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लाइव: मुंबई में जुहू हवाई अड्डे पर 24 घंटों में 205 मिमी बारिश; BMC ने और तेज़ वर्षा का अलर्ट जारी किया — 2 जुलाई 2026लाइव
2 जुल॰ 2026, 11:37 am (45 दिन पहले)· 2

लाइव: मुंबई में जुहू हवाई अड्डे पर 24 घंटों में 205 मिमी बारिश; BMC ने और तेज़ वर्षा का अलर्ट जारी किया — 2 जुलाई 2026

मुंबई के चांदीवली इलाके की खैरानी रोड पर भारी बारिश के दौरान एक व्यक्ति खुले मैनहोल में समाकर जान गंवा बैठा — जलभराव के कारण BMC कार्यस्थल पर यह मैनहोल नजर नहीं आ रहा था। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने इसे गैर इरादतन हत्या करार दिया और सरकार से सदन में विस्तृत जवाब मांगा। इसी बीच उत्तराखंड में चारधाम मार्गों पर यातायात ठप है और गुजरात में 1,036 SDRF जवान संवेदनशील स्थलों पर तैनात किए जा चुके हैं।

मुंबई पर मानसून एक बार फिर आफत बनकर बरसा है। शहर के जुहू इलाके में बीते 24 घंटों में 205 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो पूरे मुंबई में सबसे ज्यादा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने आज रात और शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की सुबह तक और भी भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, साथ ही 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रुक-रुककर तेज हवाएं चलने का भी अंदेशा जताया है। इसी बीच दिल्ली में पांच साल बाद जुलाई महीने में मानसून ने दस्तक दी है, तो हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक और उत्तराखंड में भी बारिश ने जिंदगियां प्रभावित की हैं।

मुंबई में मानसून का कहर, जुहू सबसे ज्यादा भीगा

BMC के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई की सुबह 8 बजे से 2 जुलाई की सुबह 8 बजे के बीच के 24 घंटों में शहर में औसतन 172 मिमी, पूर्वी उपनगरों में 189 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 165 मिमी बारिश दर्ज हुई। लेकिन असली तस्वीर तब सामने आई जब 1 जुलाई सुबह 8:30 बजे से 2 जुलाई सुबह 8:30 बजे के बीच के आंकड़े देखे गए। इस दौरान मुंबई के कई इलाकों में 150 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई, जो बताता है कि मानसून ने इस बार शहर को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। जुहू हवाई अड्डा 205 मिलीमीटर के साथ सबसे ज्यादा भीगा इलाका रहा, उसके बाद सांताक्रूज़ में 204.6 मिलीमीटर और विक्रोली में 192.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा सायन, भायखला, चेंबूर, विद्याविहार, बांद्रा, राम मंदिर और कुलाबा जैसे इलाकों में भी भारी बारिश हुई, जिससे साफ हो गया कि यह बारिश किसी एक कोने तक सीमित नहीं थी बल्कि पूरे शहर में एक जैसी तीव्रता से बरसी।

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बारिश मापने वाले अलग-अलग केंद्रों के आंकड़े इस तीव्रता को और स्पष्ट करते हैं। सांताक्रूज़ के SWM वर्कशॉप और भांडुप के एस वार्ड कार्यालय में सबसे ज्यादा 238.8 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके बाद पवई के पसपोली म्यूनिसिपल स्कूल में 234.6 मिमी, विक्रोली के टैगोर नगर म्यूनिसिपल स्कूल में 233.2 मिमी, मुलुंड के मीठागर म्यूनिसिपल स्कूल में 226 मिमी, अंधेरी फायर स्टेशन में 225.4 मिमी, परेल के एफ साउथ वार्ड कार्यालय में 222 मिमी और प्रभादेवी के जी साउथ वार्ड कार्यालय में 220.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इतने सारे केंद्रों पर 200 मिमी के आसपास या उससे ज्यादा बारिश का मतलब है कि मुंबई का लगभग हर हिस्सा इस बार भीगा है, चाहे वह द्वीप शहर हो, पूर्वी उपनगर हों या पश्चिमी उपनगर।

समुद्र के ज्वार-भाटे को लेकर भी BMC ने जानकारी दी है। गुरुवार दोपहर 1:45 बजे 4.27 मीटर का ज्वार (हाई टाइड) आने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि अगला 3.71 मीटर का ज्वार शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की रात 1:31 बजे आएगा। इसके उलट भाटा (लो टाइड) गुरुवार शाम 7:49 बजे 1.82 मीटर का रहा, जबकि अगला भाटा शुक्रवार सुबह 7:11 बजे आने का अनुमान है। भारी बारिश के साथ ऊंचे ज्वार का यह मेल अक्सर मुंबई के निचले इलाकों में जलभराव को और बढ़ा देता है, इसलिए प्रशासन इन दोनों कारकों पर बराबर नजर रख रहा है।

सड़कों पर पानी भरा, लोकल ट्रेनें भी लेट हुईं

गुरुवार, 2 जुलाई 2026 की सुबह से ही मुंबई में भारी बारिश शुरू हो गई, जिसने निचले इलाकों को पानी में डुबो दिया। इस मूसलाधार बारिश के चलते सड़क और रेल दोनों तरह के यातायात की रफ्तार थम गई। दादर, परेल, हिंदमाता, चारकोप, वरली, गोरेगांव और अंधेरी जैसे प्रमुख इलाकों में पानी भर गया, जिससे यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी और वाहन रेंगते नजर आए। राहत की उम्मीद भी कम ही है, क्योंकि मौसम विभाग ने दिनभर बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है।

पटरियों पर सीधे पानी भले न भरा हो, लेकिन आसपास के इलाकों में जलजमाव का असर लोकल ट्रेनों की रफ्तार पर जरूर पड़ा। यात्रियों का कहना था कि कई लोकल ट्रेनें 10 से 15 मिनट की देरी से चल रही थीं, जिसकी वजह से सुबह के व्यस्त समय में स्टेशनों पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। सेंट्रल रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 180 मिमी से ज्यादा बारिश होने के बावजूद उनके नेटवर्क पर कोई बड़ा जलजमाव नहीं हुआ और चारों कॉरिडोर पर लोकल सेवाएं सामान्य ढंग से चलती रहीं, हालांकि यात्रियों ने देरी की शिकायतें कीं। वेस्टर्न रेलवे ने भी सोशल मीडिया मंच X पर जानकारी दी कि उसके नेटवर्क पर उपनगरीय सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं, लेकिन यहां भी यात्रियों का दावा था कि कुछ ट्रेनें तय समय से देरी से चल रही थीं। यानी आधिकारिक बयानों और यात्रियों के अनुभव में साफ फासला दिख रहा था।

