महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे अंतराल के बाद एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है, जहां राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने जा रहे हैं। विराट गर्जना मोर्चा के बैनर तले आयोजित होने वाले इस प्रदर्शन को महाविकास अघाड़ी का पूरा सहयोग मिला हुआ है। इस कदम के साथ ही दोनों भाई एक मंच पर आ रहे हैं, जिससे सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।
मतदान प्रक्रिया पर कड़े सवाल और पुनर्मतदान की मांग
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस मोर्चे को लेकर तीखे तेवर दिखाए हैं और मौजूदा हालात की तुलना ऐतिहासिक संघर्ष से की है। उन्होंने कहा,
“यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था।”राउत का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज में निष्पक्षता नहीं बची है और जनप्रतिनिधियों की निष्ठा बदली जा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया बयानों का हवाला देते हुए राउत ने मांग की है कि हाल में संपन्न हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा मतदान कराया जाए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के संचालन पर सवाल उठाते हुए वर्तमान सीईसी ज्ञानेश कुमार और पूर्व सीईसी राजीव कुमार दोनों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था में हेरफेर और अनियमितताएं हुई हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी चोट पहुंची है। राउत के अनुसार, मुंबई से शुरू हो रही यह हलचल पूरे देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक व्यापक जनांदोलन का रूप ले रही है।
पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन और विपक्षी समर्थन
एक तरफ जहां चुनावी व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक लामबंदी चल रही है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का आक्रोश भी सामने आ रहा है। पुणे में एमपीएससी के छात्र पिछले तीन-चार दिनों से लगातार दिन-रात धरने पर डटे हुए हैं। छात्रों की मुख्य मांगों में भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्षता, पर्चा लीक मामलों की पारदर्शी जांच और सरकारी महकमों में हजारों रिक्त पदों को अविलंब भरना शामिल है।
राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी और कहा कि रोहित पवार ने इस समस्या को प्रमुखता से सामने रखा है। राउत ने बताया कि प्रशासन की ओर से केवल खोखले आश्वासन मिले हैं और छात्रों में अपने भविष्य को लेकर भारी बेचैनी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को नोटिस थमाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। छात्र आंदोलन को सीधा समर्थन देने के लिए राउत ने शाम 6:30 बजे पुणे में धरना स्थल पर जाकर युवाओं से मुलाकात करने का निर्णय लिया है।





















