80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जहां सरकारी स्कूलों में उत्सव का माहौल होना चाहिए था, वहीं एक शासकीय विद्यालय में भारी प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। पावई थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मल्लपुरा गांव स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय में ध्वजारोहण के बाद बच्चों को बांटे गए लड्डुओं में फफूंद और इल्लियां पाई गईं। दूषित मिठाई खाते ही कई छोटे बच्चे बीमार हो गए और उन्हें उल्टियां होने लगीं। इस बेहद दुखद घटना के बाद जब पीड़ित पिता शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो पुलिसकर्मियों ने उनकी मदद करने के बजाय उनके साथ मारपीट की और थाने में बैठा लिया।
कीड़े लगे लड्डू देखकर बच्चों ने फेंकी मिठाई
स्वतंत्रता दिवस समारोह के उपलक्ष्य में शासन की ओर से सरकारी स्कूलों में विशेष भोज की व्यवस्था की गई थी। इस विशेष मेनू में विद्यार्थियों के लिए पूरी, सब्जी, खीर और मिष्ठान परोसना तय किया गया था। मल्लपुरा गांव के शासकीय माध्यमिक स्कूल में जब मिठाई वितरण शुरू हुआ, तो बच्चों को दिए गए लड्डुओं की हालत बेहद खराब थी। लड्डू पूरी तरह से सड़ चुके थे, उन पर सफेद फफूंद लगी हुई थी और भीतर इल्लियां रेंग रही थीं।
जैसे ही बड़ी कक्षा के बच्चों ने लड्डुओं में कीड़े और फफूंद देखे, उन्होंने तुरंत मिठाई फेंक दी। हालांकि, सभी विद्यार्थियों को मिठाई नहीं परोसी गई थी, लेकिन जिन्हें दी गई उनमें से अधिकांश ने उसे दूर फेंक दिया। इसके विपरीत, कुछ मासूम छोटे बच्चे मिठाई देखकर खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने जल्दबाजी में लड्डू खा लिए।
मासूमों की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती
सड़े हुए लड्डू खाते ही छोटे बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते बच्चों को पेट दर्द और तेज उल्टियां होने लगीं। बच्चों को तड़पता देख घबराए परिजन तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल की ओर भागे। बीमार बच्चों को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
थाने पहुंचे पीड़ित पिता के साथ पुलिस ने की मारपीट
दो बीमार बच्चों के मजदूर पिता अपने मासूमों को न्याय दिलाने और उनका समुचित इलाज कराने की आस लेकर पावई पुलिस थाने पहुंचे। पीड़ित पिता का उद्देश्य था कि बच्चों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिले और इस तरह का जहरीला खाना परोसने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
लेकिन पुलिस थाने में मदद मिलने के बजाय पीड़ित पिता को प्रताड़ना सहनी पड़ी। पीड़ित पिता के अनुसार, थाने में तैनात पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उनके साथ बुरी तरह मारपीट की। मारपीट करने के बाद पुलिस ने उन्हें थाने के भीतर ही अवैध रूप से बैठाकर रखा। इस बीच अन्य परिजन बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। काफी देर तक बैठाकर रखने के बाद अंततः पुलिस ने पीड़ित पिता को थाने से जाने दिया।
मामला दबाने के लिए रिश्वत देने की कोशिश
घटना के सामने आने के बाद मामले को दबाने के प्रयास भी शुरू हो गए। बीमार बच्चों की मां ने बताया कि देर शाम उनके पास एक आशा कार्यकर्ता का फोन आया था। आशा कार्यकर्ता ने पूरे मामले को रफा-दफा करने और शिकायत वापस लेने के बदले पैसों की पेशकश की। हालांकि, स्वाभिमानी परिजनों ने इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया। बच्चों की मां ने साफ कहा कि वे अपने मासूम बच्चों की जिंदगी और सेहत की कीमत पर किसी भी तरह का पैसा स्वीकार नहीं करेंगे।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने लिया संज्ञान
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई गई थी। चाइल्ड हेल्पलाइन से सूचना मिलने के बाद चाइल्ड वेलफेयर टीम हरकत में आई और मामले को बेहद गंभीरता से लिया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारी तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती बच्चों तथा उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। कमेटी ने आश्वासन दिया है कि संबंधित प्रशासनिक विभागों को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।





















