मणिपुर के पहाड़ी और घाटी समुदायों के लोग राज्य की स्वदेशी जातियों के बीच आपसी भाईचारे, एकता और परस्पर सम्मान के बंधनों को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को ऐतिहासिक कांगला फोर्ट में एकत्र हुए और मेरा हाउ चोंगबा पर्व का भव्य आयोजन किया।
पूर्णिमा के दिन होती है विशेष परंपरा
मैतेई कैलेंडर के मेरा महीने के पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार में मणिपुर की घाटी और पहाड़ी बस्तियों के साझा सांस्कृतिक इतिहास और प्राचीन संबंधों का जश्न मनाया जाता है। उत्सव की शुरुआत साना कोनूंग यानी राजमहल से लेकर कांगला फोर्ट तक निकाली जाने वाली एक पारंपरिक शोभायात्रा से हुई, जिसकी अगुवाई मणिपुर के राजसी पदाधिकारी लेइशेंबा सनाजाओबा ने की।
धार्मिक अनुष्ठान और दीप प्रज्वलन
किले परिसर में पहुंचकर उन्होंने पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए, राज्य और जनता की सुख-शांति के लिए प्रार्थनाएं कीं तथा समृद्धि, प्रकाश और एकता का प्रतीक माना जाने वाला एक लालटेन प्रज्वलित किया। इस मौके पर लेइशेंबा सनाजाओबा ने बताया कि यह पर्व घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों के बीच के अटूट रिश्ते को दर्शाता है, जिसकी जड़ें नोंगदा लाएरेन पाखांगबा के शासनकाल जितनी पुरानी हैं।
मौजूदा हालात और शांति की कामना
उन्होंने मणिपुर में शांति, समृद्धि और एकता लौटने की पुरजोर उम्मीद जताई, हालांकि उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि राज्य के मौजूदा हालात के कारण इस साल के उत्सव के दायरे को सीमित रखना पड़ा। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह ने मेरा हाउ चोंगबा को अखंडता दिवस की संज्ञा दी और इसे मणिपुर के नागरिकों के बीच आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाला एक अहम अवसर बताया।
इतिहास और साझा बलिदानों का स्मरण
समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस त्योहार में दोनों क्षेत्रों के समुदायों की सहभागिता राज्य की साझी विरासत और एक समान पहचान को उजागर करती है। उन्होंने उन ऐतिहासिक पन्नों को भी याद किया जब आंग्ल-मणिपुर युद्ध और सात साल की तबाही जैसे संकट के दौर में राज्य के सभी 36 समुदाय अपनी स्वायत्तता और जमीन की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए थे।
अखंडता की रक्षा का संकल्प
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन समुदायों का साझा इतिहास और बलिदान इस बात की मांग करता है कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और एकता की हर कीमत पर सुरक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह सांस्कृतिक उत्सव मणिपुर की जनता के बीच की उस गहरी और पुरानी एकता का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पर्व राज्य में स्थायी शांति और भाईचारे की बहाली का मार्ग प्रशस्त करेगा।
अतिथि गृह और उपहारों का आदान-प्रदान
मुख्यमंत्री ने इम्फाल में पहाड़ी क्षेत्रों के प्रमुखों के लिए बन रहे गेस्ट हाउस के निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने में लेइशेंबा सनाजाओबा के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नया ठिकाना राजधानी आने वाले पहाड़ी प्रमुखों को रहने की सुविधा प्रदान करेगा और इससे घाटी तथा पहाड़ों के बीच संवाद और प्रगाढ़ होगा। इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने आपसी मेलजोल और सॉलिडेरिटी के प्रतीक के तौर पर उपहारों का आदान-प्रदान किया।


