मैनहोल हादसे ने ली जान, विधानसभा में उठा मामला

मुंबई की मूसलाधार बारिश के बीच एक बेहद दुखद हादसा भी सामने आया। एक व्यक्ति खुले मैनहोल में बह जाने से अपनी जान गंवा बैठा। यह घटना पूर्वी उपनगर के चांदीवली इलाके में हुई, जहां भारी जलभराव के चलते सड़क पर खुला मैनहोल नजर ही नहीं आ रहा था। एक अधिकारी ने गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को बताया कि दमकल विभाग और नगर निगम की आपदा प्रबंधन टीमों ने मिलकर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद उसी दिन व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया। बीजेपी विधायक अमीत सातम ने बताया कि यह हादसा उसी इलाके की खैरानी रोड पर हुआ, जहां उस वक्त बृहन्मुंबई महानगरपालिका खुद नाली का काम करवा रही थी।

इस मौत ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर तीखी बहस छेड़ दी। उपमहापौर संजय घाडी ने कहा कि नगर निगम इस मामले में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएगा और इसे गैर-इरादतन हत्या माना जाएगा। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने भी गुरुवार को इसी दिन इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह हादसा गैर इरादतन हत्या के समान है। जब विधायक अमीत सातम ने सदन में यह मुद्दा उठाया और जिम्मेदार लोगों पर तत्काल आपराधिक कार्रवाई की मांग की, तो अध्यक्ष ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि उसी दिन की कार्यवाही खत्म होने से पहले इस हादसे का पूरा ब्योरा सदन के सामने पेश किया जाए।

ठाणे में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से मौत, अब हर पेड़ की जांच होगी

मुंबई में भारी बारिश के दौरान एक स्कूल बस पर पेड़ गिर गया, जिसमें एक छात्र की जान चली गई। इस दुखद घटना के बाद ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने पूरे शहर में खतरनाक पेड़ों का सुरक्षा सर्वे कराने का आदेश दे दिया है। मेयर ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को ठाणे नगर निगम के वृक्ष प्राधिकरण विभाग की एक आपातकालीन बैठक बुलाई और अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि स्कूलों, कॉलेजों, हाउसिंग सोसायटियों, अस्पतालों और प्रमुख चौराहों पर लगे पेड़ों की तुरंत जांच की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन पेड़ों को पहले ही खतरनाक मानकर चिह्नित किया जा चुका है, उनकी स्थिरता की दोबारा जांच भी की जाए।

किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए मेयर ने विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए कहा, खतरनाक, सूखे या झुके हुए पेड़ों और बड़ी शाखाओं की पहचान जल्द से जल्द की जाए और जरूरी कदम तुरंत उठाए जाएं। उन्होंने यह निर्देश भी दिया कि पेड़ों की छंटाई के बाद सड़क किनारे छोड़ दी गई शाखाओं को तुरंत हटाया जाए ताकि मानसून के दौरान यातायात बाधित न हो। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की गई है कि उन्हें अगर कहीं कोई खतरनाक पेड़ नजर आए, तो इसकी सूचना तुरंत ठाणे नगर निगम को दें।

मंत्री संजय शिरसाट के बयान पर बवाल, अगले दिन दी सफाई

महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए। मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से हुई छात्र की मौत के बाद उन्होंने कहा था कि पेड़ और बिजली का गिरना इंसान के काबू में नहीं होता, और इस टिप्पणी की चौतरफा आलोचना हुई। अपने इस विवादित बयान पर निशाना साधे जाने के एक दिन बाद, बुधवार 1 जुलाई 2026 को शिव सेना के इस मंत्री ने नुकसान पर काबू पाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, और यह भी कहा कि नागरिक निकाय को ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही पेड़ों की उचित छंटाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी। इस पूरे प्रकरण ने पेड़ों की देखभाल और शहरी सुरक्षा को लेकर सरकारी जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है।

दिल्ली में आखिरकार मानसून की दस्तक, 2021 के बाद पहली बार जुलाई में एंट्री

जहां मुंबई बारिश से जूझ रही है, वहीं राष्ट्रीय राजधानी में मानसून का लंबा इंतजार खत्म हुआ है। दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को दिल्ली पहुंचा, जो इसकी सामान्य आगमन तारीख 27 जून से पांच दिन की देरी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 2021 के बाद यह पहला मौका है जब मानसून जुलाई महीने में दिल्ली पहुंचा है। साल 2021 में मानसून 13 जुलाई को आया था। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े देखें तो दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 में 29 जून, 2024 में 28 जून, 2023 में 25 जून और 2022 में 30 जून को दिल्ली पहुंचा था। यानी इस साल की पांच दिन की देरी भले बहुत बड़ी न लगे, लेकिन जुलाई में मानसून का आना पिछले चार साल के मुकाबले साफ अपवाद है।

मानसून पहुंचने से पहले ही गुरुवार सुबह दिल्ली के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो चुकी थी, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को उमस भरे मौसम से राहत मिली। IMD के अनुसार, दिल्ली में दिनभर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना है, और मौसम विभाग ने शुक्रवार, शनिवार और रविवार यानी 3 से 5 जुलाई 2026 को भी गरज के साथ बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत से 5.1 डिग्री कम है, जबकि अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद जताई गई है। सुबह के वक्त हल्की हवाओं के साथ रुक-रुक कर हुई इस बारिश ने दिल्ली के कई इलाकों में दस्तक दी, जिससे कई दिनों की गर्मी और उमस के बाद निवासियों को राहत मिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 100 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। IMD ने यह भी बताया कि मानसून अब आगे बढ़ते हुए अगले तीन दिनों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश को भी कवर कर लेगा।

हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप, चार की मौत और सड़कों पर मलबा

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बारिश जानलेवा साबित हुई है। यहां बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो चुकी है। शिमला, मनाली और धर्मशाला सहित राज्य के कई हिस्सों में भारी मानसूनी बारिश ने भूस्खलन कराए, नदियां उफान पर आ गईं, कई सड़कें बाधित हुईं और बिजली आपूर्ति बड़े पैमाने पर ठप पड़ गई। शिमला मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून मंगलवार, 30 जून 2026 को हिमाचल में दाखिल हुआ और बुधवार, 1 जुलाई 2026 तक पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले चुका था। विभाग ने 2 से 6 जुलाई के बीच, 4 जुलाई को छोड़कर, राज्य के कुछ हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

