मुंबई पर मानसून एक बार फिर आफत बनकर बरसा है। शहर के जुहू इलाके में बीते 24 घंटों में 205 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो पूरे मुंबई में सबसे ज्यादा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने आज रात और शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की सुबह तक और भी भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, साथ ही 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रुक-रुककर तेज हवाएं चलने का भी अंदेशा जताया है। इसी बीच दिल्ली में पांच साल बाद जुलाई महीने में मानसून ने दस्तक दी है, तो हिमाचल प्रदेश, केरल, कर्नाटक और उत्तराखंड में भी बारिश ने जिंदगियां प्रभावित की हैं।
मुंबई में मानसून का कहर, जुहू सबसे ज्यादा भीगा
BMC के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई की सुबह 8 बजे से 2 जुलाई की सुबह 8 बजे के बीच के 24 घंटों में शहर में औसतन 172 मिमी, पूर्वी उपनगरों में 189 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 165 मिमी बारिश दर्ज हुई। लेकिन असली तस्वीर तब सामने आई जब 1 जुलाई सुबह 8:30 बजे से 2 जुलाई सुबह 8:30 बजे के बीच के आंकड़े देखे गए। इस दौरान मुंबई के कई इलाकों में 150 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज हुई, जो बताता है कि मानसून ने इस बार शहर को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। जुहू हवाई अड्डा 205 मिलीमीटर के साथ सबसे ज्यादा भीगा इलाका रहा, उसके बाद सांताक्रूज़ में 204.6 मिलीमीटर और विक्रोली में 192.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा सायन, भायखला, चेंबूर, विद्याविहार, बांद्रा, राम मंदिर और कुलाबा जैसे इलाकों में भी भारी बारिश हुई, जिससे साफ हो गया कि यह बारिश किसी एक कोने तक सीमित नहीं थी बल्कि पूरे शहर में एक जैसी तीव्रता से बरसी।
बारिश मापने वाले अलग-अलग केंद्रों के आंकड़े इस तीव्रता को और स्पष्ट करते हैं। सांताक्रूज़ के SWM वर्कशॉप और भांडुप के एस वार्ड कार्यालय में सबसे ज्यादा 238.8 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके बाद पवई के पसपोली म्यूनिसिपल स्कूल में 234.6 मिमी, विक्रोली के टैगोर नगर म्यूनिसिपल स्कूल में 233.2 मिमी, मुलुंड के मीठागर म्यूनिसिपल स्कूल में 226 मिमी, अंधेरी फायर स्टेशन में 225.4 मिमी, परेल के एफ साउथ वार्ड कार्यालय में 222 मिमी और प्रभादेवी के जी साउथ वार्ड कार्यालय में 220.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इतने सारे केंद्रों पर 200 मिमी के आसपास या उससे ज्यादा बारिश का मतलब है कि मुंबई का लगभग हर हिस्सा इस बार भीगा है, चाहे वह द्वीप शहर हो, पूर्वी उपनगर हों या पश्चिमी उपनगर।
समुद्र के ज्वार-भाटे को लेकर भी BMC ने जानकारी दी है। गुरुवार दोपहर 1:45 बजे 4.27 मीटर का ज्वार (हाई टाइड) आने की उम्मीद जताई गई थी, जबकि अगला 3.71 मीटर का ज्वार शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की रात 1:31 बजे आएगा। इसके उलट भाटा (लो टाइड) गुरुवार शाम 7:49 बजे 1.82 मीटर का रहा, जबकि अगला भाटा शुक्रवार सुबह 7:11 बजे आने का अनुमान है। भारी बारिश के साथ ऊंचे ज्वार का यह मेल अक्सर मुंबई के निचले इलाकों में जलभराव को और बढ़ा देता है, इसलिए प्रशासन इन दोनों कारकों पर बराबर नजर रख रहा है।
सड़कों पर पानी भरा, लोकल ट्रेनें भी लेट हुईं
गुरुवार, 2 जुलाई 2026 की सुबह से ही मुंबई में भारी बारिश शुरू हो गई, जिसने निचले इलाकों को पानी में डुबो दिया। इस मूसलाधार बारिश के चलते सड़क और रेल दोनों तरह के यातायात की रफ्तार थम गई। दादर, परेल, हिंदमाता, चारकोप, वरली, गोरेगांव और अंधेरी जैसे प्रमुख इलाकों में पानी भर गया, जिससे यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी और वाहन रेंगते नजर आए। राहत की उम्मीद भी कम ही है, क्योंकि मौसम विभाग ने दिनभर बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है।
