मध्य प्रदेश की राजधानी के सुनियोजित विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रशासन ने आगामी दशकों के लिए विकास का खाका तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बहुप्रतीक्षित दस्तावेज को सार्वजनिक करते हुए इसके प्रमुख बिंदुओं की जानकारी साझा की है। इस नए खाके को मुख्य रूप से चार आधारशिलाओं पर खड़ा किया गया है, जिसमें प्राकृतिक परिवेश का बचाव, नागरिक-केंद्रित आधुनिक सोच, प्रगतिशील बदलाव और आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा देना शामिल है। सरकार अब इस प्रस्ताव पर आम जनता से राय और सुझाव मांगेगी, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएं और पर्यावरण सुरक्षा
इस विस्तृत योजना को तैयार करते समय शहर की भौगोलिक और प्राकृतिक खूबियों का पूरा ध्यान रखा गया है। ऐतिहासिक भोजताल और इसके जलग्रहण क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्थानीय पहाड़ियों, घने जंगलों, जल स्रोतों और वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों की रक्षा के लिए पुख्ता नियम बनाए गए हैं। इस बार शहर के हरित क्षेत्र को पहले के मुकाबले काफी बढ़ाया गया है, जो कि तय मानकों से भी अधिक है। भानपुर खंती जैसी पुरानी जगहों के कायाकल्प के लिए वहां गोल्फ कोर्स बनाने की योजना है, जबकि आवासीय कॉलोनियों में भी खुले एवं हरियाली वाले स्थानों का दायरा बढ़ाया गया है ताकि पर्यावरण संतुलित रहे।
ग्रोथ कॉरिडोर और आधुनिक अधोसंरचना का विकास
आर्थिक गतिविधियों को गति देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगभग 3,000 हेक्टेयर भूमि को ग्रोथ कॉरिडोर के अंतर्गत रखा गया है। यह 51 किलोमीटर लंबा मार्ग शहर के कई प्रमुख हिस्सों, हवाई अड्डे और औद्योगिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस कॉरिडोर के आसपास बहुउपयोगी और ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति होगी, जिससे व्यापार और आवास दोनों को बढ़ावा मिलेगा। यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक परिवहन के लिए विशेष मार्ग सुझाए गए हैं। इसके अलावा विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम और इंदौर जैसे प्रमुख मार्गों को भी इस मुख्य विकास धुरी से जोड़ा जा रहा है ताकि यातायात सुगम हो सके।
स्मार्ट मोबिलिटी और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था
बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए यातायात व्यवस्था में सुधार के कई नए प्रावधान किए गए हैं। शहर में बहुस्तरीय पार्किंग, मशीनीकृत पार्किंग स्थल और फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जगहों का उपयोग वाहन खड़े करने के लिए किया जाएगा। निर्माण कार्यों की वास्तविक समय पर निगरानी और अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के लिए डिजिटल ट्विन सिटी की अवधारणा को शामिल किया गया है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी सार्वजनिक स्थानों पर लगे निजी कैमरों के नेटवर्क को मजबूत करने और पारदर्शी परिसरों के निर्माण पर जोर दिया गया है ताकि नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल मिल सके।
आवासीय सुविधाएं और शिक्षा का विस्तार
शहर में काम करने की जगह और आवास के बीच की दूरी को कम करने के लिए मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। भौंरी इलाके में शिक्षा और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष नॉलेज हब की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही धर्मशालाओं, वृद्धाश्रमों और विशेष विद्यालयों जैसी कल्याणकारी गतिविधियों को अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि समाज के हर वर्ग को लाभ मिल सके। प्रवासी नागरिकों के लिए किराये के मकानों की व्यवस्था और पुरानी सोसाइटियों के पुनर्विकास को भी आसान बनाया गया है ताकि शहर के भीतर किफायती आवासों की उपलब्धता बनी रहे।


















