श्योपुर जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपनी ही जमीन वापस पाने के लिए 60 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर चढ़कर पूरे 32 घंटे गुजार दिए। श्यार्दे गांव की रहने वाली रमाबाई सरकारी दूरसंचार कंपनी के इस टावर के सबसे ऊपरी छोर पर डटी रहीं, जबकि नीचे जमीन पर उनके परिवार और गांव वाले धरने पर बैठे रहे। लंबी बातचीत और प्रशासन के ठोस आश्वासन के बाद ही वह आखिरकार सुरक्षित नीचे उतरीं।
जमीन पर कब्जे की शिकायत पर नहीं हुई सुनवाई
रमाबाई का आरोप है कि जिस जमीन का पट्टा उनके नाम पर दर्ज है, उस पर इलाके के एक दबंग व्यक्ति ने अवैध कब्जा जमा रखा है। वह लंबे समय से प्रशासन के सामने यह मांग रखती आ रही थीं कि उनकी निजी पट्टे वाली जमीन को इस कब्जे से मुक्त कराया जाए, लेकिन बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कब्जाधारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उल्टा महिला को ही बेदखल करने पहुंचा प्रशासन
हैरानी की बात यह रही कि प्रशासन ने पट्टे वाली जमीन पर काबिज दबंग के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, उस सरकारी जमीन से रमाबाई को ही बेदखल करने की तैयारी कर ली, जिस पर वह फिलहाल रह रही हैं। इसी एकतरफा कार्रवाई से नाराज होकर रमाबाई विरोध में टावर पर चढ़ गईं। उनकी मांग बिल्कुल साफ थी, जब तक उनकी पट्टे वाली जमीन से दबंग का कब्जा नहीं हटाया जाता, तब तक वह सरकारी जमीन खाली नहीं करेंगी।
बिना अन्न-जल ग्रहण किए बीते 32 घंटे
तेज गर्मी और भारी तनाव के बीच रमाबाई ने टावर के ऊपरी हिस्से पर पूरे 32 घंटे बिताए और इस दौरान उन्होंने न कुछ खाया और न ही पानी पिया। टावर के नीचे उनके परिजन और गांव के अन्य लोग भी लगातार धरने पर डटे रहे और प्रशासन के जवाब का इंतजार करते रहे। परिजनों ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि प्रदर्शन के दौरान भूख-प्यास या किसी और वजह से रमाबाई को कुछ भी नुकसान हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी।
प्रशासन के दखल के बाद नीचे उतरीं रमाबाई
मामला तूल पकड़ता देख प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे और रमाबाई को सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाने में जुट गए। करीब 32 घंटे की लंबी मशक्कत के बाद प्रशासन ने फिलहाल उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई रोक दी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही विवाद से जुड़े दोनों पक्षों को साथ बैठाकर बातचीत कराई जाएगी और उनकी पट्टे वाली जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। यही आश्वासन मिलने के बाद रमाबाई आखिरकार टावर से नीचे उतरने को राजी हुईं।



















