भोपाल के बैरागढ़ रोड पर बने हलालपुर पटाखा बाजार के सोनी पटाखा सेंटर में लगी भयंकर आग ने सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों की हकीकत सामने रख दी है। आग को कुछ ही घंटों में बुझा तो लिया गया, लेकिन इस हादसे ने प्रशासन को झकझोर दिया और अब रिहायशी इलाके के बीच चल रहे इस बाजार को शहर से बाहर ले जाने की मांग फिर तेज हो गई है। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और बरसों से अटकी पड़ी पटाखा मार्केट शिफ्टिंग की फाइल को फिर से सामने निकाल लिया।
TrendKia की पड़ताल में सामने आया है कि इस आगजनी का असर सिर्फ पटाखा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। स्पोर्ट्स कोटे के तहत बांटे जाने वाले कारतूसों की पूरी व्यवस्था भी अब जांच के घेरे में आ गई है। पिछले साल उजागर हुए कारतूस कालाबाजारी के मामले के बाद से प्रशासन वैसे भी सख्ती की तैयारी में जुटा था, और अब नई व्यवस्था के तहत कारतूस जारी करने की एक तय सीमा बांधी जा रही है।
सुरक्षा बनाम रोजगार की बहस
प्रशासन इस वक्त हाईकोर्ट में लंबित मामलों और लगे हुए स्टे ऑर्डर की बारीकी से समीक्षा कर रहा है। आग से जुड़े फोटो, वीडियो और सीसीटीवी फुटेज जुटाए जा रहे हैं, ताकि अदालत के सामने यह तथ्य रखा जा सके कि आबादी के बीच चलने वाला यह बाजार सुरक्षा के लिहाज से कितना बड़ा खतरा बन चुका है। अधिकारियों का मानना है कि यह ताजा हादसा भविष्य की किसी बड़ी आपदा की चेतावनी भर है। दूसरी ओर बाजार के व्यापारियों का तर्क है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, पर उनके रोजगार का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है। इसी बीच दुकानों की नाप-जोख, लाइसेंस और भंडारण क्षमता की जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें शुरुआती दौर में ही कई गंभीर गड़बड़ियां पकड़ में आई हैं और इन्हीं ने प्रशासन को कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर किया है।
आग के बाद दोबारा खुली शिफ्टिंग की फाइल
जिला प्रशासन ने पटाखा मार्केट की मौजूदा हालत पर विस्तृत रिपोर्ट बनाना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने हर दुकान के लाइसेंस की स्थिति, अदालत में चल रहे मुकदमों और शिफ्टिंग पर लगे स्टे की पूरी जानकारी इकट्ठा की है। माना जा रहा है कि अगले हफ्ते हाईकोर्ट में नई रिपोर्ट पेश कर प्रशासन शिफ्टिंग की राह में आ रही कानूनी अड़चनों को हटाने की कोशिश कर सकता है। आगे का कदम काफी हद तक इसी रिपोर्ट पर टिका रहेगा। अगर स्टे हट जाता है तो बाजार को शहर की भीड़भाड़ वाली आबादी से दूर ले जाने की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ सकती है। वहीं कारतूस वितरण में प्रस्तावित बदलाव लागू होते ही इस पूरे सिस्टम पर निगरानी और जवाबदेही दोनों बढ़ जाएंगी।
नाप-जोख में पकड़ी गईं बड़ी अनियमितताएं
प्रशासन ने जब मौके पर दुकान की नाप कराई तो चौंकाने वाली बात सामने आई। जिस दुकान में आग लगी थी, उसका असल कारोबारी इलाका लाइसेंस में मंजूर क्षेत्र से कई गुना ज्यादा निकला। कागजों में जहां 7×5 फीट का क्षेत्र दर्ज था, वहीं जमीनी हकीकत में भंडारण और बिक्री का दायरा करीब 15×25 फीट पाया गया। इतना ही नहीं, परिसर में 50×50 फीट का एक शेड भी खड़ा मिला। बाकी दुकानों की हालत भी कमोबेश ऐसी ही निकली।
15 में से केवल 7 दुकानों के पास वैध लाइसेंस
जांच में यह भी उजागर हुआ कि बाजार की कुल 15 दुकानों में से सिर्फ 7 दुकानदारों के पास ही वैध लाइसेंस हैं। बाकी कारोबारियों ने बाजार की शिफ्टिंग के खिलाफ अदालत से स्टे ले रखा है। इन दुकानों में करीब 210 क्विंटल पटाखा भंडार पाया गया है। अब प्रशासन सभी दुकानदारों को नोटिस थमाकर उनसे जवाब-तलब करने की तैयारी कर रहा है।
35 लाख के पटाखे और 7 लाख नकद राख होने का दावा
सोनी पटाखा सेंटर के संचालक ने प्रशासन को बताया कि आग में करीब 35 लाख रुपये कीमत के पटाखे जलकर खाक हो गए। इसके अलावा 7 लाख रुपये की नकदी भी आग की भेंट चढ़ गई। घटनास्थल से तकरीबन 1 लाख रुपये के आधे-अधूरे जले नोट भी बरामद किए गए हैं। नुकसान का असल आंकड़ा निकालने का काम फिलहाल जारी है।
कारतूस जारी करने के नियमों में बड़ा फेरबदल
स्पोर्ट्स कोटे के कारतूसों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। अब किसी भी शूटर को एक बार में ज्यादा से ज्यादा 500 कारतूस और पूरे साल में अधिकतम 1000 कारतूस ही दिए जाएंगे। इससे ज्यादा की मांग पर खेल विभाग से सत्यापन कराना अनिवार्य होगा।
खोखों का हिसाब रखने की तैयारी
सूत्रों की मानें तो प्रशासन ने राज्य सरकार के पास यह प्रस्ताव भेजा है कि कारतूसों के इस्तेमाल और उनके खोखों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया जाए। खिलाड़ियों को यह भी बताना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए लिए जा रहे हैं और इनका उपयोग किस शूटिंग रेंज में किया जाएगा।













