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जेएनयू यौन उत्पीड़न मामले में बिमोल अकोइजाम की जांच निष्पक्ष और गोपनीय हो, दिल्ली के मणिपुरी संगठनों की मांगमणिपुर
16 अक्तू॰ 2026, 2:00 pm (2 घंटे पहले)· 0

जेएनयू यौन उत्पीड़न मामले में बिमोल अकोइजाम की जांच निष्पक्ष और गोपनीय हो, दिल्ली के मणिपुरी संगठनों की मांग

दिल्ली में सक्रिय मणिपुरी नागरिक समाज संगठनों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के यौन उत्पीड़न मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने प्रक्रियागत खामियों और मीडिया ट्रायल पर गहरी चिंता जताई है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सक्रिय कई मणिपुरी नागरिक समाज समूहों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में एक न्यायसंगत, निष्पक्ष और गोपनीय जांच कराए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। इस मामले में लोकसभा सांसद प्रोफेसर बिमोल अकोइजाम का नाम आने के बाद से ही स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, जिस पर इन संगठनों ने पूरी प्रक्रिया के संचालन के तौर-तरीकों को लेकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।

सामूहिक बयान में प्रक्रियागत कमियों पर उठाए गए सवाल

विभिन्न संगठनों की ओर से जारी एक साझा बयान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण में कथित तौर पर प्रक्रियागत नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसके साथ ही संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक किए जाने और कुछ चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाए जाने जैसी घटनाओं ने पूरी कार्यवाही की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। संगठनों का यह स्पष्ट मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों से निपटने के दौरान संस्थागत जिम्मेदारी, पूर्ण निष्पक्षता, गोपनीयता और उच्च स्तर की प्रक्रियागत शुचिता का पालन किया जाना निहायत जरूरी होता है ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

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मीडिया ट्रायल और सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर कड़ी आपत्ति

नागरिक समूहों ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की है कि इस मामले में लगातार मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है। उन्होंने आगाह किया है कि इस तरह की अटकलें, चुनिंदा खुलासे और सनसनीखेज खबरें न केवल चल रही जांच को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि इससे मामले से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा को भी अपूरणीय क्षति पहुंचती है और संबंधित पक्षों की मानसिक पीड़ा में भी इजाफा होता है। संगठनों ने इस बात पर जोर दिया है कि समाचार प्रसारण और कवरेज के दौरान यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे किसी भी व्यक्ति के कानूनी अधिकारों का हनन न हो और उचित प्रक्रिया तथा गोपनीयता के बुनियादी सिद्धांत सुरक्षित रहें।

विश्वविद्यालय प्रशासन और आंतरिक समिति की कार्यप्रणाली की समीक्षा

इन समूहों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा कथित प्रक्रियागत उल्लंघनों को लेकर जताई गई चिंताओं का भी अपने बयान में उल्लेख किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और उसकी आंतरिक समिति के कामकाज की एक पारदर्शी और निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है ताकि इस पूरी कार्यवाही के प्रति जनता का विश्वास दोबारा कायम किया जा सके। संगठनों का कहना है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना सर्वोपरि है और यह जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के आगे बढ़नी चाहिए। इसके साथ ही सभी संबंधित पक्षों को बाहरी दबावों और पूर्व निर्धारित धारणाओं से सुरक्षित रखने के लिए पुख्ता सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

राजनीतिक नफे-नुकसान से दूर रखने की अपील

संगठनों का यह भी आरोप है कि निष्पक्ष और गोपनीय तरीके से जांच कराने की आवश्यकता को दरकिनार कर इस पर राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस मामले के दिल्ली और मणिपुर की राजनीति में एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने का गंभीर जोखिम पैदा हो गया है। समूहों का यह भी मानना है कि ऐसे समय में जब मणिपुर स्वयं पिछले लगभग चार वर्षों से एक लंबे और पीड़ादायक संकट के दौर से गुजर रहा है, इस तरह के मामलों का अत्यधिक राजनीतिकरण किया जाना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने अफसोस जताया कि राज्य की मूल समस्याओं के समाधान खोजने के लिए कभी भी इस स्तर की सक्रियता और सार्वजनिक ध्यान आकर्षित नहीं किया गया।

अपने इस संयुक्त वक्तव्य के अंत में, इन समूहों ने जेएनयू प्रशासन से अपील की है कि वे प्राकृतिक न्याय के नियमों का कड़ाई से पालन करें, सभी पक्षों की गोपनीयता को बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि मीडिया कवरेज या बाहरी प्रभावों के कारण किसी भी व्यक्ति को अनुचित पूर्वाग्रह का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया जगत से भी यह आग्रह किया है कि वे ऐसी किसी भी सनसनीखेज रिपोर्टिंग से परहेज करें जो इस जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को खतरे में डाल सकती है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस विवाद ने सार्वजनिक मंचों और राजनीतिक हलकों में काफी तूल पकड़ा हुआ है और इस पर लगातार चर्चा जारी है।

सवाल-जवाब

दिल्ली के मणिपुरी संगठनों ने किस मामले में जांच की मांग की है?
दिल्ली के मणिपुरी नागरिक समाज संगठनों ने जेएनयू में सामने आए यौन उत्पीड़न के मामले की निष्पक्ष और गोपनीय जांच की मांग की है।
इस मामले में किस प्रमुख राजनेता का नाम जुड़ा हुआ है?
इस मामले में लोकसभा सांसद प्रोफेसर बिमोल अकोइजाम का नाम शामिल है।
संग संगठनों ने किस बात पर सबसे अधिक चिंता जताई है?
संगठन ने कथित प्रक्रियागत उल्लंघनों, संवेदनशील जानकारियों के सार्वजनिक होने और लगातार चल रहे मीडिया ट्रायल पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
शिक्षक संघ ने किस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी?
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने कथित प्रक्रियागत उल्लंघनों और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा आंतरिक समिति के कामकाज पर सवाल उठाए थे।
संगठनों ने मीडिया से क्या अपील की है?
संगठनों ने मीडिया से सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचने और जांच की निष्पक्षता तथा गोपनीयता बनाए रखने की अपील की है।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 मिनट पहले

मीडिया ट्रायल किसी भी जांच का बेड़ा गर्क कर देता है, बात तो सौ टका सही है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·41 मिनट पहले

अर्जुन जी, सही कहा आपने, मीडिया ट्रायल से तो जांच शुरू होने से पहले ही सब खत्म हो जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

जांच गोपनीय होने की मांग तो ठीक है, पर मीडिया ट्रायल रोकने से सच छुपने का खतरा भी तो रहता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, यूपी में भी कई मामलों में देखा है कि मीडिया ट्रायल से जांच का रुख ही बदल जाता है। गोपनीयता और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं।

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