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अल नीनो की मार से मध्य प्रदेश में बारिश घटने का डर, मानसून पिछड़ा तो किसानों की बढ़ी बेचैनीमध्य प्रदेश
2 घंटे पहले· 2

अल नीनो की मार से मध्य प्रदेश में बारिश घटने का डर, मानसून पिछड़ा तो किसानों की बढ़ी बेचैनी

मध्य प्रदेश में मानसून तय वक्त से करीब 11 दिन लेट है और अल नीनो के असर से इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है, जिससे खरीफ की फसल और किसानों की चिंता बढ़ गई है।

Rajesh KumarRajesh KumarSenior Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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जून का महीना आधे से ज्यादा बीत चुका है और बुंदेलखंड के सागर में अब तक सिर्फ ढाई इंच बारिश ही दर्ज हो पाई है। प्री मानसून की हलचल जरूर शुरू हो गई है, लेकिन मानसून अपने तय समय से करीब 11 दिन पिछड़ कर चल रहा है। ऊपर से मौसम विभाग ने अल नीनो के चलते इस साल कम बारिश की आशंका जता दी है, जिसने खेती पर निर्भर किसानों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अल नीनो है क्या और इसका असर आपकी फसल पर कितना पड़ेगा।

सागर कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव इसे आसान भाषा में समझाते हैं। उनके मुताबिक प्रशांत महासागर में अल नीनो प्रभाव के कारण समुद्र के बीच का पानी गर्म हो जाता है। इसका सीधा असर पूर्वी तट और दक्षिण से लेकर पश्चिम तक चलने वाले मानसून पर पड़ता है। इसी वजह से आईएमडी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने आशंका जताई है कि अल नीनो के चलते इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश होगी। यही अल नीनो इफेक्ट कहलाता है और इसी के चलते बारिश घटने की संभावना बन रही है।

मध्य प्रदेश में 11 दिन देरी से पहुंचा मानसून

डॉक्टर यादव बताते हैं कि अगर पानी कम गिरा तो सबसे पहले बुवाई का समय और पूरा मौसम चक्र गड़बड़ा जाएगा। मानसून पहले ही लेट हो चुका है और बुंदेलखंड के 60 से 70 फीसदी किसान सीधे बारिश के भरोसे खेती करते हैं। आम तौर पर यहां मानसून 15 जून से 21 जून के बीच आ जाता है। सोयाबीन की बुवाई की बात करें तो ऐसी हालत में किसान पहले ही पिछड़ जाएंगे।

दूसरी बड़ी दिक्कत यह है कि अल नीनो तापमान को काफी ऊपर बनाए रखता है। बीच-बीच में सूखे का दौर बढ़ता है और मुमकिन है कि 15 से 20 दिन तक एक बूंद पानी न गिरे। ऐसे में फसलों पर सूखे का असर पड़ेगा, पॉलिनेशन घटेगा, फलियां कम बनेंगी और कीट-रोगों का प्रकोप बढ़ जाएगा। इससे पूरा मौसम चक्र बिगड़ता है, और खरीफ लेट हुई तो उसका असर आगे रबी सीजन पर भी साफ दिखाई देगा।

सोयाबीन, मक्का और उड़द वाले किसान रखें ध्यान

एक्सपर्ट की सलाह है कि सोयाबीन, मक्का और उड़द की खेती करने वाले किसान इस वक्त खास सावधानी बरतें। सबसे जरूरी बात यह है कि बुवाई तभी करें जब मानसून आने पर 75 से 100 एमएम तक पानी गिर जाए। किसानों को तीन बातें जरूर गांठ बांध लेनी चाहिए। पहली, कम अवधि की फसल लगाएं। अगर सोयाबीन लगाना है तो उसे 10 जुलाई तक लगा दें और 90 दिन वाली वैरायटी का इस्तेमाल करें। दूसरी, बीज उपचार जरूर करें। और तीसरी, पीएसबी और राइजोबियम कल्चर से बीज का उपचार करें।

चार महीने में 1230 एमएम बारिश का गणित

अल नीनो का सबसे ज्यादा खतरा जिन जिलों पर बताया जा रहा है, उनमें धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा, खंडवा और इनके आसपास के इलाके शामिल हैं। सागर मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक विवेक छलोत्रे बताते हैं कि सागर में मानसून सीजन के चार महीनों में 1230 एमएम बारिश होती है। निदेशालय की ओर से 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है, यानी इस बार करीब 130 एमएम बारिश कम हो सकती है।

छलोत्रे के मुताबिक आंकड़े भी डराने वाले हैं। सागर में जब-जब नौ बार अल नीनो देखा गया है, उनमें से छह बार जिले में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। शुरुआत में तो पानी गिरता रहेगा, लेकिन बाद के महीनों में बारिश घटेगी और इसका सीधा असर फसलों पर पड़ सकता है। इसी वजह से किसानों को 80 से 85 दिन वाली वैरायटी इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा मौसम विभाग के मोबाइल ऐप दामिनी और मेघदूत भी किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

इसका आप पर असर

  • भारत में: अल नीनो के चलते इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश का अनुमान है, जिससे खरीफ की पैदावार घट सकती है और बारिश पर निर्भर किसानों की लागत व जोखिम दोनों बढ़ेंगे।
  • मध्य प्रदेश में: धार, झाबुआ, सागर, छतरपुर समेत कई जिलों के किसान तभी बुवाई करें जब 75 से 100 एमएम पानी गिर जाए, और सोयाबीन के लिए 90 दिन वाली कम अवधि की वैरायटी 10 जुलाई तक लगा लें।

सवाल-जवाब

मध्य प्रदेश में मानसून कितने दिन लेट है?
मानसून अपने तय समय से करीब 11 दिन पिछड़ कर चल रहा है। आम तौर पर यहां यह 15 से 21 जून के बीच आ जाता है।
अल नीनो की वजह से कितनी कम बारिश का अनुमान है?
आईएमडी और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक अल नीनो के चलते इस बार करीब 10 फीसदी कम बारिश हो सकती है।
सागर में मानसून सीजन में कितनी बारिश होती है?
सागर में चार महीने के मानसून सीजन में 1230 एमएम बारिश होती है, और इस बार करीब 130 एमएम कम बारिश का अनुमान है।
किसानों को बुवाई कब करनी चाहिए?
किसानों को सलाह है कि बुवाई तभी करें जब मानसून आने पर 75 से 100 एमएम तक पानी गिर जाए।
सोयाबीन की बुवाई के लिए क्या सलाह है?
सोयाबीन को 10 जुलाई तक लगा लें और 90 दिन वाली कम अवधि की वैरायटी का इस्तेमाल करें, साथ ही बीज उपचार जरूर करें।
अल नीनो का सबसे ज्यादा खतरा किन जिलों पर है?
धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा, खंडवा और आसपास के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
किसानों के लिए कौन से मोबाइल ऐप मददगार हैं?
मौसम विभाग के मोबाइल ऐप दामिनी और मेघदूत किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
#मध्य प्रदेश#अल नीनो#मध्य प्रदेश मानसून#खरीफ फसल#सोयाबीन बुवाई#सागर बारिश#किसान सलाह#मौसम विभाग

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