुड़ जाता था।

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प्राकृतिक माहौल और खुशबू का असर

तुलसी एक बेहद सुगंधित पौधा है और इसकी पत्तियों के भीतर पाए जाने वाले प्राकृतिक तेलों की अपनी एक विशिष्ट महक होती है। इस पौधे के करीब रहने से आसपास के वातावरण में एक अलग प्रकार की ताजगी और शीतलता का अहसास होता है। हालांकि, तुलसी को लेकर समाज में कई तरह के लोकप्रिय दावे किए जाते हैं, जैसे कि यह घर के हर तरह के प्रदूषण को पूरी तरह खत्म कर देती है या बहुत भारी मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ती है, जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। इसके बावजूद, घर के अंदर ऐसा हरा-भरा पौधा होना परिवेश को जीवंत बनाने और प्रकृति के साथ इंसान का जुड़ाव मजबूत करने में जरूर मदद करता है। पुराने समय में जब मकानों की बनावट प्राकृतिक वेंटिलेशन को बढ़ावा देती थी, तब आंगन के ये पौधे उस समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हुआ करते थे।

कीट-पतंगों से बचाव और घरेलू उपयोग

तुलसी की तेज और तीखी सुगंध के साथ-साथ इसमें मौजूद कुछ खास प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसे पारंपरिक रूप से कीट-पतंगों को दूर रखने वाले पौधों की श्रेणी में रखा जाता रहा है। पुराने जमाने में आज की तरह मक्खी और मच्छर भगाने के लिए बाजार में मिलने वाले आधुनिक उत्पाद उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में तुलसी समेत तमाम खुशबूदार पौधों को अपने आवास के आसपास लगाना एक सामान्य प्रथा थी। हालांकि, केवल तुलसी के पौधे को मच्छरों से पूरी तरह सुरक्षा का एकमात्र साधन मान लेना सही नहीं होगा। बरसात के मौसम में यह बेहद जरूरी होता है कि घर के आसपास कहीं भी गंदा पानी जमा न होने दिया जाए और पूरी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखा जाए। इसके अलावा, भारतीय घरों में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल चाय या काढ़े में सदियों से होता आ रहा है। मौसम बदलने पर लोग गले की खराश और सर्दी-जुकाम जैसी आम परेशानियों से निपटने के लिए इसका घरेलू नुस्खे के तौर पर उपयोग करते हैं। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि तुलसी हर मर्ज की दवा है, और किसी भी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना हमेशा आवश्यक होता है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में इसकी उपयोगिता ने इसे भारतीय जीवनशैली का अटूट हिस्सा बना दिया।

आस्था और सामाजिक जीवन का केंद्र

तुलसी चौरा केवल एक पौधा रोपने की जगह भर नहीं था, बल्कि यह परिवार की सामाजिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र भी था। परिवार के सभी लोग उसके इर्द-गिर्द बैठकर कुछ समय साझा करते थे। महिलाएं सुबह के वक्त आंगन की धुलाई करतीं, पानी का छिड़काव करतीं और फिर विधिवत तुलसी की पूजा-अर्चना संपन्न करती थीं। हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र दर्जा प्राप्त है और भगवान विष्णु की आराधना में तुलसी दल का होना अनिवार्य माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण इसे घर में रखना बेहद शुभ समझा गया और इसकी नियमित पूजा की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती चली गई। आज के समय में शहर के घर छोटे हो चुके हैं और खुले आंगनों की जगह छोटी बालकनी या छत ने ले ली है, फिर भी तुलसी का पौधा आज भी अधिकांश घरों में अपनी जगह बनाए हुए हैं। बस फर्क इतना आया है कि अब इसके साथ धार्मिक आस्था के साथ-साथ आधुनिक जीवनशैली में हरियाली बनाए रखने की सोच भी जुड़ गई है।

सवाल-जवाब

पुराने घरों के आंगन के बीच में तुलसी का पौधा क्यों लगाया जाता था?
तुलसी का पौधा धार्मिक आस्था के साथ-साथ साफ-सफाई, प्राकृतिक वेंटिलेशन और घर के वातावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए आंगन के बीच लगाया जाता था।
क्या तुलसी मच्छरों और कीट-पतंगों को पूरी तरह दूर भगा सकती है?
तुलसी की तेज खुशबू कीटों को दूर रखने में मदद करती है, लेकिन इसे मच्छरों से पूरी सुरक्षा का एकमात्र साधन नहीं माना जा सकता।
पुराने समय में तुलसी की रोज देखभाल का क्या फायदा था?
रोजाना तुलसी को पानी देने और उसके आसपास सफाई करने से घर का आंगन हमेशा साफ रहता था और स्वच्छता की आदत बनती थी।
आज के छोटे घरों में लोग तुलसी कैसे रखते हैं?
आज के समय में आंगनों की जगह बालकनी या छत ने ले ली है, जहां लोग गमलों में तुलसी का पौधा लगाकर धार्मिक और आधुनिक सोच को जोड़ते हैं।
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