जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अचानक बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की सुगबुगाहट के बीच सरकार के सभी मंत्रियों ने अपने सामूहिक इस्तीफे मुख्यमंत्री को सौंप दिए हैं। श्रीनगर के लोक भवन में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह से ठीक कुछ घंटे पहले इस राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा दिया है। अब यह पूरी तरह से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के निर्णय पर निर्भर करता है कि वह किस मंत्री को अपने मंत्रिमंडल में बनाए रखते हैं और किसका इस्तीफा मंजूर कर आगे उपराज्यपाल के पास भेजते हैं।
नए चेहरों की एंट्री और मंत्रिमंडल का गणित
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के नियमों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 9 से ज्यादा नहीं हो सकती है, जो कुल विधानसभा सदस्यों का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। वर्तमान में पांच मंत्रियों वाले इस मंत्रिमंडल में से रिपोर्ट्स के मुताबिक एक मंत्री की छुट्टी होना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि बाकी मंत्रियों को दोबारा रिटेन किया जा सकता है। श्रीनगर के लोक भवन में तीन से चार नए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है जिन्हें शपथ दिलाई जाएगी। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं, पद की लालसा और गुटबाजी को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सतह पर आ चुकी है।
भारतीय जनता पार्टी का तीखा हमला
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे पर भारतीय जनता पार्टी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और उमर अब्दुल्ला सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक फिल्मी क्लिप साझा करते हुए बेहद तीखा तंज कसा है। पार्टी का कहना है कि बाहर से जो कैबिनेट विस्तार नजर आ रहा है, वह असल में भीतर से सरकार के टूटने और अंतर्कलह की असली कहानी है। भाजपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार और घपलों में लिप्त यह सरकार केवल अपनी कुर्सी, सत्ता और दौलत बचाने में जुटी हुई है। जनता से किए गए वादों और सुशासन से सरकार का कोई लेना-देना नहीं बचा है और केवल सत्ता का खेल खेला जा रहा है।
























