मध्य प्रदेश के स्कूलों में ई-अटेंडेंस का नया फरमान: अब 'हमारे शिक्षक' ऐप पर छुट्टी के समय लॉगआउट अनिवार्यमध्य प्रदेश
4 घंटे पहले· 2

मध्य प्रदेश के स्कूलों में ई-अटेंडेंस का नया फरमान: अब 'हमारे शिक्षक' ऐप पर छुट्टी के समय लॉगआउट अनिवार्य

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने 'हमारे शिक्षक' ऐप में बदलाव करते हुए शिक्षकों के लिए स्कूल परिसर से ही लॉगआउट करना अनिवार्य कर दिया है। तकनीकी समस्याओं के बीच सरकार ने यह भरोसा भी दिलाया है कि नेटवर्क या सर्वर की खराबी से किसी का वेतन नहीं कटेगा।

मध्य प्रदेश में कार्यरत सरकारी शिक्षकों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की शत-प्रतिशत मौजूदगी सुनिश्चित करना और समय पर आने-जाने की अनुशासनहीनता को खत्म करना है। इस दिशा में डिजिटल ई-अटेंडेंस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। अब शिक्षक सुबह स्कूल पहुंचकर केवल हाजिरी लगाकर नहीं जा पाएंगे।

ऐप में तकनीकी बदलाव

विभाग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अपने आधिकारिक 'हमारे शिक्षक' मोबाइल ऐप को अपडेट किया है। इस नए अपडेट के साथ कई तकनीकी नियम जोड़े गए हैं। अब अनिवार्य कर दिया गया है कि शिक्षक को स्कूल पहुंचने पर लॉगिन तो करना ही होगा, साथ ही स्कूल की छुट्टी होने पर भी उसे स्कूल परिसर के भीतर रहकर ही लॉगआउट करना होगा।

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जियो-लोकेशन का नया नियम

यदि कोई शिक्षक निर्धारित जियो-लोकेशन सीमा के बाहर या सीधे अपने घर से लॉगआउट करने की कोशिश करता है, तो उसकी लाइव लोकेशन सीधे शिक्षा विभाग के पास पहुंच जाएगी। विभागीय सर्वे में यह पाया गया था कि करीब 50% शिक्षक छुट्टी के समय स्कूल परिसर में नहीं होते थे, जिससे यह स्पष्ट था कि वे समय से पहले ही स्कूल छोड़ रहे थे।

शिक्षकों का विरोध

सरकार के इस नए फैसले को लेकर शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी है। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में काम कर रहे शिक्षकों का कहना है कि यह नियम व्यावहारिक नहीं है। उन क्षेत्रों में परिवहन के साधन सीमित हैं, जिसके कारण उन्हें समय से पहले निकलने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

तकनीकी खामियां और नेटवर्क की समस्या

शिक्षकों का कहना है कि 'हमारे शिक्षक' ऐप में कई तकनीकी त्रुटियां और सर्वर एरर की समस्याएं हैं। कभी-कभी तो तकनीकी खराबी की वजह से ऐप शिक्षकों की लोकेशन को 600 मीटर से लेकर 8,000 किलोमीटर तक दूर दिखाता है, जिससे उनकी हाजिरी ही नहीं लग पाती है। बैतूल, सतना, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट और नीमच जैसे क्षेत्रों में डिजिटल उपस्थिति 95% से अधिक है, जबकि शहरों में यह स्थिति अलग है। बारिश के मौसम में नेटवर्क की कमी के चलते शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल में नेटवर्क ढूंढने में व्यस्त रहते हैं।

वेतन कटौती पर बड़ी राहत

विवादों के बीच शिक्षा आयुक्त ने शिक्षक प्रतिनिधियों को राहत दी है। बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि सर्वर डाउन होने या नेटवर्क खराब रहने जैसी किसी तकनीकी समस्या के कारण हाजिरी दर्ज नहीं होती है, तो शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा। विभाग का कहना है कि इसका मकसद अनुशासन लाना है, न कि आर्थिक नुकसान करना। यदि जून या जुलाई में अटेंडेंस न होने के कारण किसी का वेतन कटा है, तो उसे दोबारा जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सवाल-जवाब

ई-अटेंडेंस के लिए क्या नया नियम लागू हुआ है?
अब शिक्षकों को सुबह लॉगिन करने के साथ-साथ स्कूल की छुट्टी होने पर स्कूल परिसर के भीतर से ही लॉगआउट करना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या ऐप में तकनीकी खराबी होने पर वेतन कटेगा?
नहीं, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन होने या खराब नेटवर्क की वजह से हाजिरी दर्ज नहीं होती है, तो शिक्षक का वेतन नहीं काटा जाएगा।
शिक्षक संगठनों का इस नियम के बारे में क्या कहना है?
शिक्षक संगठनों का मानना है कि यह नियम व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी कमी है और परिवहन की सीमित सुविधाओं के कारण शिक्षकों को जल्दी निकलना पड़ता है।
क्या जून-जुलाई में कटे हुए वेतन का कोई समाधान है?
हां, विभाग ने आदेश दिए हैं कि यदि पहले अटेंडेंस न होने के कारण किसी का वेतन काटा गया है, तो उसका परीक्षण कर उसे दोबारा जारी किया जाएगा।

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