नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के स्पीकर हॉल में सोमवार को कायस्थ समाज के एक बड़े सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और दिल्ली के तमाम कायस्थ संगठनों के अध्यक्षों के साथ प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में शिरकत की और समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहराई से विचार-विमर्श किया।
चित्रगुप्त विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज की स्थापना
सम्मेलन के दौरान केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष एक मुख्य मांग प्रमुखता से रखी गई। इसमें भगवान श्री चित्रगुप्त के नाम से एक अत्याधुनिक विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की पुरजोर वकालत की गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और स्वास्थ्य के इन बड़े संस्थानों के खुलने से युवा पीढ़ी के लिए तरक्की के नए रास्ते बनेंगे और रोजगार के साथ बेहतर तालीम के ढेरों अवसर सामने आएंगे।
शिक्षा और सामाजिक एकजुटता पर दिया गया बल
इस पूरे आयोजन के आमंत्रक और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा मणिपुर प्रभारी संजय सिन्हा ने कायस्थ समाज की एकता, शिक्षा के प्रसार और समाज की भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद सभी प्रतिनिधियों से अपील की कि वे समाज के हितों और शैक्षणिक सशक्तिकरण के मामलों को पूरी ताकत और एकजुटता के साथ सरकार के सामने मजबूती से रखें।
नेतृत्व के प्रति आभार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा
इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति विशेष रूप से आभार जताया गया। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर कायस्थ समाज से आने वाले नितिन नवीन की नियुक्ति को समाज के लिए बेहद गौरवपूर्ण बताया गया और इस फैसले पर बहुत प्रसन्नता व्यक्त की गई।
समन्वय और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा
कार्यक्रम के अंत में चित्रगुप्त विश्वविद्यालय एवं मेडिकल कॉलेज की मांग को आगे बढ़ाने और विभिन्न संगठनों के बीच आपसी तालमेल को और मजबूत करने पर खास जोर दिया गया। संजय सिन्हा ने सभी प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार प्रकट करते हुए दोहराया कि समाज की असली तरक्की के लिए शिक्षा, मजबूत संगठन और सामूहिक कोशिशों को हमेशा सबसे ऊपर रखना होगा। इस आयोजन का मूल उद्देश्य भगवान श्री चित्रगुप्त के नाम पर उच्च शिक्षा और चिकित्सा संस्थानों की मांग को गति देना और कायस्थ बिरादरी को एक मंच पर लाना था।
