पटरियों पर सीधे पानी भले न भरा हो, लेकिन आसपास के इलाकों में जलजमाव का असर लोकल ट्रेनों की रफ्तार पर जरूर पड़ा। यात्रियों का कहना था कि कई लोकल ट्रेनें 10 से 15 मिनट की देरी से चल रही थीं, जिसकी वजह से सुबह के व्यस्त समय में स्टेशनों पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। सेंट्रल रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 180 मिमी से ज्यादा बारिश होने के बावजूद उनके नेटवर्क पर कोई बड़ा जलजमाव नहीं हुआ और चारों कॉरिडोर पर लोकल सेवाएं सामान्य ढंग से चलती रहीं, हालांकि यात्रियों ने देरी की शिकायतें कीं। वेस्टर्न रेलवे ने भी सोशल मीडिया मंच X पर जानकारी दी कि उसके नेटवर्क पर उपनगरीय सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं, लेकिन यहां भी यात्रियों का दावा था कि कुछ ट्रेनें तय समय से देरी से चल रही थीं। यानी आधिकारिक बयानों और यात्रियों के अनुभव में साफ फासला दिख रहा था।
मैनहोल हादसे ने ली जान, विधानसभा में उठा मामला
मुंबई की मूसलाधार बारिश के बीच एक बेहद दुखद हादसा भी सामने आया। एक व्यक्ति खुले मैनहोल में बह जाने से अपनी जान गंवा बैठा। यह घटना पूर्वी उपनगर के चांदीवली इलाके में हुई, जहां भारी जलभराव के चलते सड़क पर खुला मैनहोल नजर ही नहीं आ रहा था। एक अधिकारी ने गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को बताया कि दमकल विभाग और नगर निगम की आपदा प्रबंधन टीमों ने मिलकर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद उसी दिन व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया। बीजेपी विधायक अमीत सातम ने बताया कि यह हादसा उसी इलाके की खैरानी रोड पर हुआ, जहां उस वक्त बृहन्मुंबई महानगरपालिका खुद नाली का काम करवा रही थी।
इस मौत ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर तीखी बहस छेड़ दी। उपमहापौर संजय घाडी ने कहा कि नगर निगम इस मामले में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएगा और इसे गैर-इरादतन हत्या माना जाएगा। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर ने भी गुरुवार को इसी दिन इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह हादसा गैर इरादतन हत्या के समान है। जब विधायक अमीत सातम ने सदन में यह मुद्दा उठाया और जिम्मेदार लोगों पर तत्काल आपराधिक कार्रवाई की मांग की, तो अध्यक्ष ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि उसी दिन की कार्यवाही खत्म होने से पहले इस हादसे का पूरा ब्योरा सदन के सामने पेश किया जाए।
ठाणे में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से मौत, अब हर पेड़ की जांच होगी
मुंबई में भारी बारिश के दौरान एक स्कूल बस पर पेड़ गिर गया, जिसमें एक छात्र की जान चली गई। इस दुखद घटना के बाद ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने पूरे शहर में खतरनाक पेड़ों का सुरक्षा सर्वे कराने का आदेश दे दिया है। मेयर ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को ठाणे नगर निगम के वृक्ष प्राधिकरण विभाग की एक आपातकालीन बैठक बुलाई और अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि स्कूलों, कॉलेजों, हाउसिंग सोसायटियों, अस्पतालों और प्रमुख चौराहों पर लगे पेड़ों की तुरंत जांच की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन पेड़ों को पहले ही खतरनाक मानकर चिह्नित किया जा चुका है, उनकी स्थिरता की दोबारा जांच भी की जाए।
किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए मेयर ने विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देते हुए कहा, खतरनाक, सूखे या झुके हुए पेड़ों और बड़ी शाखाओं की पहचान जल्द से जल्द की जाए और जरूरी कदम तुरंत उठाए जाएं। उन्होंने यह निर्देश भी दिया कि पेड़ों की छंटाई के बाद सड़क किनारे छोड़ दी गई शाखाओं को तुरंत हटाया जाए ताकि मानसून के दौरान यातायात बाधित न हो। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की गई है कि उन्हें अगर कहीं कोई खतरनाक पेड़ नजर आए, तो इसकी सूचना तुरंत ठाणे नगर निगम को दें।
मंत्री संजय शिरसाट के बयान पर बवाल, अगले दिन दी सफाई