इन मौतों की कहानियां भी बेहद दुखद हैं। सोलन जिले की एक महिला की जान तब चली गई जब वह ऑट के पास चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपनी गाड़ी से बाहर निकल रही थीं, और एक भारी पत्थर उन पर आ गिरा। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, कांगड़ा जिले में मानसून के पहले ही दिन तीन मौतें दर्ज हुईं, जिनमें एक करंट लगने से और एक ऊंचाई से गिरने के कारण हुई। चंबा जिले के लनोट और फागडोग गांवों में लगातार बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जहां पहाड़ी से खिसका मलबा दो मकानों में घुस गया, जिससे दीवारों में दरारें आईं और भारी नुकसान हुआ।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने शुरुआत में बताया था कि राज्य में कुल 35 सड़कें वाहनों के लिए बंद की गई हैं, जिनमें कुल्लू में 18, मंडी में 11 और लाहौल-स्पीति, सिरमौर व ऊना जिलों में दो-दो सड़कें शामिल थीं, और साथ ही पूरे राज्य में 127 बिजली ट्रांसफॉर्मर बाधित हो गए थे। लेकिन हालात और बिगड़े और गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को अधिकारियों ने बताया कि बंद सड़कों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जिनमें कुल्लू में 18, मंडी में 15, सिरमौर में नौ और लाहौल-स्पीति तथा ऊना जिलों में दो-दो सड़कें शामिल हैं। SEOC के मुताबिक भारी बारिश के कारण अब कुल 181 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप हो चुके हैं और छह जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।

बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार शाम से पोंटा साहिब में सबसे अधिक 100.4 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके बाद कसौली में 86 मिमी, धर्मपुर में 83.4 मिमी, जट्टन बैराज में 77 मिमी, धौलाकुआं में 69 मिमी, पच्छाद में 60 मिमी, रामपुर में 53 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी, पालमपुर में 37.8 मिमी और धर्मशाला में 34.1 मिमी बारिश हुई। कांगड़ा, जुब्बरहट्टी और भुंतर में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं देखी गईं।

इस बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी हिमाचल में वर्षा ऋतु के दौरान राजमार्गों पर सुरक्षित, सुगम और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। गुरुवार को जारी एक बयान में NHAI ने बताया कि भूस्खलन, चट्टानें खिसकने, मलबे के जमाव, बाढ़ और मानसून से जुड़ी अन्य आपदाओं के प्रति संवेदनशील स्थानों की पहचान कर ली गई है और प्राथमिकता के आधार पर वहां बचाव कार्य शुरू भी कर दिए गए हैं। प्राधिकरण ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के तहत आने वाले संवेदनशील और भूस्खलन-प्रवण हिस्सों का विस्तृत सर्वेक्षण भी पूरा कर लिया है, और इन्हीं आकलनों के आधार पर चिह्नित जगहों पर सुधार का काम शुरू किया गया है। राजमार्गों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पहाड़ी सुरक्षा कार्य, ढलान का स्थिरीकरण, सुरक्षा दीवारों का निर्माण, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और कटाव-रोधी उपाय जैसे कई तकनीकी काम किए जा रहे हैं।

कर्नाटक: मंगलुरु में भूस्खलन से एक परिवार के तीन लोगों की मौत, स्कूलों में छुट्टी

कर्नाटक के मंगलुरु में भी बारिश ने एक परिवार को उजाड़ दिया। यहां के नागोरी इलाके में रातभर हुई भारी बारिश के बाद आए भूस्खलन ने एक मकान को मलबे में तब्दील कर दिया। इस हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई, जिनमें दो बच्चियां भी शामिल थीं, जबकि तीन अन्य लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मकान के ऊपर मौजूद पहाड़ी से मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा लगातार बारिश के चलते खिसककर मकान पर आ गिरा, जिससे पूरी संरचना ढह गई।

इसी बीच दक्षिण कन्नड़ जिले में अत्यधिक भारी बारिश के रेड अलर्ट को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर एच.वी. दर्शन ने गुरुवार, 2 जुलाई को जिले के सभी स्कूलों, PU कॉलेजों और आंगनवाड़ियों में छुट्टी की घोषणा कर दी। उन्होंने लोगों से समुद्र तटों और नदियों के किनारों से दूर रहने की अपील की और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी। साथ ही जिला और तालुक स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने मुख्यालय छोड़कर कहीं न जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।

केरल में इडुक्की बांध का जलस्तर घटकर सिर्फ 23%, किसानों की चिंता बढ़ी

केरल से भी मानसून को लेकर चिंताजनक खबर आई है, लेकिन यहां समस्या ज्यादा बारिश की नहीं बल्कि कम बारिश की है। जल वर्ष का पहला महीना बीतते ही राज्य की प्रमुख बिजली परियोजनाओं में शुमार इडुक्की पनबिजली परियोजना के जलाशय में पानी का स्तर घटकर महज 23% रह गया है। जल वर्ष 1 जून से 30 नवंबर तक चलता है, और पिछले साल की तुलना में इस बांध में फिलहाल 43 फीट से भी ज्यादा पानी की कमी है। केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के बांध सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई को जलस्तर 2,321.24 फीट था, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 2,364.18 फीट यानी 58% था। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 30 दिनों की मानसूनी बारिश के बावजूद इस बांध के जलस्तर में सिर्फ 4.14 फीट की बढ़ोतरी हुई, जो इस पूरे महीने में महज 3.54% की मामूली वृद्धि है। कमजोर मानसूनी बारिश के चलते इडुक्की जलाशय का जलस्तर 23% तक गिरने से केरल में आने वाले समय में बिजली संकट का खतरा पैदा हो गया है।

यह चिंता सिर्फ बांध तक सीमित नहीं है। केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत भले सौम्य रही हो, राज्यभर में हल्की फुहारें पड़ीं और कोई चरम मौसमी घटना दर्ज नहीं हुई, लेकिन बरसाती मौसम का यह पहला महीना 34% की वर्षा कमी के साथ खत्म हुआ। अब IMD ने जुलाई महीने के लिए भी राज्य में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जिसने किसान समुदाय की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यह चिंता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि केरल की सालाना दक्षिण-पश्चिम मानसूनी वर्षा में जून और जुलाई की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 65% होती है। अगर ये दोनों महीने कमजोर रहे, तो अगस्त या सितंबर में मानसून की जोरदार वापसी के बिना राज्य में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है। कृषि और जल संसाधन क्षेत्र में इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है, और किसान समुदाय मानसून के इन निर्णायक महीनों में बारीकी से निगरानी रखने की मांग कर रहा है।

