मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर को जोड़ने वाला नया फोरलेन मार्ग अब राहगीरों के लिए बड़ी आफत का सबब बन चुका है। आगामी उज्जैन सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत तैयार किया जा रहा ओंकारेश्वर-मोरटक्का फोरलेन कागजों पर भले ही एक आधुनिक और सुगम यातायात परियोजना का हिस्सा नजर आता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए यह पूरी सड़क अब एक बेहद खतरनाक ब्लैक स्पॉट में तब्दील हो चुकी है। घने जंगलों और तेजी से विकसित हो रहे रिहायशी इलाकों के बीच से गुजरने वाली इस सड़क पर बने जानलेवा मोड़ हादसों को सीधा आमंत्रण दे रहे हैं।
एस-आकार के खतरनाक घुमाव और कम दृश्यता
इस नवनिर्मित फोरलेन मार्ग की सबसे बड़ी तकनीकी खामी इसका एस-आकार का होना है। सड़क का डिजाइन इस तरह बनाया गया है कि कई जगहों पर बेहद तीखे घुमाव और ब्लाइंड स्पॉट बन गए हैं। इसके कारण वाहन चालकों को सामने से आने वाली गाड़ियां समय रहते दिखाई नहीं देती हैं। पहाड़ी और जंगलों वाले इस इलाके में सड़क अचानक इस तरह मुड़ती है कि आगे का रास्ता पूरी तरह अदृश्य हो जाता है। इस वजह से तेज रफ्तार भारी वाहनों, दोपहिया चालकों और पैदल यात्रियों के लिए इस मार्ग से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। रोजाना सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यहां से यात्रा करने को मजबूर हैं।
सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी
इस प्रमुख मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना चिंता को और अधिक बढ़ा देता है। सड़क पर न तो आवश्यक चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही रात के समय मार्गदर्शन करने वाले रिफ्लेक्टर या संकेतक दिखाई देते हैं। मोड़ों पर दृश्यता अत्यंत कम होने की वजह से सामने से अचानक आने वाले किसी भी वाहन का अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ऐसे संवेदनशील मोड़ों पर ओवरटेक करने की कोशिश करना या अचानक ब्रेक लगाना अक्सर भीषण दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। इस मार्ग को हाई-स्पीड ट्रैफिक यानी तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के अनुकूल बनाया गया है, लेकिन इसके किनारे तेजी से बस रही बस्तियों और बढ़ती जनसख्या को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा संबंधी आवश्यक बदलाव नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि यह सड़क अब स्थानीय आबादी के लिए खौफ का दूसरा नाम बन गई है।
डिज자인 पर आपत्ति और अधिकारियों का दावा
इस परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान ही इसके त्रुटिपूर्ण डिजाइन पर सवाल उठने लगे थे। लगभग दो साल पहले PWD के मुख्य अभियंता ने इस फोरलेन के डिजाइन को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद कुछ मामूली बदलाव भी किए गए थे। इसके बावजूद सड़क की मुख्य खामियां अभी भी जस की तस बनी हुई हैं। सड़क के दोनों किनारों पर बनाई गई ऊंची नालियां और सुरक्षा दीवारों की अनुपस्थिति भविष्य में किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर PWD के कार्यपालन यंत्री नरेंद्र सिंह मंडलोई ने स्पष्ट किया है कि तीखे घुमावों को लेकर पूर्व में भी तकनीकी टीम द्वारा जांच की जा चुकी है और तात्कालिक रूप से कोई बड़ा खतरा सामने नहीं आया है। हालांकि, जनभावनाओं और सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने जल्द ही एक बार फिर से इस पूरे मार्ग की जांच कराने का आश्वासन दिया है ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके.
तीर्थयात्रियों और ग्रामीणों की तीखी मांग
धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा से खिलवाड़ स्थानीय लोगों के आक्रोश का कारण बन रहा है। ग्रामीणों और नियमित यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस ब्लैक स्पॉट को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाया जाए। मोड़ों को चौड़ा करने, रंबल स्ट्रिप्स लगाने और पर्याप्त संकेतक लगाने जैसे कदम तुरंत उठाए जाने चाहिए। यदि समय रहते इन तकनीकी खामियों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो सिंहस्थ-2028 के दौरान यहां भारी भीड़ के दबाव में गंभीर हादसे हो सकते हैं। आस्था की इस नगरी में बुनियादी ढांचे की यह गंभीर कमी अब व्यापक चिंता का विषय बन चुकी है।



