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री संजय शिरसाट एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए। मुंबई में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से हुई छात्र की मौत के बाद उन्होंने कहा था कि पेड़ और बिजली का गिरना इंसान के काबू में नहीं होता, और इस टिप्पणी की चौतरफा आलोचना हुई। अपने इस विवादित बयान पर निशाना साधे जाने के एक दिन बाद, बुधवार 1 जुलाई 2026 को शिव सेना के इस मंत्री ने नुकसान पर काबू पाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, और यह भी कहा कि नागरिक निकाय को ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही पेड़ों की उचित छंटाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी। इस पूरे प्रकरण ने पेड़ों की देखभाल और शहरी सुरक्षा को लेकर सरकारी जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है।
दिल्ली में आखिरकार मानसून की दस्तक, 2021 के बाद पहली बार जुलाई में एंट्री
जहां मुंबई बारिश से जूझ रही है, वहीं राष्ट्रीय राजधानी में मानसून का लंबा इंतजार खत्म हुआ है। दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को दिल्ली पहुंचा, जो इसकी सामान्य आगमन तारीख 27 जून से पांच दिन की देरी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 2021 के बाद यह पहला मौका है जब मानसून जुलाई महीने में दिल्ली पहुंचा है। साल 2021 में मानसून 13 जुलाई को आया था। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े देखें तो दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 में 29 जून, 2024 में 28 जून, 2023 में 25 जून और 2022 में 30 जून को दिल्ली पहुंचा था। यानी इस साल की पांच दिन की देरी भले बहुत बड़ी न लगे, लेकिन जुलाई में मानसून का आना पिछले चार साल के मुकाबले साफ अपवाद है।
मानसून पहुंचने से पहले ही गुरुवार सुबह दिल्ली के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो चुकी थी, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को उमस भरे मौसम से राहत मिली। IMD के अनुसार, दिल्ली में दिनभर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की संभावना है, और मौसम विभाग ने शुक्रवार, शनिवार और रविवार यानी 3 से 5 जुलाई 2026 को भी गरज के साथ बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत से 5.1 डिग्री कम है, जबकि अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद जताई गई है। सुबह के वक्त हल्की हवाओं के साथ रुक-रुक कर हुई इस बारिश ने दिल्ली के कई इलाकों में दस्तक दी, जिससे कई दिनों की गर्मी और उमस के बाद निवासियों को राहत मिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 100 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। IMD ने यह भी बताया कि मानसून अब आगे बढ़ते हुए अगले तीन दिनों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के कुछ हिस्सों और मध्य प्रदेश को भी कवर कर लेगा।
हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप, चार की मौत और सड़कों पर मलबा
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बारिश जानलेवा साबित हुई है। यहां बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो चुकी है। शिमला, मनाली और धर्मशाला सहित राज्य के कई हिस्सों में भारी मानसूनी बारिश ने भूस्खलन कराए, नदियां उफान पर आ गईं, कई सड़कें बाधित हुईं और बिजली आपूर्ति बड़े पैमाने पर ठप पड़ गई। शिमला मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून मंगलवार, 30 जून 2026 को हिमाचल में दाखिल हुआ और बुधवार, 1 जुलाई 2026 तक पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले चुका था। विभाग ने 2 से 6 जुलाई के बीच, 4 जुलाई को छोड़कर, राज्य के कुछ हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
