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कोटा के इन 5 मंदिरों की कहानियां हैरान कर देंगी, कहीं धंसती है प्रतिमा तो कहीं भक्त लिखते हैं इच्छाएंराजस्थान
8 सित॰ 2026, 8:12 am (1 घंटे पहले)· 2

कोटा के इन 5 मंदिरों की कहानियां हैरान कर देंगी, कहीं धंसती है प्रतिमा तो कहीं भक्त लिखते हैं इच्छाएं

कोटा शहर में कुछ ऐसे मंदिर हैं जिनकी परंपराएं और मान्यताएं बेहद अलग हैं, जहां एक जगह मूर्ति जमीन में धंसती जा रही है तो दूसरी जगह भक्त रजिस्टर में अपनी मुरादें लिखते हैं.

राजस्थान के कोटा शहर में सिर्फ ऐतिहासिक हवेलियां और चंबल किनारे के नजारे ही नहीं, बल्कि कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिनकी परंपराएं और मान्यताएं देशभर में कहीं और देखने को नहीं मिलतीं. यहां किसी मंदिर में मूर्ति धीरे-धीरे जमीन में समाती जा रही है तो किसी में भक्त अपनी इच्छाएं सीधे रजिस्टर में दर्ज कराते हैं. आइए जानते हैं कोटा के पांच ऐसे मंदिरों के बारे में जो अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते हैं.

चंद्रेशल मठ: पत्थरों में बसी इतिहास की कहानी

चंद्रेशल नदी के किनारे बना प्राचीन चंद्रेशल मठ कोटा की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा है. पूरी तरह पत्थरों से तैयार यह परिसर पुरानी स्थापत्य शैली की झलक दिखाता है, जहां पुराने मंदिर, समाधियां और बारीक पत्थर की नक्काशी आज भी सुरक्षित हैं. नदी किनारे का शांत और हरा-भरा माहौल इस जगह को सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि इतिहास और पुरानी विरासत में दिलचस्पी रखने वालों के लिए भी खास बनाता है.

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कैथून का विभीषण मंदिर: यहां होती है रावण के भाई की पूजा

कोटा के कैथून कस्बे में मौजूद विभीषण मंदिर अपने आप में बेहद दुर्लभ है, क्योंकि यहां रावण के भाई विभीषण को पूजा जाता है. इससे जुड़ी कथाएं रामायण काल तक जाती हैं और स्थानीय लोग इसे करीब 5000 साल पुराना मानते हैं. इसे दुनिया का इकलौता विभीषण मंदिर भी बताया जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा हर साल थोड़ी-थोड़ी जमीन के भीतर समाती जा रही है. यहां विभीषण का पांच दिवसीय मेला हर साल होली के मौके पर आयोजित होता है, जिसमें आसपास से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.

रामेश्वर महादेव मंदिर: गुफा में विराजे स्वयंभू शिवलिंग

अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा यह रामेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धा और प्रकृति के अनोखे मेल के लिए जाना जाता है. यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 108 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिसके बाद झरने के पास बनी प्राकृतिक गुफा में स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन होते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार गुफा के एक छेद से कभी-कभी सांप निकलकर भगवान शिव की पूजा करने आता है, और जिस भक्त को यह नजारा दिख जाए उसे बेहद भाग्यशाली माना जाता है.

गोदावरी धाम हनुमान मंदिर: चंबल किनारे जागृत प्रतिमा

चंबल नदी के तट पर बना गोदावरी धाम हनुमान मंदिर अपनी जागृत प्रतिमा और चमत्कारी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां प्रेत बाधा और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोग राहत की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. दक्षिण भारतीय शैली में बना यह मंदिर अपनी अलग तरह की वास्तुकला की वजह से भी लोगों को आकर्षित करता है. हर मंगलवार और शनिवार यहां विशेष आरती होती है, जिसमें बड़ी तादाद में श्रद्धालु शामिल होते हैं.

गणेश पोल मंदिर: यहां रजिस्टर में दर्ज होती हैं मुरादें

कोटा के बूंदी रोड पर मौजूद मनोकामना सिद्ध गणेश मंदिर को गणेश पोल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, और इसकी उम्र करीब 800 से 900 साल के बीच आंकी जाती है. इस मंदिर की सबसे अलग बात यहां रखे रजिस्टर हैं, जिनमें भक्त अपनी शादी, नौकरी, नए घर या कारोबार से जुड़ी इच्छाएं दर्ज कराते हैं. इच्छा पूरी होने के बाद भक्त फिर मंदिर आकर उसी रजिस्टर में सही का निशान लगाते हैं और गणपति बप्पा को धन्यवाद कहते हैं.

सवाल-जवाब

कोटा के कैथून में विभीषण मंदिर की क्या खासियत है?
यहां रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है और मान्यता है कि प्रतिमा हर साल थोड़ा-थोड़ा जमीन में समाती जा रही है.
रामेश्वर महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचा जाता है?
श्रद्धालुओं को करीब 108 सीढ़ियां चढ़कर झरने के पास बनी गुफा में स्वयंभू शिवलिंग तक पहुंचना होता है.
गोदावरी धाम हनुमान मंदिर में विशेष आरती कब होती है?
यहां हर मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
गणेश पोल मंदिर में मनोकामना कैसे लिखी जाती है?
भक्त मंदिर में रखे रजिस्टर में अपनी शादी, नौकरी, नए घर या कारोबार से जुड़ी इच्छा लिखते हैं और पूरी होने पर टिक लगाते हैं.
विभीषण मेला साल में कब लगता है?
कैथून के विभीषण मंदिर में हर साल होली के मौके पर पांच दिवसीय मेला आयोजित होता है.
गणेश पोल मंदिर कितना पुराना है?
इसे करीब 800 से 900 साल पुराना बताया जाता है.
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·39 मिनट पहले

यह लेख कोटा की सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहर को प्रभावी ढंग से सामने लाता है, विशेषकर कैथून के विभीषण मंदिर और चंद्रेशल मठ जैसे स्थलों के माध्यम से। राजस्थान में केवल महलों और किलों से परे ऐसी प्राचीन और अनूठी धार्मिक परंपराएं पर्यटन और क्षेत्रीय इतिहास के अध्ययन के लिए एक नया आयाम जोड़ती हैं। इस तरह की ग्राउंड रिपोर्टिंग से स्थानीय संस्कृति को व्यापक मंच मिलता है और संरक्षित विरासतों के प्रति जनचेतना बढ़ती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 मिनट पहले

एक क्राइम और कानून-व्यवस्था संवाददाता के दृष्टिकोण से, इस तरह के ऐतिहासिक और प्राचीन धार्मिक स्थलों पर जुटने वाली भारी भीड़ जैसे कि कैथून के मेले के दौरान, कानून-व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन व पुलिस विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ ऐसे स्थलों पर लोक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की सुदृढ़ता सुनिश्चित करना भी प्रशासनिक प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे।

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