मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में कानूनी शिकंजा कस दिया है। एजेंसी ने मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत में अशोक कुमार एकनाथ खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य सहयोगियों के खिलाफ औपचारिक रूप से अभियोजन शिकायत दर्ज कराई है। यह कदम उस लंबी जांच की परिणति है, जिसमें मुख्य आरोपी पर लोगों की धार्मिक श्रद्धा का शोषण करने और अवैध तरीके से करोड़ों रुपए जमा करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
संपत्तियों की बड़ी कुर्की
जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा-5 के तहत 15 जुलाई को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इसके तहत अशोक कुमार खरात, जो 'कैप्टन' या 'बंधु बाबा' के नाम से भी जाने जाते हैं, उनके और उनके परिजनों के नाम पर दर्ज करीब 19.20 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।
यह कार्रवाई इससे पहले हुई छापेमारी का विस्तार है। अप्रैल और मई 2026 के दौरान, ईडी ने पीएमएलए की धारा-17 के अंतर्गत खरात और उनके साथियों से संबंधित विभिन्न ठिकानों, बैंक लॉकरों और वाहनों पर तलाशी अभियान चलाया था। उस दौरान लगभग 17.70 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गई थीं। यदि इन दोनों चरणों की कार्रवाइयों को जोड़ें, तो अब तक इस मामले में कुल 36.90 करोड़ रुपए की संपत्तियों को ईडी अपने नियंत्रण में ले चुकी है।
क्या था ठगी का तरीका?
ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत महाराष्ट्र के विभिन्न थानों जैसे सरकार वाडा, शिरडी, सिन्नर और राहाता में दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। जांच में खुलासा हुआ कि अशोक कुमार एकनाथ खरात लोगों की आस्था का फायदा उठाने में माहिर था। वह खुद को भगवान शिव का अवतार और अलौकिक शक्तियों का स्वामी बताकर भोले-भाले भक्तों को अपना शिकार बनाता था।
वह लोगों से 'अवतार पूजा' करवाने, जटिल बीमारियों को ठीक करने, जीवन की बाधाएं दूर करने और व्यापार में सफलता दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने केवल धोखाधड़ी का ही नहीं, बल्कि आपराधिक धमकी और जबरन वसूली का भी सहारा लिया था।
मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए आरोपी ने एक जटिल आर्थिक तंत्र खड़ा किया था। जांच में सामने आया कि उसने अपराध से मिले पैसे को छिपाने के लिए दो सहकारी क्रेडिट सोसायटियों का दुरुपयोग किया। इस काम में एक कर्मचारी की मिलीभगत से अनेक बैंक खातों का संचालन बेहद धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से किया गया। एजेंसी ने पाया कि भारी मात्रा में नकदी को छिपाने के लिए कई बेनामी खातों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें निवेश की मैच्योरिटी से प्राप्त राशि का भी घालमेल किया गया था।
इन पैसों को खरात के भरोसेमंद साथियों के पास रखा जाता था, ताकि असली स्रोत का पता न चल सके। बाद में इस धन का उपयोग नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई जैसे शहरों में परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।
जेल में है आरोपी
कानूनी कार्रवाई के अगले कदम के रूप में, ईडी ने 19 मई को पीएमएलए की धारा-19 के तहत अशोक कुमार एकनाथ खरात को गिरफ्तार कर लिया था। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय अभी भी इस पूरे रैकेट के अन्य पहलुओं और इससे जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रहा है, ताकि नेटवर्क को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके।




