इन मौतों की कहानियां भी बेहद दुखद हैं। सोलन जिले की एक महिला की जान तब चली गई जब वह ऑट के पास चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपनी गाड़ी से बाहर निकल रही थीं, और एक भारी पत्थर उन पर आ गिरा। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, कांगड़ा जिले में मानसून के पहले ही दिन तीन मौतें दर्ज हुईं, जिनमें एक करंट लगने से और एक ऊंचाई से गिरने के कारण हुई। चंबा जिले के लनोट और फागडोग गांवों में लगातार बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जहां पहाड़ी से खिसका मलबा दो मकानों में घुस गया, जिससे दीवारों में दरारें आईं और भारी नुकसान हुआ।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने शुरुआत में बताया था कि राज्य में कुल 35 सड़कें वाहनों के लिए बंद की गई हैं, जिनमें कुल्लू में 18, मंडी में 11 और लाहौल-स्पीति, सिरमौर व ऊना जिलों में दो-दो सड़कें शामिल थीं, और साथ ही पूरे राज्य में 127 बिजली ट्रांसफॉर्मर बाधित हो गए थे। लेकिन हालात और बिगड़े और गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को अधिकारियों ने बताया कि बंद सड़कों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जिनमें कुल्लू में 18, मंडी में 15, सिरमौर में नौ और लाहौल-स्पीति तथा ऊना जिलों में दो-दो सड़कें शामिल हैं। SEOC के मुताबिक भारी बारिश के कारण अब कुल 181 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप हो चुके हैं और छह जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार शाम से पोंटा साहिब में सबसे अधिक 100.4 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके बाद कसौली में 86 मिमी, धर्मपुर में 83.4 मिमी, जट्टन बैराज में 77 मिमी, धौलाकुआं में 69 मिमी, पच्छाद में 60 मिमी, रामपुर में 53 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी, पालमपुर में 37.8 मिमी और धर्मशाला में 34.1 मिमी बारिश हुई। कांगड़ा, जुब्बरहट्टी और भुंतर में भी गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं देखी गईं।
इस बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी हिमाचल में वर्षा ऋतु के दौरान राजमार्गों पर सुरक्षित, सुगम और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। गुरुवार को जारी एक बयान में NHAI ने बताया कि भूस्खलन, चट्टानें खिसकने, मलबे के जमाव, बाढ़ और मानसून से जुड़ी अन्य आपदाओं के प्रति संवेदनशील स्थानों की पहचान कर ली गई है और प्राथमिकता के आधार पर वहां बचाव कार्य शुरू भी कर दिए गए हैं। प्राधिकरण ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के तहत आने वाले संवेदनशील और भूस्खलन-प्रवण हिस्सों का विस्तृत सर्वेक्षण भी पूरा कर लिया है, और इन्हीं आकलनों के आधार पर चिह्नित जगहों पर सुधार का काम शुरू किया गया है। राजमार्गों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पहाड़ी सुरक्षा कार्य, ढलान का स्थिरीकरण, सुरक्षा दीवारों का निर्माण, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और कटाव-रोधी उपाय जैसे कई तकनीकी काम किए जा रहे हैं।
कर्नाटक: मंगलुरु में भूस्खलन से एक परिवार के तीन लोगों की मौत, स्कूलों में छुट्टी
कर्नाटक के मंगलुरु में भी बारिश ने एक परिवार को उजाड़ दिया। यहां के नागोरी इलाके में रातभर हुई भारी बारिश के बाद आए भूस्खलन ने एक मकान को मलबे में तब्दील कर दिया। इस हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई, जिनमें दो बच्चियां भी शामिल थीं, जबकि तीन अन्य लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मकान के ऊपर मौजूद पहाड़ी से मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा लगातार बारिश के चलते खिसककर मकान पर आ गिरा, जिससे पूरी संरचना ढह गई।
इसी बीच दक्षिण कन्नड़ जिले में अत्यधिक भारी बारिश के रेड अलर्ट को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर एच.वी. दर्शन ने गुरुवार, 2 जुलाई को जिले के सभी स्कूलों, PU कॉलेजों और आंगनवाड़ियों में छुट्टी की घोषणा कर दी। उन्होंने लोगों से समुद्र तटों और नदियों के किनारों से दूर रहने की अपील की और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी। साथ ही जिला और तालुक स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने मुख्यालय छोड़कर कहीं न जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।
