भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो के दोबारा सक्रिय और मजबूत होने से भारतीय उपमहाद्वीप पर मॉनसून का संकट गहराने लगा है। जुलाई और अगस्त के दौरान मॉनसून की बारिश से मिली अस्थायी राहत के बाद अब इस जलवायु पैटर्न के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में सूखे और कम बारिश की स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। मौसमी गतिविधियों में आ रहे इस बदलाव के कारण कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा है।
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पूर्वानुमान में भारी कटौती
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट वेदर ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश को लेकर अपने आंकड़े जारी किए हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक इस पूरे मॉनसून सीजन में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत की केवल 85 प्रतिशत ही रहने की संभावना जताई गई है। अगस्त का आधा महीना और पूरा सितंबर बाकी रहते हुए एल नीनो के बढ़ते असर के चलते देश में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
इससे पहले अप्रैल महीने में जारी किए गए शुरुआती अनुमान में स्काइमेट ने चार महीनों के पूरे मॉनसूनी सीजन के दौरान औसत बारिश 94 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। हालांकि हालिया वैश्विक समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। एल नीनो की वापसी और उसके लगातार ताकतवर होने से बारिश के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
अगस्त और सितंबर में बारिश की भारी कमी का अंदेशा
स्काइमेट के हालिया आकलन के अनुसार अगस्त का महीना सामान्य औसत से लगभग 16 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त होने का अनुमान है। इसके अलावा सितंबर महीने में भी स्थिति में सुधार की उम्मीद बेहद कम है। मजबूत होते एल नीनो और हिंद महासागर डिपोल के कमजोर पड़ने के कारण सितंबर में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इन दोनों मौसमी कारकों के एक साथ प्रभावी होने से देश के विस्तृत क्षेत्रों में पानी की किल्लत और सूखे की नौबत आ सकती है।
मौसम विभाग के पिछले अनुमान और मौजूदा मैदानी आंकड़े
सरकारी मौसम एजेंसी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल अप्रैल में मॉनसून बारिश सामान्य औसत का 92 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था। बाद में जून महीने में इस आंकड़े को संशोधित कर 90 प्रतिशत कर दिया गया था और मॉनसून में कमी रहने की संभावना 60 प्रतिशत बताई गई थी। जून के बाद से भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से पूरे सीजन का कोई नया संशोधित पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है।
मैदानी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 17 अगस्त के दौरान पूरे देश में कुल 518.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत सामान्य परिस्थितियों में इस अवधि के दौरान 596.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस प्रकार देश भर में औसतन 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। अगस्त महीने के दौरान यह कमी 11 से 13 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि जून के अंत में यह बारिश घाटा 40 प्रतिशत तक पहुंच गया था जो जुलाई में अच्छी बारिश के कारण सुधरकर 13 प्रतिशत पर आ गया था। परंतु अगस्त के दूसरे पखवाड़े में मॉनसून एक बार फिर सुस्त पड़ गया है। हालांकि कुछ नदियों में जलस्तर बढ़ने से स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसे हालात बने हैं लेकिन अधिकांश क्षेत्र वर्षा की कमी से प्रभावित हैं।
समुद्री धाराएं और एल नीनो का बढ़ता प्रभाव
स्काइमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने बताया कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में वायुमंडलीय और समुद्री धाराओं के बीच मजबूत जुड़ाव देखा जा रहा है। यही वजह है कि एक ताकतवर एल नीनो के विकसित होने की संभावना काफी बढ़ गई है। उनके अनुसार यह समुद्री मौसमी तंत्र सितंबर की शुरुआत में मजबूत श्रेणी से बढ़कर बेहद मजबूत श्रेणी में प्रवेश कर सकता है जिससे आने वाले दिनों में देश के मौसम पर इसका विपरीत असर और तीखा हो जाएगा।



















