राजस्थान के दौसा जिले में जिला प्रशासन ने चुनावी कार्यों में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र से गैरहाजिर रहने और स्पष्टीकरण नोटिस का कोई जवाब न देने पर कुल तीन लापरवाह शिक्षाकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के प्रशासनिक और शैक्षणिक हलकों में खासा हड़कंप मच गया है, क्योंकि चुनावी ड्यूटी को लेकर प्रशासन का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है।
जिला निर्वाचन अधिकारी सौम्या झा के निर्देश पर यह पूरी कार्रवाई की गई है। जिन लोगों पर गाज गिरी है, उनमें दो स्कूलों के प्रधानाचार्य यानी प्रिंसिपल और एक शिक्षक शामिल हैं। इन कर्मचारियों की पहचान महुआ स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल दिनेश मीणा, दीवांचली कला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल मनोहर लाल मीणा और खेमावास स्थित राजकीय संस्कृत विद्यालय के शिक्षक मीठालाल मीना के रूप में हुई है। इन सभी ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम से दूरी बनाई थी।
प्रशिक्षण से अनुपस्थिति और नोटिस की अनदेखी बनी वजह
लोकतंत्र के इस बड़े पर्व में प्रशासनिक और मैदानी अमले की भूमिका बेहद अहम होती है। मतदान और मतगणना जैसी प्रक्रियाओं को त्रुटिहीन तरीके से संपन्न कराने के लिए कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि चुनाव आयोग के नियमों का पूरी सख्ती से पालन हो सके। इसी उद्देश्य के तहत आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में इन तीनों कर्मचारियों की गैरहाजिरी को गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। प्रशिक्षण में बिना किसी वैध कारण के न पहुंचने के बाद प्रशासन ने इन सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें इनसे जवाब तलब किया गया था। लेकिन तय समय सीमा में इन कर्मचारियों की ओर से नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद जिला प्रशासन को यह कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाना पड़ा।
महुआ और दीवांचली कला के प्रधानाचार्यों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए कार्मिकों में पहला प्रमुख नाम महुआ के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल दिनेश मीणा का है। चुनावी प्रशिक्षण से नदारद रहने और प्रशासनिक नोटिस की उपेक्षा करने के कारण उनके खिलाफ यह निलंबन आदेश पारित किया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी सौम्या झा के सख्त निर्देशों के बाद विभाग ने इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने का संदेश दिया है। ठीक इसी प्रकार की लापरवाही दीवांचली कला के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल मनोहर लाल मीणा के मामले में भी सामने आई, जिन्हें प्रशिक्षण से गायब रहने और नोटिस का जवाब न देने के आरोप में तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।
खेमावास के शिक्षक पर भी हुई कार्रवाई
इस पूरी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में केवल उच्च अधिकारी ही नहीं, बल्कि शिक्षणेतर और अन्य शिक्षक भी आए हैं। तीसरे निलंबित किए गए कर्मचारी खेमावास के राजकीय संस्कृत विद्यालय के शिक्षक मीठालाल मीना हैं। उन्हें भी चुनावी प्रशिक्षण कार्यक्रम से नदारद रहने और नोटिस मिलने के बावजूद उसका उत्तर न देने का दोषी पाया गया है। इस तरह दौसा जिले में कुल मिलाकर तीन शिक्षाकर्मियों के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई पूरी की गई है, जिसमें दो प्रिंसिपल और एक शिक्षक शामिल हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर से उठाए गए इस कदम से साफ है कि निर्वाचन कार्यों में किसी भी स्तर की कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस प्रकार की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया जाता रहेगा।



