केरल में इडुक्की बांध का जलस्तर घटकर सिर्फ 23%, किसानों की चिंता बढ़ी
केरल से भी मानसून को लेकर चिंताजनक खबर आई है, लेकिन यहां समस्या ज्यादा बारिश की नहीं बल्कि कम बारिश की है। जल वर्ष का पहला महीना बीतते ही राज्य की प्रमुख बिजली परियोजनाओं में शुमार इडुक्की पनबिजली परियोजना के जलाशय में पानी का स्तर घटकर महज 23% रह गया है। जल वर्ष 1 जून से 30 नवंबर तक चलता है, और पिछले साल की तुलना में इस बांध में फिलहाल 43 फीट से भी ज्यादा पानी की कमी है। केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) के बांध सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जुलाई को जलस्तर 2,321.24 फीट था, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 2,364.18 फीट यानी 58% था। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 30 दिनों की मानसूनी बारिश के बावजूद इस बांध के जलस्तर में सिर्फ 4.14 फीट की बढ़ोतरी हुई, जो इस पूरे महीने में महज 3.54% की मामूली वृद्धि है। कमजोर मानसूनी बारिश के चलते इडुक्की जलाशय का जलस्तर 23% तक गिरने से केरल में आने वाले समय में बिजली संकट का खतरा पैदा हो गया है।
यह चिंता सिर्फ बांध तक सीमित नहीं है। केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत भले सौम्य रही हो, राज्यभर में हल्की फुहारें पड़ीं और कोई चरम मौसमी घटना दर्ज नहीं हुई, लेकिन बरसाती मौसम का यह पहला महीना 34% की वर्षा कमी के साथ खत्म हुआ। अब IMD ने जुलाई महीने के लिए भी राज्य में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जिसने किसान समुदाय की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यह चिंता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि केरल की सालाना दक्षिण-पश्चिम मानसूनी वर्षा में जून और जुलाई की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 65% होती है। अगर ये दोनों महीने कमजोर रहे, तो अगस्त या सितंबर में मानसून की जोरदार वापसी के बिना राज्य में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है। कृषि और जल संसाधन क्षेत्र में इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है, और किसान समुदाय मानसून के इन निर्णायक महीनों में बारीकी से निगरानी रखने की मांग कर रहा है।
राजस्थान में सात दिन की देरी से पहुंचा मानसून, अगले हफ्ते भारी बारिश का अलर्ट
राजस्थान में भी मानसून का इंतजार खत्म हुआ है, हालांकि यहां भी देरी हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को राजस्थान के कुछ हिस्सों में दाखिल हुआ, जो अपनी निर्धारित तारीख से सात दिन बाद है। जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक मानसून राज्य के पूर्वी भागों में आगे बढ़ चुका है और इसकी उत्तरी सीमा फिलहाल टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है। IMD ने बताया कि इससे एक दिन पहले, बुधवार 1 जुलाई 2026 को मानसून गुजरात के अतिरिक्त क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के शेष भागों, पूरे दिल्ली क्षेत्र, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा और पंजाब के विस्तृत भूभाग तथा राजस्थान के कुछ इलाकों में भी फैल चुका था। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून के राजस्थान के और अधिक क्षेत्रों में फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
विभाग ने आने वाले दिनों में पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में मूसलाधार बारिश का भी अनुमान जताया है। गुरुवार को उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और जयपुर संभागों के बिखरे इलाकों में मध्यम से भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है। IMD ने यह भी कहा कि कोटा संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में कुछ जगहों पर अत्यंत भारी वर्षा भी हो सकती है। अगले एक हफ्ते तक जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभागों में मानसून सक्रिय बने रहने का पूर्वानुमान है, और इस दौरान पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा मार्गों पर असर, कई जिलों में अलर्ट
