मणिपुर के सेनापति जिले के पहाड़ी क्षेत्र से रविवार सुबह दो युवकों के शव बरामद किए गए, जो 29 अक्टूबर से लापता चल रहे थे। दोनों मृतक कांगपोकपी जिले के ताफौ कुकी गांव के रहने वाले थे, जिनकी पहचान 21 वर्षीय थांगिनलुन चोंगलोई और 20 वर्षीय पाओगिनलाल हांगसिंग के रूप में हुई है। शव मिलने के बाद इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय बलों की तैनाती जारी है और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सुबह तड़के शुरू हुआ संयुक्त तलाशी अभियान
सुरक्षा बलों ने रविवार तड़के करीब 3:30 बजे एक बड़ा संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। लगातार चार घंटे तक जंगलों और दुर्गम रास्तों पर चले इस ऑपरेशन के बाद सुबह करीब 7:30 बजे दोनों शव बरामद किए गए। यह बरामदगी राष्ट्रीय राजमार्ग-2 से लगभग 13 से 14 किलोमीटर पूर्व दिशा में, एसपी रोड के पास स्थित पहाड़ी इलाके से हुई। इस व्यापक अभियान में मणिपुर पुलिस के साथ-साथ असम राइफल्स, कोबरा, सीआरपीएफ और आरएएफ के जवानों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।
सीमावर्ती इलाकों में लगातार चार दिनों तक कॉम्बिंग
अधिकारियों के अनुसार, दोनों युवकों की तलाश के लिए पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स की टुकड़ियां पिछले चार दिनों से कांगपोकपी और सेनापति जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन तलाशी ले रही थीं। तलाशी दलों ने ताफौ ओनाएमे, ताफौ लियांगमेई, मारेनमेई, अपर मारेनमेई और उनसे सटे घने वन क्षेत्रों की खाक छानी थी। गहन तलाशी अभियान के चौथे दिन जाकर सुरक्षा बलों को इस पहाड़ी ठिकाने से दोनों युवकों के शव मिले।
पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव और बंद की पृष्ठभूमि
पुलिस ने बताया कि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए दोनों शवों को पोस्टमार्टम परीक्षण के लिए कांगपोकपी ले जाया जा रहा है। शवों की यह बरामदगी कांगपोकपी जिले में चल रहे व्यापक बंद के बीच हुई है। कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी यानी सीओटीयू ने 29 अक्टूबर से दोनों युवकों की सुरक्षित और तत्काल रिहाई की मांग करते हुए 48 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया था। बाद में प्रशासन द्वारा युवकों को सुरक्षित न निकाल पाने का हवाला देते हुए 31 अक्टूबर को इस बंद को 24 घंटे के लिए और बढ़ा दिया गया था।
दोषियों की धरपकड़ के लिए अभियान जारी
सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी और कॉम्बिंग ऑपरेशन लगातार जारी रहेगा। संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।






















