केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सड़क और हाईवे नेटवर्क को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन नागपुर में रविवार को हुए एक कार्यक्रम में उनकी एक टिप्पणी ने अलग वजह से लोगों का ध्यान खींच लिया. इस दौरान उन्होंने अपने वोटरों के बारे में एक ऐसा आंकड़ा साझा किया, जो अब हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है.
पढ़े-लिखे इलाकों से भी ज्यादा वोट अंडरवर्ल्ड क्षेत्रों से
कार्यक्रम में बोलते हुए हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया कि चुनावों में उन्हें शिक्षित और पढ़े-लिखे लोगों वाले क्षेत्रों की तुलना में क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से जुड़े इलाकों में कहीं ज्यादा समर्थन मिला. उन्होंने सटीक आंकड़े गिनाते हुए कहा कि पढ़े-लिखे लोगों वाले क्षेत्रों में उन्हें करीब 70 से 75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि क्रिमिनल और अंडरवर्ल्ड से जुड़े इलाकों में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच गया. यानी अपराध और रेड लाइट एरिया से जुड़े मतदाताओं ने शिक्षित तबके के मुकाबले उन पर कहीं ज्यादा भरोसा जताया.
गडकरी ने खुद दी सफाई, कहा गलत मतलब न निकालें
अपने ही इस बयान को लेकर गलतफहमी न फैले, इसके लिए नितिन गडकरी ने उसी संबोधन में स्थिति साफ करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि इस आंकड़े का यह मतलब हरगिज नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके इन तबकों से किसी तरह के निजी संबंध हैं या वे वहां चल रही गतिविधियों का किसी भी रूप में समर्थन करते हैं. गडकरी के मुताबिक, इन इलाकों में ज्यादा वोट मिलने की असली वजह यह रही कि उन्होंने वहां सड़कें बनवाईं और सामाजिक कार्यों में लगातार भागीदारी निभाई, जिसके चलते स्थानीय लोगों ने चुनाव में उन्हें अपना समर्थन दिया.
पहले भी विवादों में रह चुका है गडकरी का एक बयान
यह पहली बार नहीं है जब नितिन गडकरी की कोई टिप्पणी इस तरह चर्चा में आई हो. इससे पहले भी उनका एक बयान खूब वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे पिछले 30 सालों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं, लेकिन अब पहले जितना काम नहीं कर पाते और नई पीढ़ी को आगे आने का मौका मिलना चाहिए. उस बयान के सामने आते ही कई रिपोर्ट्स में यह कयास लगाए जाने लगे थे कि गडकरी राजनीति से दूरी बनाने की बात कर रहे हैं. बाद में इस भ्रम को दूर करने के लिए खुद नितिन गडकरी के कार्यालय की तरफ से सफाई जारी करनी पड़ी थी. कार्यालय ने बताया था कि उनका वह बयान राजनीति से जुड़ा नहीं था, बल्कि वे खासतौर पर लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के संदर्भ में बात कर रहे थे. यह ट्रस्ट गडकरी द्वारा ही स्थापित एक संस्था है, जो आदिवासी इलाकों में स्कूल संचालित करती है. इसी संस्था के काम को लेकर उन्होंने कहा था कि वे अब पहले जैसी सक्रियता से जिम्मेदारियां नहीं निभा सकते, इसलिए युवा पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.



