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी मानसून ने यात्रियों और श्रद्धालुओं दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुवार, 2 जुलाई 2026 को मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश के बीच देहरादून सहित कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की। लगातार बारिश और पहाड़ियों से गिरते पत्थरों व मलबे के कारण चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने रुद्रप्रयाग जिले के सोनप्रयाग-मुनकटिया मार्ग पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दी है।
देहरादून मौसम केंद्र ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है, जिसमें कुछ स्थानों पर भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों के लिए कुछ इलाकों में भारी वर्षा की आशंका के मद्देनजर येलो अलर्ट जारी किया गया है। बीते 24 घंटों में दर्ज बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो नरेंद्रनगर में 110 मिमी, धनोल्टी में 100 मिमी, खटीमा में 85.5 मिमी, जॉली ग्रांट में 80.4 मिमी, देहरादून में 79.6 मिमी, मसूरी में 77.8 मिमी, लक्सर में 73.5 मिमी, बनबसा में 72 मिमी, पंतनगर में 70.6 मिमी, बड़कोट में 65 मिमी, रुद्रप्रयाग में 64.5 मिमी, जखोली में 63 मिमी और यमकेश्वर में 60 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा कई अन्य स्थानों पर भी मध्यम वर्षा रिकॉर्ड की गई।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में अलर्ट, गुजरात में SDRF की बड़ी तैनाती
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने रविवार, 5 जुलाई 2026 तक के लिए क्षेत्र में भारी बारिश, आंधी-तूफान, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताते हुए मौसम संबंधी चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने खासतौर पर नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और संवेदनशील इलाकों में जाने से बचने की अपील की है। किश्तवाड़ के उपायुक्त कार्यालय की एडवाइजरी के मुताबिक, क्षेत्र में मुख्य रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और आंधी आ सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाएं और कम समय के लिए मूसलाधार बौछारें पड़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने आगाह किया है कि मौजूदा मौसम संवेदनशील स्थानों पर अचानक बाढ़, भूस्खलन और मलबे के खिसकने की वजह बन सकता है, इसलिए जलाशयों, झरनों और नालों के करीब रहने वाले लोगों को मौसम में सुधार होने तक इन जगहों से दूर रहने और सभी जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने राजस्व, लोक निर्माण विभाग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बिजली, जल शक्ति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, NHIDCL और सीमा सड़क संगठन यानी BRO सहित सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
वहीं गुजरात में पुलिस ने राज्यभर में आपदा प्रबंधन और मानसून पूर्व तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की है। गुरुवार (जून 2, 2026) को हुई इस समीक्षा के तहत राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF की 11 कंपनियों के कुल 1,036 जवानों को संवेदनशील स्थलों पर तैनात किया गया है। यह समीक्षा बैठक बुधवार (जून 2, 2026) को पुलिस भवन में राज्य पुलिस महानिदेशक जी.एस. मलिक की अध्यक्षता में हुई, जिसमें विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षक और कई इकाइयों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में आपदा की स्थिति में NDRF, SDRF, होम गार्ड, GRD, TRB और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाकर मिल-जुलकर काम करने पर जोर दिया गया। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि पूर्व नियोजन के तहत 28 जून से ही SDRF की 11 कंपनियों के 1,036 जवानों को संवेदनशील और पहले से तय स्थलों पर तैनात किया जा चुका है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।



















