मध्य प्रदेश की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग यानी EOW की जबलपुर यूनिट ने बालाघाट जिले में लोक निर्माण विभाग यानी PWD में पदस्थ एग्जीक्यूटिव इंजीनियर कमल किशोर सिंगारे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का एक बड़ा मामला पकड़ा है। जांच अधिकारियों का अनुमान है कि उनकी कुल चल और अचल संपत्ति ग्यारह करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है, जो उनकी वैध कमाई का लगभग दो सौ गुना है। अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अकूत संपत्ति जुटाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद EOW की जबलपुर शाखा ने गुरुवार की सुबह छह बजे बालाघाट में स्थित उनके सरकारी आवास पर अचानक दबिश दी। जब जांच दल वहां पहुंचा, तब इंजीनियर गहरी नींद में सो रहे थे, जिन्हें अधिकारियों ने उठाया और तुरंत तलाशी की औपचारिकताएं शुरू कर दीं। इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
एक साथ कई ठिकानों पर दबिश
भ्रष्टाचार, ठेकेदारों को बेवजह परेशान करने और पदीय अधिकारों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों की जांच के दायरे में आते हुए EOW की तीन अलग-अलग टीमों ने गुरुवार सुबह ठीक छह बजे बालाघाट स्थित सरकारी बंगले के साथ-साथ छिंदवाड़ा और भोपाल में उनके निजी मकानों पर भी एक साथ छापेमारी की। बालाघाट के सरकारी आवास की तलाशी के दौरान टीम ने ढाई लाख रुपये नकद और करीब पच्चीस लाख रुपये मूल्य की एक बिल्कुल नई स्कॉर्पियो SUV गाड़ी अपने कब्जे में ली। प्रारंभिक छानबीन पूरी होने के बाद इंजीनियर सिंगारे को बालाघाट से छिंदवाड़ा ले जाया गया, जहां जांचकर्ताओं ने उनके तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज कई बेनामी संपत्तियों का पर्दाफाश किया।
करोड़ों की संपत्ति और बेनामी निवेश का जखीरा
EOW के अधिकारियों के मुताबिक कमल किशोर सिंगारे और उनके परिजनों के नाम पर भारी-भरकम संपत्ति का जाल फैला हुआ है। इसमें करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य के मकान और भूखंड, डेढ़ करोड़ रुपये की कीमत वाला एक कमर्शियल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, साढ़े सात लाख रुपये नकद, बावन लाख रुपये के सोने के जेवरात, एक लाख बीस हजार रुपये के चांदी के आभूषण, उनचास लाख रुपये की कीमत वाली दो चार-पहिया गाड़ियां, चार लाख रुपये कीमत की तीन दो-पहिया गाड़ियां और एक करोड़ रुपये मूल्य का लग्जरी घरेलू सामान शामिल है। इसके अलावा भोपाल में भी लगभग दो करोड़ रुपये की अचल संपत्ति हाथ लगी है। जांच दल ने सिंगारे और उनके परिवार के सदस्यों के कुल बारह बैंक खातों का पता लगाया है, जिनमें जमा रकम, बैंक लॉकर और अन्य गुप्त वित्तीय निवेशों की गहराई से जांच की जा रही है। एक फार्महाउस समेत कुछ अन्य ठिकानों पर तलाशी का काम उस समय भी जारी था और अधिकारी तमाम दस्तावेजों तथा कागजातों को खंगाल रहे थे।
कानूनी कार्रवाई और धाराएं
प्राप्त शुरुआती साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर EOW ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के संशोधित प्रावधानों यानी धारा 13(1)(b) और 13(2) के अंतर्गत औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि छानबीन पूरी होने के बाद वित्तीय अनियमितता के इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस तरह की भ्रष्ट गतिविधियों के खिलाफ राज्य में लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।



















