मध्य प्रदेश की संस्कारधानी और 'स्मार्ट सिटी' का तमगा हासिल करने वाले जबलपुर की असलियत मानसून की पहली ही झमाझम बारिश में पूरी तरह से बेनकाब हो गई। रविवार को शहर में महज एक घंटे की तेज बारिश हुई, लेकिन यह साठ मिनट का समय नागरिक प्रशासन की तैयारियों की पोल खोलने के लिए काफी था। मानसून के आने से पहले नगर निगम के आला अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से दुरुस्त है। नागरिकों को आश्वासन दिया गया था कि नालों की गहरी सफाई के लिए जेसीबी और अन्य भारी मशीनों का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया है, और इस साल शहर में जलभराव या 'जल-प्लावन' जैसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। हालांकि, रविवार की इस संक्षिप्त लेकिन मूसलाधार बारिश ने निगम के इन सभी कागजी दावों की हवा निकाल दी, शहर के बुनियादी ढांचे को घुटनों पर ला दिया और निवासियों को जलमग्न सड़कों पर संघर्ष करने के लिए छोड़ दिया।
वॉटर पार्क में तब्दील हुई कल्चर स्ट्रीट
जलभराव का सबसे भयानक और चौंकाने वाला नजारा शहर की मशहूर 'कल्चर स्ट्रीट' पर देखने को मिला। यह वह सड़क है जहां आम तौर पर लोग शाम के समय टहलने और सुकून के कुछ पल बिताने के लिए आते हैं। लेकिन रविवार की बारिश के बाद यह पूरी सड़क किसी वॉटर पार्क जैसी दिखने लगी थी। हालात इतने बदतर थे कि सड़क पूरी तरह से नदी-नालों में तब्दील हो चुकी थी, और लोग घुटने तक भरे पानी में अपने पैर रखने के लिए सूखी जमीन तलाशते नजर आए। जलस्तर इतना अधिक था कि लोगों का कहना था कि इस सड़क पर अब आसानी से नाव चलाई जा सकती है। राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा क्योंकि कई दोपहिया और चार पहिया गाड़ियां बीच सड़क पर पानी में दम तोड़ गईं। बेबस नागरिक अपनी बंद पड़ी गाड़ियों को घसीटते हुए ले जाने को मजबूर दिखे। वहीं, कई स्थानीय लोगों ने इस बदहाली का वीडियो अपने मोबाइल में कैद किया और 'स्मार्ट सिटी' के खोखले वादों पर जमकर तंज कसा।
नालों की सफाई का बजट पानी में बहा
नगर निगम द्वारा फाइलों में किए गए दावों और धरातल की हकीकत के बीच जमीन-आसमान का अंतर साफ तौर पर देखा जा सकता था। वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर अधिकारी शहर की व्यवस्था को फर्स्ट क्लास बता रहे थे, लेकिन जमीन पर शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल साबित हुआ। प्रशासन ने मानसून से पहले नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करने का दावा किया था। लेकिन सड़कों पर हुए इस भीषण जलभराव को देखकर जनता को यही लगा कि सफाई के नाम पर खर्च किया गया यह लाखों का बजट बारिश के पानी के साथ ही बह गया है।
रांझी, गंगानगर और मदन महल का बुरा हाल
प्रशासनिक विफलता का यह नजारा सिर्फ कल्चर स्ट्रीट तक ही सीमित नहीं था। जबलपुर के रांझी, गंगानगर और मदन महल जैसे कई अन्य पॉश और बेहद व्यस्त इलाकों का भी यही बुरा हाल रहा। इन रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में नालियां पूरी तरह से उफान पर थीं और गंदा पानी सड़कों पर तेजी से बह रहा था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि नालियों का उफनता हुआ पानी लोगों के घरों के अंदर घुसने को बेताब था, जिससे निवासियों में अफरा-तफरी मच गई और वे अपना सामान बचाने में जुट गए।
आगामी मानसून सीजन को लेकर जनता में खौफ
महज एक घंटे की इस बारिश ने आम जनता के मन में पूरे मानसून सीजन को लेकर एक गहरा डर पैदा कर दिया है। शहरवासी अब दहशत में हैं और यह सवाल पूछ रहे हैं कि जब मानसून की शुरुआत में एक घंटे की बारिश ने शहर का यह हाल कर दिया है, तो आने वाले महीनों में जब लगातार बारिश होगी, तब वे कैसे अपना जीवन बिताएंगे। स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बावजूद जबलपुर की जनता आज भी जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से बुरी तरह जूझ रही है। अब हर किसी के मन में यही बड़ा सवाल है कि क्या नगर निगम प्रशासन अब भी अपनी गहरी नींद से जागेगा और इस चरमराई व्यवस्था को सुधारेगा, या फिर जबलपुर की जनता को हर साल इसी तरह इन तथाकथित 'स्मार्ट' समस्याओं के बीच अपना जीवन गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।




















