मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली मध्य रेलवे की लोकल ट्रेन सेवाएं सोमवार की सुबह एक भीषण तकनीकी संकट का शिकार हो गईं। कांजुरमार्ग के पास सिग्नलिंग रूम में अचानक लगी आग और ओवरहेड बिजली तारों में आई खराबी के कारण व्यस्तम समय में रेल यातायात पूरी तरह चरमरा गया। घंटों तक गाड़ियाँ पटरियों पर ही रुकी रहीं, जिससे हज़ारों यात्री दफ़्तर पहुँचने की होड़ में ट्रेन से उतरकर रेल पटरियों पर ही पैदल चलने लगे। इसी आपाधापी के दौरान अलग-अलग हादसों में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। रेलवे प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश जारी किए हैं।
ओवरहेड तार और सिग्नल रूम में आग से बढ़ा संकट
सोमवार सुबह की शुरुआत ही रेल यातायात के लिए बाधाओं से भरी रही। सुबह लगभग 9:23 बजे मुलुंड और ठाणे के बीच डाउन स्लो लाइन पर ओवरहेड इक्विपमेंट का एक तार नीचे लटकता हुआ पाया गया। इस तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए रेल कर्मचारियों ने सुबह करीब 10 बजे बिजली आपूर्ति बंद करके मरम्मत का ब्लॉक लिया। इस कार्य में करीब एक घंटे का समय लगा। लेकिन इससे पहले कि हालात सामान्य हो पाते, सुबह 9:30 से 10 बजे के बीच कांजुरमार्ग स्टेशन के समीप बने सिग्नलिंग रूम में अचानक आग भड़क उठी।
आग लगने के कारण सिग्नल प्रणाली पूरी तरह बंद हो गई, जिससे कांजुरमार्ग और आसपास के पूरे रेल नेटवर्क पर ट्रेनों के पहिए अचानक थम गए। इस दोहराव वाले संकट ने मध्य रेलवे के यातायात प्रबंधन को पूरी तरह लाचार बना दिया। कांजुरमार्ग से भांडुप के बीच कुल छह रेल लाइनों पर स्थित लगभग 24 सिग्नल पूरी तरह ठप हो गए। प्रभावित लाइनों में पांचवीं और छठी लाइन भी शामिल थीं, जिनका उपयोग लंबी दूरी की एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों के आवागमन के लिए किया जाता है।
घंटों रुकी रहीं ट्रेनें, पटरियों पर उतरे बेबस यात्री
सप्ताह के पहले दिन अपने गंतव्य की ओर जा रहे दफ़्तरगामी यात्रियों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन साबित हुई। अप और डाउन दोनों दिशाओं की धीमी और तेज़ गति वाली लोकल ट्रेनें जहाँ-तहाँ खड़ी हो गईं। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से ठाणे, कल्याण और आगे की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर ट्रेनें एक घंटे से अधिक समय तक पटरियों के बीचो-बीच फंसी रहीं।
ट्रेनों के भीतर और स्टेशनों पर यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यह रही कि रेलवे की तरफ से स्थिति की कोई स्पष्ट जानकारी या घोषणा नहीं की जा रही थी। अनिश्चितता के माहौल में घबराए यात्री भारी गर्मी के बीच लोकल ट्रेनों के डिब्बों से नीचे कूद पड़े और पटरियों के किनारे-किनारे ही अगले स्टेशन की ओर पैदल चलने लगे। पटरियों पर इस तरह लोगों की भीड़ उमड़ने से सुरक्षा का संकट और गहरा गया।
पटरी पार करते समय कॉलेज छात्र समेत तीन की जान गई
सेवाएं ठप होने और पटरियों पर पैदल आवाजाही शुरू होने के दौरान बेहद दुखद हादसे सामने आए। भांडुप स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 के पास रेलवे ट्रैक पार कर रहा एक कॉलेज छात्र मुंबई से ठाणे की ओर जा रही एक एसी लोकल ट्रेन की चपेट में आ गया। चश्मदीदों के अनुसार टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि छात्र ट्रेन के साथ करीब 15 से 20 फीट तक घिसटता चला गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इसके अतिरिक्त, घाटकोपर और विक्रोली रेलखंड के बीच दो अन्य व्यक्तियों के शव पटरियों पर मिले। आशंका जताई जा रही है कि वे भी रुकी हुई ट्रेनों से उतरकर पटरियों के रास्ते आगे बढ़ते समय किसी दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गए। इन घटनाओं के बाद रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में चलती या रुकी हुई ट्रेन से उतरकर पटरियों पर न चलें।
नियंत्रित परिचालन और चरणबद्ध तरीके से बहाली
सिग्नल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने पर रेलवे ने गाड़ियों को मैनुअल और विशेष अनुमति के ज़रिए चलाने का निर्णय लिया। विक्रोली और भांडुप स्टेशन के बीच डाउन लोकल, डाउन फ़ास्ट तथा अप स्लो व फ़ास्ट लाइनों पर विशेष परिचालन नियम लागू किए गए, ताकि पूरी तरह ठप होने के बजाय सीमित संख्या में ट्रेनें चलती रहें।
मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया कि तकनीकी टीमों की मशक्कत के बाद शाम को चरणबद्ध तरीके से लाइनों को बहाल किया गया। डाउन फ़ास्ट लाइन पर यातायात सबसे पहले शाम 4:10 बजे चालू किया गया। इसके बाद अप फ़ास्ट लाइन शाम 4:46 बजे, डाउन स्लो लाइन शाम 5:30 बजे और अंत में अप स्लो लाइन शाम 6:18 बजे पूरी तरह बहाल हो पाई। मध्य रेलवे ने सिग्नल रूम में आग लगने के कारणों और सेवा बहाली में हुई देरी की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।


















