संसद का आगामी मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही भारतीय राजनीति का पारा चढ़ने लगा है। एक तरफ जहां विपक्षी दल एकजुट होकर विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ गठबंधन ने एक व्यापक विधायी कार्ययोजना तैयार की है। सत्र के आरंभ होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ चुकी है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के भीतर आंतरिक उठापटक की स्थितियां बनी हुई हैं, जिससे सत्तापक्ष संख्या बल के मामले में काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि सरकार इस सत्र में दो-तिहाई बहुमत जुटाकर कुछ ऐतिहासिक कदम उठा सकती है। हालांकि, सबसे बड़ा सस्पेंस महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर बना हुआ है, जिन पर सरकार ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
सत्र का विधायी एजेंडा और महत्वपूर्ण विधेयकों की सूची
इस मानसून सत्र के दौरान सरकार संसद के पटल पर आठ महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की तैयारी कर चुकी है। इन विधेयकों में से कुछ नए कानून बनाने के लिए लाए जा रहे हैं, जबकि कुछ पहले से लागू अध्यादेशों का स्थान लेंगे। इन विधेयकों की सूची इस प्रकार है
- आयकर संशोधन विधेयक, 2026: यह विधेयक पूर्व में जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेने के लिए लाया जा रहा है, जिसके माध्यम से कर व्यवस्था में सुधार किए जाएंगे।
- सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026: देश की सबसे बड़ी अदालत में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए जजों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है।
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक के जरिए देश के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी ताकि इसके अपमान को रोका जा सके।
- जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026: इस कानून के तहत जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में होने वाली देरी पर लगने वाले जुर्माने और नियमों को और अधिक कड़ा बनाया जाएगा।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास संशोधन विधेयक, 2026: MSME क्षेत्र के उद्योगों को वित्तीय राहत देने और उनके लिए व्यापार को आसान बनाने के उद्देश्य से इसमें बड़े सुधार प्रस्तावित हैं।
- विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026: विदेशों से मिलने वाले चंदे के इस्तेमाल पर निगरानी को और सख्त करने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है। इसे पहली बार 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था।
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के तहत UGC, AICTE और NCTE जैसी पुरानी नियामक संस्थाओं को समाप्त कर एक नई एकीकृत नियामक संस्था का गठन किया जाएगा। इस विधेयक को 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश करने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था।
वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा और कड़े दंड के प्रावधान
सत्र के दौरान जिस विधेयक पर सबसे अधिक ध्यान रहने वाला है, वह राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा देने से जुड़ा है। गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने वाले हैं। इस ऐतिहासिक संशोधन विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गरिमा की रक्षा करना है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की जेल की सजा, भारी जुर्माना या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
सर्वदलीय बैठक में भारी हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट
सत्र की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में लगभग तीन घंटे तक चर्चा चली, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत करीब 40 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि, बैठक के बीच में ही विपक्षी दलों ने विरोध स्वरूप वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष के इस कड़े विरोध का मुख्य कारण तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के गुट को बैठक में आमंत्रित किया जाना था। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कड़ी आपत्ति जताई। महुआ मोइत्रा ने कहा कि पूरा विपक्ष इस बैठक का बहिष्कार कर रहा है क्योंकि जिस गुट को आमंत्रित किया गया है, वह कोई मान्यता प्राप्त पार्टी नहीं है, और स्पीकर ने अभी तक इन बागी सांसदों के विलय को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं लंबित हैं, तो इन्हें किस आधार पर बैठक में बुलाया गया।
इस विवाद पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने स्पष्ट किया कि एनसीपीआई के 20 लोकसभा सांसदों ने बकायदा हस्ताक्षर करके लोकसभा अध्यक्ष से नए दल में शामिल होने और संसद में अलग बैठने की अनुमति मांगी है। यह मामला पूरी तरह से नियमों के तहत स्पीकर के विचाराधीन है। किरेन रीजीजू ने कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक इन सांसदों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि लोकसभा सभी की है। उन्होंने कहा कि मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है और वह लोकसभा सचिवालय के फैसलों पर पहले से कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर संशय बरकरार
इस मानसून सत्र का सबसे बड़ा रहस्य परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों को लेकर बना हुआ है। सरकार की ओर से अभी तक इन दोनों संवेदनशील विषयों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है। गौरतलब है कि परिसीमन विधेयक वास्तव में दो अलग-अलग विधेयकों का एक संयुक्त पैकेज है। इसके अंतर्गत देश में लोकसभा सीटों की संख्या को वर्तमान 550 से बढ़ाकर 850 करने और सभी लोकसभा क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाओं का पुनर्निर्धारण करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने पूर्व में अप्रैल 2026 में एक विशेष सत्र आयोजित कर इस विधेयक को पेश किया था। उस समय सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि वर्ष 2029 तक लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को वास्तविक रूप से लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य है। हालांकि, विपक्षी दलों ने उस समय इस कदम का पुरजोर विरोध किया था और आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ दल इस विधेयक की आड़ में अपना राजनीतिक एजेंडा साधने का प्रयास कर रहा है। लेकिन इस बार के सत्र से पहले डीएमके की ओर से अपने पुराने रुख में थोड़ी नरमी के संकेत मिले हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विपक्ष की घेराबंदी: NEET और अयोध्या के मुद्दों पर संग्राम की तैयारी
संसद के भीतर सरकार को घेरने के लिए विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। विपक्ष इस बार NEET परीक्षा के पेपर लीक मामले और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े भूमि दान विवाद को मुख्य मुद्दा बनाने की योजना बना रहा है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि इन मुद्दों पर सरकार को आसानी से घेरा जा सकता है।
दूसरी तरफ, सरकार इन आरोपों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्तापक्ष का तर्क है कि NEET परीक्षा के परिणाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं और संबंधित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की जा रही है। वहीं, अयोध्या भूमि विवाद मामले में गठित विशेष जांच दल यानी SIT जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने वाली है। ऐसे में सरकार का मानना है कि इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और विपक्ष के पास संसद में हंगामा करने का कोई ठोस आधार नहीं बचा है। सरकार इस सत्र में देश के विकास से जुड़े मुद्दों और अपने काम का लेखा-जोखा जनता के सामने रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है।



















