महाराष्ट्र सरकार ने कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल को लेकर एक अहम कदम उठाते हुए नया अध्यादेश लागू कर दिया है। इस नए आदेश के दायरे में आने वाली संस्थाओं में सरकार चार नए शासन नियुक्त संचालकों की नियुक्ति करने जा रही है, जिन्हें संघ के फैसलों और कामकाज में मतदान करने का पूरा अधिकार भी सौंपा गया है.
नया अध्यादेश और इसके नियम
अधिकारियों की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार शुक्रवार को महाराष्ट्र सहकारी समितियां (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी किया गया है। इसके जरिए महाराष्ट्र सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा 73AAA में संशोधन किया गया है और यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह नया प्रावधान उन सभी संघीय सहकारी समितियों पर लागू होगा, जिनमें जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को शामिल नहीं किया गया है, बशर्ते उनका सालाना कारोबार 500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो और उन्हें राज्य सरकार से शेयर पूंजी, लोन, गारंटी, अनुदान, जमीन या किसी अन्य वित्तीय अथवा गैर-वित्तीय रूप में मदद मिली हो.
कैबिनेट के फैसले के बाद राजनीतिक सरगर्मी
इस पूरी प्रक्रिया से तीन दिन पहले ही महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में इस बारे में आधिकारिक फैसला ले लिया गया था, जिस पर अब अध्यादेश आने के बाद औपचारिक मुहर लग गई है। सरकार के इस कदम के बाद से कोल्हापुर की स्थानीय राजनीति में हलचल काफी तेज हो गई है और इसका विरोध भी शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता सतेज (बंटी) पाटिल ने सोशल मीडिया पर इस फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि इस बदलाव का असर गोकुल के मौजूदा संचालक मंडल और आगामी अध्यक्ष पद के चुनावों पर किस तरह से पड़ता है.
