राजस्थान में सात दिन की देरी से पहुंचा मानसून, अगले हफ्ते भारी बारिश का अलर्ट

राजस्थान में भी मानसून का इंतजार खत्म हुआ है, हालांकि यहां भी देरी हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को राजस्थान के कुछ हिस्सों में दाखिल हुआ, जो अपनी निर्धारित तारीख से सात दिन बाद है। जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक मानसून राज्य के पूर्वी भागों में आगे बढ़ चुका है और इसकी उत्तरी सीमा फिलहाल टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है। IMD ने बताया कि इससे एक दिन पहले, बुधवार 1 जुलाई 2026 को मानसून गुजरात के अतिरिक्त क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के शेष भागों, पूरे दिल्ली क्षेत्र, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा और पंजाब के विस्तृत भूभाग तथा राजस्थान के कुछ इलाकों में भी फैल चुका था। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून के राजस्थान के और अधिक क्षेत्रों में फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।

विभाग ने आने वाले दिनों में पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में मूसलाधार बारिश का भी अनुमान जताया है। गुरुवार को उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और जयपुर संभागों के बिखरे इलाकों में मध्यम से भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है। IMD ने यह भी कहा कि कोटा संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में कुछ जगहों पर अत्यंत भारी वर्षा भी हो सकती है। अगले एक हफ्ते तक जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभागों में मानसून सक्रिय बने रहने का पूर्वानुमान है, और इस दौरान पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा मार्गों पर असर, कई जिलों में अलर्ट

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी मानसून ने यात्रियों और श्रद्धालुओं दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश के बीच देहरादून सहित कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की। लगातार बारिश और पहाड़ियों से गिरते पत्थरों व मलबे के कारण चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने रुद्रप्रयाग जिले के सोनप्रयाग-मुनकटिया मार्ग पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दी है।

देहरादून मौसम केंद्र ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है, जिसमें कुछ स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों के लिए कुछ इलाकों में भारी वर्षा की आशंका के मद्देनजर येलो अलर्ट जारी किया गया है। बीते 24 घंटों में दर्ज बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो नरेंद्रनगर में 110 मिमी, धनोल्टी में 100 मिमी, खटीमा में 85.5 मिमी, जॉली ग्रांट में 80.4 मिमी, देहरादून में 79.6 मिमी, मसूरी में 77.8 मिमी, लक्सर में 73.5 मिमी, बनबसा में 72 मिमी, पंतनगर में 70.6 मिमी, बड़कोट में 65 मिमी, रुद्रप्रयाग में 64.5 मिमी, जखोली में 63 मिमी और यमकेश्वर में 60 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा कई अन्य स्थानों पर भी मध्यम वर्षा रिकॉर्ड की गई।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में अलर्ट, गुजरात में SDRF की बड़ी तैनाती

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने रविवार, 5 जुलाई 2026 तक के लिए क्षेत्र में भारी बारिश, आंधी-तूफान, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताते हुए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने खासतौर पर नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और संवेदनशील इलाकों में जाने से बचने की अपील की है। किश्तवाड़ के उपायुक्त कार्यालय की एडवाइजरी के मुताबिक, क्षेत्र में मुख्य रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और आंधी आ सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाएं और कम समय के लिए मूसलाधार बौछारें पड़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने आगाह किया है कि मौजूदा मौसम संवेदनशील स्थानों पर अचानक बाढ़, भूस्खलन और मलबे के खिसकने की वजह बन सकता है, इसलिए जलाशयों, झरनों और नालों के करीब रहने वाले लोगों को मौसम में सुधार होने तक इन जगहों से दूर रहने और सभी जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने राजस्व, लोक निर्माण विभाग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बिजली, जल शक्ति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, NHIDCL और सीमा सड़क संगठन यानी BRO सहित सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।

वहीं गुजरात में पुलिस ने राज्यभर में आपदा प्रबंधन और मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की है। गुरुवार (जून 2, 2026) को हुई इस समीक्षा के तहत राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF की 11 कंपनियों के कुल 1,036 जवानों को संवेदनशील स्थलों पर तैनात किया गया है। यह समीक्षा बैठक बुधवार (जून 2, 2026) को पुलिस भवन में राज्य पुलिस महानिदेशक जी.एस. मलिक की अध्यक्षता में हुई, जिसमें विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षक और कई इकाइयों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आपदा की स्थिति में NDRF, SDRF, होम गार्ड, GRD, TRB और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाकर मिल-जुलकर काम करने पर जोर दिया गया। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि पूर्व नियोजन के तहत 28 जून से ही SDRF की 11 कंपनियों के 1,036 जवानों को संवेदनशील और पहले से तय स्थलों पर तैनात किया जा चुका है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।

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  1. गुजरात: पुलिस ने मानसून तैयारियों की समीक्षा की, संवेदनशील स्थलों पर SDRF की 11 कंपनियों के 1,036 जवान तैनात

    गुजरात पुलिस ने गुरुवार (जून 2, 2026) को राज्यभर में आपदा प्रबंधन और मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की और इस सिलसिले में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 11 कंपनियों के कुल 1,036 जवानों को तैनात किया गया, ऐसा अधिकारियों ने बताया। यह समीक्षा बैठक बुधवार (जून 2, 2026) को पुलिस भवन में राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) जी.एस. मलिक की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षक और अनेक इकाइयों के अधिकारी शामिल रहे। "आपदा की स्थिति में NDRF, SDRF, होम गार्ड, GRD, TRB और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मिल-जुलकर काम करने पर जोर दिया गया है। पूर्व नियोजन के तहत 28 जून से SDRF की 11 कंपनियों के 1,036 जवानों को संवेदनशील और निर्धारित स्थलों पर तैनात किया जा चुका है," एक आधिकारिक विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया।
  2. उत्तराखंड: भारी बारिश और मलबे से चारधाम मार्गों पर यातायात बाधित, कई जिलों में मौसम अलर्ट जारी

    गुरुवार (जुलाई 2, 2026) को मौसम विभाग ने उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश के बीच देहरादून सहित कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की। लगातार जारी वर्षा और पहाड़ियों से गिरते पत्थरों व मलबे के कारण चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हो गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने रुद्रप्रयाग जिले में सोनप्रयाग-मुनकटिया मार्ग पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दी है। देहरादून मौसम केंद्र ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों के लिए "ऑरेंज अलर्ट" घोषित किया है, जिसमें कुछ स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों के लिए कुछ इलाकों में भारी वर्षा की संभावना को लेकर "येलो अलर्ट" जारी किया गया है। बीते 24 घंटों में दर्ज की गई वर्षा का विवरण: नरेंद्रनगर 110 मिमी, धनोल्टी 100 मिमी, खटीमा 85.5 मिमी, जॉली ग्रांट 80.4 मिमी, देहरादून 79.6 मिमी, मसूरी 77.8 मिमी, लक्सर 73.5 मिमी, बनबसा 72 मिमी, पंतनगर 70.6 मिमी, बड़कोट 65 मिमी, रुद्रप्रयाग 64.5 मिमी, जखोली 63 मिमी और यमकेश्वर 60 मिमी। इसके अतिरिक्त कई अन्य स्थानों पर मध्यम वर्षा भी रिकॉर्ड की गई।
  3. मुंबई मैनहोल मौत: विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर बोले — यह गैर इरादतन हत्या, सरकार सदन में दे जवाब

    महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने गुरुवार (जुलाई 2, 2026) को मुंबई में एक खुले मैनहोल में गिरकर एक व्यक्ति की मौत को अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह घटना "गैर इरादतन हत्या" के समान है। एक विधायक द्वारा सदन में यह विषय उठाए जाने के बाद अध्यक्ष ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि उसी दिन की कार्यवाही समाप्त होने से पहले इस घटना का विस्तृत ब्योरा सदन के समक्ष रखा जाए। एक अधिकारी ने बताया, "गुरुवार दोपहर शहर में मूसलाधार बारिश के दौरान एक व्यक्ति खुले मैनहोल में बह गया, जिससे उसकी मौत हो गई।" यह दुखद हादसा मुंबई के पूर्वी उपनगरों के चांदीवली इलाके में हुआ, जहां जलभराव के कारण खुला मैनहोल दिखाई नहीं दे रहा था। BJP विधायक अमीत सातम ने विधानसभा में यह मामला उठाया और मांग की कि जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध तत्काल आपराधिक कार्रवाई की जाए। सातम ने सदन को बताया कि यह घटना उसी क्षेत्र की खैरानी रोड पर हुई, जहां उस समय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) नाली का काम कर रही थी।
  4. हिमाचल प्रदेश | NHAI ने संवेदनशील और दुर्घटना संभावित राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी बढ़ाई

    हिमाचल प्रदेश में वर्षा ऋतु के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित, सुगम और बिना किसी रुकावट के वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने व्यापक कदम उठाए हैं। गुरुवार (2 जुलाई, 2026) को जारी एक आधिकारिक बयान में NHAI ने बताया कि भूस्खलन, चट्टानें खिसकने, मलबे के जमाव, बाढ़ और मानसून से जुड़ी अन्य आपदाओं के प्रति संवेदनशील स्थानों की पहचान कर ली गई है और प्राथमिकता के आधार पर वहां बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। NHAI ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के अंतर्गत आने वाले संवेदनशील और भूस्खलन की आशंका वाले हिस्सों का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा किया है। बयान के अनुसार, इन आकलनों के आधार पर ही चिह्नित जगहों पर सुधारात्मक उपाय शुरू किए गए हैं। राजमार्ग के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और खराब मौसम के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए कई तरह के तकनीकी कार्य किए गए हैं। इनमें पहाड़ी सुरक्षा कार्य, ढलान का स्थिरीकरण, सुरक्षा दीवारों का निर्माण, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और कटाव-रोधी उपायों सहित कई अन्य सुरक्षा कार्य शामिल हैं।
  5. हिमाचल प्रदेश | मूसलाधार बारिश से 46 सड़कें बंद; विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

    हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश के कारण सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिसके चलते राज्यभर में 46 सड़कों को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद करना पड़ा है। अधिकारियों ने गुरुवार (2 जुलाई, 2026) को यह जानकारी दी। शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने 3 जुलाई को छोड़कर, 2 जुलाई से 5 जुलाई तक राज्य के चुनिंदा इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के मुताबिक, कुल्लू में 18, मंडी में 15, सिरमौर में नौ और लाहौल एवं स्पीति तथा ऊना जिलों में दो-दो सड़कें बंद पड़ी हैं। SEOC ने आगे बताया कि भारी बारिश के कारण कुल 181 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं और छह जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। बुधवार शाम (1 जुलाई, 2026) से पोंटा साहिब में सबसे अधिक 100.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद कसौली में 86 मिमी, धर्मपुर में 83.4 मिमी, जट्टन बैराज में 77 मिमी, धौलाकुआं में 69 मिमी, पच्छाद में 60 मिमी, रामपुर में 53 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी, पालमपुर में 37.8 मिमी और धर्मशाला में 34.1 मिमी बारिश हुई। कांगड़ा, जुब्बरहट्टी और भुंतर में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं देखी गईं।
  6. महाराष्ट्र | मुंबई में मूसलाधार बारिश के बीच खुले मैनहोल में गिरने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत

    मुंबई में भारी बारिश के बीच एक खुले मैनहोल में बह जाने के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई। एक अधिकारी ने गुरुवार (2 जुलाई, 2026) को इस घटना की जानकारी दी। यह घटना चांदीवली इलाके में हुई, जहां जलभराव के कारण सड़क पर खुला हुआ मैनहोल दिखाई नहीं दे रहा था। अधिकारी ने बताया कि दमकल विभाग और नगर निगम की आपदा प्रबंधन टीमों ने मिलकर खोजबीन अभियान चलाया, जिसके बाद गुरुवार को उस व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया। उपमहापौर संजय घाडी ने कहा कि नगर निगम इस मामले में ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएगा और उसे "गैर-इरादतन हत्या" का जिम्मेदार ठहराएगा।
  7. जम्मू-कश्मीर | किश्तवाड़ प्रशासन ने 5 जुलाई तक के लिए जारी किया मौसम का अलर्ट

    किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने रविवार (5 जुलाई, 2026) तक क्षेत्र में भारी बारिश, आंधी-तूफान, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताते हुए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों, विशेष रूप से नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से बचने का आग्रह किया है। किश्तवाड़ के उपायुक्त कार्यालय द्वारा जारी इस एडवाइजरी के अनुसार, क्षेत्र में मुख्य रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और आंधी आ सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाएं और कम समय के लिए मूसलाधार बौछारें पड़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने आगाह किया है कि मौजूदा मौसम की स्थिति संवेदनशील स्थानों पर अचानक बाढ़, भूस्खलन और मलबे के खिसकने का कारण बन सकती है। एडवाइजरी में कहा गया है कि लोग, विशेष रूप से जो जलाशयों, झरनों और नालों के करीब रहते हैं, वे मौसम में सुधार होने तक इन जगहों से दूर रहें और सभी जरूरी सावधानियां बरतें। जिला प्रशासन ने राजस्व, लोक निर्माण विभाग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बिजली, जल शक्ति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, NHIDCL और सीमा सड़क संगठन (BRO) सहित सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
  8. दिल्ली | IMD ने बारिश के साथ आंधी-तूफान का पूर्वानुमान जताया

    गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली में प्रवेश कर गया। यह अपनी सामान्य आगमन तिथि 27 जून से पाँच दिन की देरी से पहुँचा और इसके साथ राजधानी के कई हिस्सों में व्यापक वर्षा हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि 2021 के बाद यह पहला अवसर है जब मानसून जुलाई माह में दिल्ली तक पहुँचा है। दिल्ली में 2 जुलाई 2026 को मानसून के पहुँचने के साथ आंधी और बारिश का पूर्वानुमान है — पाँच साल बाद पहली बार राजधानी में मानसून जुलाई में दस्तक दे रहा है।
  9. राजस्थान | दक्षिण-पश्चिम मानसून सात दिन विलंब से पहुँचा: IMD

    भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को राजस्थान के कुछ हिस्सों में दाखिल हुआ — यह अपनी निर्धारित तिथि से सात दिन बाद है। जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मानसून राज्य के पूर्वी भागों में आगे बढ़ा है और इसकी उत्तरी सीमा अभी टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है। IMD ने बताया कि बुधवार, 1 जुलाई 2026 को मानसून गुजरात के अतिरिक्त क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के शेष भागों, पूरे दिल्ली क्षेत्र, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा और पंजाब के विस्तृत भूभाग तथा राजस्थान के कुछ इलाकों में भी फैल गया। मौसम विभाग ने कहा कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून के राजस्थान के और अधिक क्षेत्रों में प्रसार के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनी हुई हैं। विभाग ने आगामी दिनों में पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अनेक जिलों में मूसलाधार वर्षा का अनुमान जताया है। पूर्वी राजस्थान के कई जिलों के लिए भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। गुरुवार को उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और जयपुर संभागों के बिखरे स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान की आशंका है। IMD ने यह भी कहा कि कोटा संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। अगले एक सप्ताह तक जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभागों में मानसून सक्रिय बने रहने का पूर्वानुमान है और पूरे क्षेत्र में व्यापक वर्षा गतिविधि देखने को मिल सकती है। विभाग के अनुसार इस अवधि के दौरान पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश होने की भी संभावना है।
  10. मानसून का कहर: देशभर में बाढ़, भूस्खलन और बिजली ने बिगाड़ा जनजीवन

    देश के अनेक हिस्सों में मूसलाधार मानसूनी बारिश ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। बाढ़, भूस्खलन, आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं और व्यापक अव्यवस्था ने कई राज्यों में आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
  11. कर्नाटक: मंगलुरु में भूस्खलन से घर दफन, एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत

    कर्नाटक के मंगलुरु में नागोरी इलाके में रातभर की भारी बारिश के बाद आए भूस्खलन ने एक मकान को मलबे में बदल दिया। इस हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई, जिनमें दो बच्चियां भी शामिल थीं, जबकि तीन अन्य को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि मकान के ऊपर की पहाड़ी से मिट्टी का एक विशाल हिस्सा लगातार बारिश के कारण खिसककर मकान पर आ गिरा, जिससे पूरी संरचना ढह गई। — PTI
  12. हिमाचल प्रदेश: मानसून ने पूरे राज्य को ढका, चार की मौत, 35 सड़कें बंद

    हिमाचल प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई है। शिमला, मनाली और धर्मशाला सहित पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में भारी मानसूनी बारिश ने भूस्खलन कराए, नदियां उफान पर आ गईं, अनेक सड़कें बाधित हो गईं और बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई। शिमला मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून मंगलवार (30 जून 2026) को हिमाचल में दाखिल हुआ और बुधवार (1 जुलाई 2026) तक उसने पूरे राज्य को अपनी आगोश में ले लिया। विभाग ने 2 से 6 जुलाई के बीच — 4 जुलाई को छोड़कर — छिटपुट स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा की संभावना के मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सोलन जिले की एक महिला की जान तब चली गई जब वह ऑट के पास चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपनी गाड़ी से बाहर निकल रही थीं और एक भारी पत्थर उन पर आ गिरा। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, कांगड़ा जिले में मानसून के पहले ही दिन तीन मौतें दर्ज हुईं — एक करंट लगने से और एक ऊंचाई से गिरने के कारण। चंबा जिले के लनोट और फागडोग गांवों में निरंतर बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। पहाड़ी से खिसका मलबा दो मकानों में घुस गया और दीवारों में दरारें समेत भारी नुकसान पहुंचाया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के मुताबिक, राज्य में कुल 35 सड़कें वाहनों के लिए बंद की गई हैं — कुल्लू में 18, मंडी में 11 और लाहौल-स्पीति, सिरमौर व ऊना जिलों में दो-दो। इसके साथ ही पूरे राज्य में 127 बिजली ट्रांसफॉर्मर बाधित हो गए हैं। — PTI
  13. केरल: जून में 34% बारिश की कमी और जुलाई में सामान्य से कम वर्षा के अनुमान ने किसानों की बढ़ाई चिंता

    केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत तो सौम्य रही — राज्यभर में हल्की फुहारें पड़ीं और कोई चरम मौसमी घटना नहीं हुई — लेकिन बरसाती मौसम का पहला महीना 34% की वर्षा कमी के साथ समाप्त हुआ। अब IMD ने जुलाई के लिए भी राज्य में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जिसने किसान समुदाय की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। केरल की सालाना दक्षिण-पश्चिम मानसूनी वर्षा में जून और जुलाई की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 65% होती है। यदि ये दोनों महीने कमजोर रहे, तो अगस्त या सितंबर में मानसून की जोरदार वापसी के बिना राज्य में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। कृषि और जल संसाधन क्षेत्र में इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है, और किसान समुदाय मानसून के इन निर्णायक महीनों में बारीकी से निगरानी रखने की मांग कर रहा है।
  14. महाराष्ट्र: मुंबई बस हादसे पर मंत्री संजय शिरसाट के बयान से बवाल, अगले दिन बोले — मुझे गलत उद्धृत किया गया

    महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट एक विवाद में घिर गए हैं। मुंबई में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक छात्र की मौत के बाद उन्होंने कहा कि पेड़ और बिजली का गिरना इंसान के काबू में नहीं होता — इस टिप्पणी की जमकर आलोचना हुई। अपने विवादित बयान पर चौतरफा निशाना साधे जाने के एक दिन बाद बुधवार (1 जुलाई 2026) को शिव सेना के मंत्री ने नुकसान पर काबू पाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और नागरिक निकाय को ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही पेड़ों की उचित छंटाई कराना सुनिश्चित करना चाहिए था। इस पूरे प्रकरण ने पेड़ों की देखभाल और शहरी सुरक्षा के मामले में सरकारी जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
  15. कर्नाटक: दक्षिण कन्नड़ में स्कूलों और PU कॉलेजों में छुट्टी की घोषणा

