बिहार के मुंगेर जिले में एक सर्विस पिस्तौल ने पुलिस महकमे के भीतर की एक बड़ी साजिश को बेनकाब कर दिया है। सफियासराय थाना में तैनात रहे दरोगा चंदन कुमार ने अपनी पत्नी मधु कुमारी की मौत को आत्महत्या बताकर मामले को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन एफएसएल और बैलेस्टिक जांच रिपोर्ट ने उनकी पूरी कहानी झुठला दी है।
पहले ही दिन उठे थे सवाल, पिता ने बताया था हत्या
11 अप्रैल की शाम गोली लगने से मधु कुमारी की जान चली गई थी। घटना के तुरंत बाद चंदन कुमार ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी ने खुदकुशी की है, और शुरुआती जांच भी उसी दिशा में आगे बढ़ी। मगर मधु के पिता रंजीत कुमार शुरू से ही इस दावे को मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि शादी के बाद से बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था और उसकी हत्या की गई है, आत्महत्या की कहानी सिर्फ सच छिपाने के लिए गढ़ी गई है।
पोस्टमार्टम में गोली के निशानों ने बदली दिशा
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों की टीम ने गोली के प्रवेश और निकास बिंदुओं की बारीकी से पड़ताल की। डॉ. रमन, डॉ. रुपेश और डॉ. शशांक की मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा कि जिस तरह गोली शरीर में दाखिल हुई और बाहर निकली, वह आत्महत्या के सामान्य पैटर्न से मेल नहीं खाती। इस रिपोर्ट ने पुलिस को नए सिरे से और वैज्ञानिक आधार पर जांच आगे बढ़ाने पर मजबूर कर दिया।
एफएसएल और बैलेस्टिक रिपोर्ट ने खोली पूरी सच्चाई
मेडिकल बोर्ड की आशंका के बाद मामला फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और बैलेस्टिक विशेषज्ञों के पास भेजा गया। जांच में सामने आया कि मधु कुमारी ने खुद को गोली नहीं मारी थी, बल्कि उन्हें उसी सर्विस पिस्टल से गोली मारी गई, जो आरोपी दरोगा चंदन कुमार अपनी ड्यूटी के दौरान इस्तेमाल करते थे। इस एक रिपोर्ट ने चंदन कुमार की आत्महत्या वाली पूरी कहानी को ध्वस्त कर दिया और महीनों से चल रही उलझन को सुलझा दिया।
एसपी बोले, विज्ञान के सामने झूठ नहीं टिकता
मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि वैज्ञानिक जांच और बैलेस्टिक रिपोर्ट से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि चंदन कुमार ने ही अपनी पत्नी मधु कुमारी की हत्या की थी। उन्होंने कहा, "अपराधी चाहे कोई भी हो, वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने झूठ ज्यादा दिन तक नहीं टिकता है." एसपी के मुताबिक आरोपी दरोगा पहले से ही निलंबित चल रहा है और फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। उसके खिलाफ हत्या और दहेज उत्पीड़न की धाराओं में कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुलिस विभाग के लिए भी बड़ा सबक
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी खुद पुलिस विभाग का हिस्सा था और अपनी वर्दी तथा सरकारी हथियार का इस्तेमाल कर सबूत मिटाने की कोशिश कर रहा था। एसपी ने कहा कि पुलिस की पहली जिम्मेदारी सच को सामने लाना है, और इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से यही हुआ है। यह घटना यह भी दिखाती है कि पुलिस की वर्दी पहनने वाला कोई अधिकारी भी अगर अपराध करता है, तो फोरेंसिक जांच की बारीकी उसे बचने नहीं देती।



