    अत्यधिक भारी बारिश के रेड अलर्ट को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर एच.वी. दर्शन ने गुरुवार (2 जुलाई) को जिले के सभी स्कूलों, PU कॉलेजों और आंगनवाड़ियों में छुट्टी की घोषणा की है। उन्होंने लोगों से समुद्र तटों और नदियों के किनारों से दूर रहने की अपील की है, साथ ही मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है। इसके साथ ही, जिला और तालुक स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने मुख्यालयों को छोड़कर कहीं न जाएं।
  16. केरल: इडुक्की जलाशय में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से गिरा

    जल वर्ष का पहला महीना बीतने के बाद, राज्य के मुख्य बिजली परियोजनाओं में से एक, इडुक्की पनबिजली परियोजना जलाशय में पानी का स्तर घटकर केवल 23% रह गया है। पिछले साल की तुलना में इस बांध में फिलहाल 43 फीट से अधिक पानी की कमी है। जल वर्ष 1 जून से 30 नवंबर तक चलता है। KSEB के बांध सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई को जल स्तर 2,321.24 फीट था, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 2,364.18 फीट (58%) था। मानसून की 30 दिनों की बारिश के बावजूद, इस बांध के जल स्तर में केवल 4.14 फीट की बढ़ोतरी हुई, जो इस महीने में सिर्फ 3.54% की मामूली वृद्धि है। कमजोर मानसूनी बारिश के कारण इडुक्की जलाशय का जल स्तर 23% तक गिरने से केरल में बिजली संकट का खतरा पैदा हो गया है।
  17. महाराष्ट्र: वेस्टर्न रेलवे ने लोकल सेवा को सामान्य बताया, यात्रियों ने की देरी की शिकायत

    वेस्टर्न रेलवे ने X पर जानकारी दी कि उसके नेटवर्क पर उपनगरीय सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं, हालांकि यात्रियों का दावा था कि कुछ ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही थीं। BMC के अनुसार, गुरुवार सुबह 8 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में पूर्वी उपनगरों में सबसे अधिक 189 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई। इसके बाद द्वीप शहर में 172 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 165 मिमी बारिश दर्ज हुई। सबसे अधिक बारिश वाले इलाकों में, सांताक्रूज़ SWM वर्कशॉप और भांडुप के एस वार्ड कार्यालय में 238.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद पवई के पसपोली म्यूनिसिपल स्कूल में 234.6 मिमी, विक्रोली के टैगोर नगर म्यूनिसिपल स्कूल में 233.2 मिमी, मुलुंड के मीठागर म्यूनिसिपल स्कूल में 226 मिमी, अंधेरी फायर स्टेशन में 225.4 मिमी, परेल के एफ साउथ वार्ड कार्यालय में 222 मिमी और प्रभादेवी के जी साउथ वार्ड कार्यालय में 220.4 मिमी बारिश दर्ज की गई।
  18. मुंबई: जलजमाव के कारण कई लोकल ट्रेनें देरी से चलीं

    पटरियों पर पानी न डूबने के बावजूद, जलजमाव के कारण लोकल ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। रेल यात्रियों का कहना है कि कई लोकल ट्रेनें 10 से 15 मिनट की देरी से चल रही थीं, जिससे सुबह के व्यस्त समय में स्टेशनों पर भारी भीड़ जमा हो गई। IMD ने मुंबई और उसके उपनगरों में भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी की है, साथ ही गुरुवार रात और शुक्रवार सुबह (2 और 3 जुलाई, 2026) के दौरान अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। BMC ने बताया कि गुरुवार दोपहर 1:45 बजे 4.27 मीटर का ज्वार (हाई टाइड) आने की उम्मीद है, जबकि अगला 3.71 मीटर का ज्वार शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को रात 1:31 बजे आएगा। गुरुवार शाम 7:49 बजे 1.82 मीटर का भाटा (लो टाइड) आने का अनुमान है। सेंट्रल रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा कि पिछले 24 घंटों में 180 मिमी से अधिक बारिश होने के बावजूद उनके नेटवर्क पर कोई बड़ा जलजमाव नहीं हुआ और चारों कॉरिडोर पर लोकल सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं, हालांकि यात्रियों ने देरी की शिकायतें की हैं।
  19. मुंबई: मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में भरा पानी, रफ्तार थमी

    मुंबई में गुरुवार (2 जुलाई, 2026) की सुबह एक बार फिर भारी बारिश के साथ हुई, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया। इस मूसलाधार बारिश ने सड़क और रेल यातायात को धीमा कर दिया है। राहत मिलने के आसार कम हैं क्योंकि IMD ने दिनभर बारिश का अनुमान लगाया है। BMC के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कई क्षेत्रों में 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। गुरुवार सुबह से हो रही भारी बारिश के चलते दादर, परेल, हिंदमाता, चारकोप, वरली, गोरेगांव और अंधेरी जैसे प्रमुख इलाकों में जलभराव हो गया है, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है और वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
  20. भारत: हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के हिस्सों की ओर बढ़ रहा मानसून

    IMD ने बताया कि मानसून दिल्ली पहुंच चुका है। 2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून जुलाई में इस क्षेत्र में पहुंचा है, जबकि इसकी सामान्य आगमन तिथि 27 जून होती है। IMD का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में मानसून हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश को कवर कर लेगा।
  21. महाराष्ट्र: स्कूल बस हादसे के बाद ठाणे की मेयर ने दिए खतरनाक पेड़ों के सर्वे के आदेश

    मुंबई में भारी बारिश के दौरान एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक छात्र की मौत के बाद, ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने पूरे शहर में खतरनाक पेड़ों का सुरक्षा सर्वे कराने का आदेश दिया है। मेयर ने बुधवार (1 जुलाई, 2026) को ठाणे नगर निगम के वृक्ष प्राधिकरण विभाग की एक आपातकालीन बैठक बुलाई और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्कूलों, कॉलेजों, हाउसिंग सोसायटियों, अस्पतालों और प्रमुख चौराहों पर लगे पेड़ों की जांच करें। उन्होंने पहले छांटे गए पेड़ों की स्थिरता की दोबारा जांच करने के भी निर्देश दिए। मेयर ने किसी भी खतरे को टालने के लिए विभागों के बीच तालमेल पर जोर देते हुए कहा, 'खतरनाक, सूखे या झुके हुए पेड़ों और बड़ी शाखाओं की पहचान जल्द से जल्द की जाए और आवश्यक कदम उठाए जाएं।' इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि छंटाई के बाद सड़क किनारे छोड़ी गई शाखाओं को तुरंत साफ किया जाए ताकि मानसून के दौरान यातायात बाधित न हो। लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी खतरनाक पेड़ की जानकारी तुरंत ठाणे नगर निगम को दें।
  22. दिल्ली: 2021 के बाद पहली बार जुलाई में आया मानसून, IMD ने की पुष्टि

    दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार (2 जुलाई, 2026) को दिल्ली में दस्तक दे दी, जो इसकी सामान्य आगमन तिथि 27 जून से पांच दिन की देरी से है। इसके चलते शहर के कई हिस्सों में व्यापक बारिश हुई है। IMD का कहना है कि 2021 के बाद यह पहली बार है जब मानसून जुलाई में दिल्ली आया है। साल 2021 में मानसून 13 जुलाई को पहुंचा था। पिछले पांच वर्षों में, दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 में 29 जून, 2024 में 28 जून, 2023 में 25 जून और 2022 में 30 जून को दिल्ली पहुंचा था। IMD ने दिनभर दिल्ली के कई हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहने और गरज के साथ बारिश होने का अनुमान लगाया है।
  23. दिल्ली: हल्की से मध्यम बारिश से तापमान में गिरावट, उमस से राहत

    राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में गुरुवार सुबह (2 जुलाई, 2026) हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को उमस भरे मौसम से राहत मिली। IMD के अनुसार, दिल्ली में दिनभर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने शुक्रवार, शनिवार और रविवार (3 से 5 जुलाई, 2026) को भी गरज के साथ बारिश होने का अनुमान जताया है। IMD के मुताबिक, न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत से 5.1 डिग्री कम है। अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। सुबह के समय हल्की हवाओं के साथ हुई रुक-रुक कर बारिश ने दिल्ली के कई इलाकों में दस्तक दी, जिससे कई दिनों की गर्मी और उमस के बाद निवासियों को राहत मिली। CPCB के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 100 दर्ज किया गया, जो 'संतोषजनक' श्रेणी में आता है।
  24. मुंबई बारिश: जुहू में 24 घंटे में दर्ज की गई 205 मिमी बारिश

    मुंबई में पिछले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश हुई, जहां शहर के कई हिस्सों में 1 जुलाई की सुबह 8.30 बजे से 2 जुलाई, 2026 की सुबह 8.30 बजे के बीच 150 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। जुहू एयरपोर्ट पर सबसे अधिक 205 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इसके बाद सांताक्रूज़ में 204.6 मिलीमीटर और विक्रोली में 192.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। बांद्रा, राम मंदिर, भायखला, चेंबूर, विद्याविहार, सायन और कुलाबा में भी भारी बारिश हुई, जो मुंबई में मानसून की व्यापक तीव्रता को दर्शाती है।
  25. 24 घंटों में जुहू हवाई अड्डे पर सर्वाधिक 205 मिमी वर्षा, पूरी मुंबई में मानसून का कहर

    1 जुलाई की सुबह 8:30 बजे से 2 जुलाई 2026 की सुबह 8:30 बजे के बीच 24 घंटों में मुंबई के कई इलाकों में 150 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो मानसून की प्रचंड तीव्रता को दर्शाता है। जुहू हवाई अड्डा 205 मिलीमीटर वर्षा के साथ मुंबई का सबसे अधिक भीगा हुआ क्षेत्र रहा। सांताक्रूज़ में 204.6 मिलीमीटर और विखरोली में 192.5 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। सायन, भायखला, चेंबूर, विद्याविहार, बांद्रा, राम मंदिर और कोलाबा में भी भारी बारिश हुई, जिससे स्पष्ट होता है कि मानसून ने पूरे मुंबई को अपनी चपेट में ले लिया है।
  26. BMC का अलर्ट: आज रात और शुक्रवार सुबह मुंबई में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई और उसके उपनगरों में भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है। साथ ही चेताया है कि रात के दौरान और शुक्रवार (3 जुलाई 2026) की सुबह तक बारिश की तीव्रता अत्यधिक हो सकती है। नागरिक प्रशासन ने यह भी बताया कि शहर में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से रुक-रुककर तेज़ हवाएं चलने की संभावना है। BMC के अनुसार, आज दोपहर 1:45 बजे ज्वार (हाई टाइड) आएगा और दूसरी बार 3 जुलाई की रात 1:31 बजे। भाटा (लो टाइड) आज शाम 7:49 बजे और शुक्रवार (3 जुलाई 2026) की सुबह 7:11 बजे रहेगा। BMC ने 1 जुलाई की सुबह 8 बजे से 2 जुलाई की सुबह 8 बजे के बीच के 24 घंटों का वर्षा आंकड़ा भी साझा किया, जिसमें शहर में औसतन 172 मिमी, पूर्वी उपनगरों में 189 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 165 मिमी बारिश दर्ज की गई।

सवाल-जवाब

मुंबई के जुहू में कितनी बारिश दर्ज हुई?
1 और 2 जुलाई 2026 के बीच के 24 घंटों में जुहू हवाई अड्डे पर सबसे ज्यादा 205 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो पूरे मुंबई में सर्वाधिक रही।
BMC ने आगे के लिए क्या अलर्ट जारी किया है?
BMC ने गुरुवार रात और शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की सुबह तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।
दिल्ली में मानसून कब पहुंचा और यह खास क्यों है?
मानसून गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को दिल्ली पहुंचा, जो सामान्य तारीख से पांच दिन देरी से है, और 2021 के बाद यह पहला मौका है जब मानसून जुलाई में दिल्ली आया है।
मुंबई के मैनहोल हादसे में क्या हुआ था?
चांदीवली इलाके में जलभराव के कारण एक खुला मैनहोल नजर नहीं आया, जिसमें बहकर एक व्यक्ति की मौत हो गई, और BMC ने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।
हिमाचल प्रदेश में बारिश से कितना नुकसान हुआ है?
हिमाचल में बारिश से जुड़ी घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई है, राज्यभर में 46 सड़कें बंद हैं और 181 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप पड़े हैं।
केरल में मानसून की स्थिति कैसी है?
केरल में जून महीने में 34% बारिश की कमी दर्ज हुई है, इडुक्की बांध का जलस्तर घटकर 23% रह गया है, और IMD ने जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है।
कर्नाटक के मंगलुरु में क्या हादसा हुआ?
मंगलुरु के नागोरी इलाके में भूस्खलन से एक मकान दब गया, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर मानसून का क्या असर पड़ा?
भारी बारिश और मलबे के कारण चमोली में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और रुद्रप्रयाग में केदारनाथ यात्रा मार्ग प्रभावित हुए, और सोनप्रयाग-मुनकटिया मार्ग पर आवाजाही एहतियातन अस्थायी रूप से रोकी गई।
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