एशिया की प्रमुख करेंसियों पर इस वक्त दो विपरीत ताकतें एक साथ काम कर रही हैं। एक तरफ अमेरिका के मुकाबले एशियाई देशों की बेहतर आर्थिक ग्रोथ इन करेंसियों को मजबूती देने का काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मजबूत डॉलर, ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें और Fed के संभावित सख्त रुख से खतरे की घंटी बज रही है। MUFG के सीनियर करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट माइकल वान ने यह विस्तृत विश्लेषण पेश किया है।
AI निर्यातक अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
माइकल वान के मुताबिक, एशिया की करेंसियों के लिए सबसे बड़ा सहारा वे देश बनेंगे जो AI आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात करते हैं। उन्होंने खास तौर पर साउथ कोरिया, ताइवान, मलेशिया और सिंगापुर का जिक्र किया है। ये देश अमेरिका के मुकाबले तेज रफ्तार से बढ़ रहे हैं और यह ग्रोथ डिफरेंशियल इनकी करेंसियों को ताकत देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
आगे चलकर हमारा बेस केस यह है कि एशियाई करेंसियों को अमेरिका के साथ बेहतर ग्रोथ डिफरेंशियल से भी सहारा मिलेगा, खासकर साउथ कोरिया, ताइवान, मलेशिया और सिंगापुर जैसी AI इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातक करेंसियों को।
सिर्फ यील्ड डिफरेंशियल नहीं, ग्रोथ और रिस्क सेंटीमेंट भी उतने ही जरूरी
MUFG का पिछला विश्लेषण ढांचा बताता है कि अतीत के Fed रेट साइकिल को देखें तो यील्ड डिफरेंशियल एशियाई करेंसियों को प्रभावित करने वाला सिर्फ एक कारक है। ग्रोथ डिफरेंशियल और रिस्क सेंटीमेंट भी उतने ही, या कई बार उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होते हैं। यानी बाजार सिर्फ ब्याज दरों के फर्क को नहीं देखता, बल्कि दोनों के बीच आर्थिक वृद्धि का अंतर और निवेशकों का जोखिम उठाने का हौसला भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाता है।
हमारे एशिया FX के ड्राइवर्स पर पिछले फ्रेमवर्क में अतीत के Fed रेट साइकिल का विश्लेषण दर्शाता है कि यील्ड डिफरेंशियल हमारे क्षेत्र की करेंसियों को प्रभावित करने वाला सिर्फ एक कारक है, और ग्रोथ डिफरेंशियल तथा रिस्क सेंटीमेंट उतने ही जरूरी हैं, बल्कि कई बार ज्यादा भी।
Fed का हॉकिश रुख बन सकता है सबसे बड़ा खतरा
एशियाई करेंसियों के लिए असली खतरा तब होगा जब Fed का रुख काफी सख्त हो जाए। केविन वॉर्श की अगुआई में FOMC ने लगातार चौथी बैठक में बेंचमार्क रेट को 3.50% से 3.75% के बीच स्थिर रखा है, जो बाजार की उम्मीद के मुताबिक था। लेकिन अगर आगे चलकर Fed और ज्यादा हॉकिश हो जाती है और इससे बाजारों में रिस्क एपेटाइट घट जाती है, तो एशिया की करेंसियों पर नकारात्मक असर पड़ना तय है।
अगर Fed वास्तव में काफी ज्यादा हॉकिश हो जाती है और इससे बाजारों में रिस्क एपेटाइट में गिरावट आती है, तो यह एशिया FX के लिए निश्चित रूप से मायने रखेगा।
डॉलर की मजबूती और तेल का बदलता रिस्क सेंटीमेंट भी दबाव बढ़ा रहे हैं
माइकल वान ने बताया कि एशिया की करेंसियां इस वक्त कई मोर्चों पर एक साथ दबाव झेल रही हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची अमेरिकी यील्ड एक तरफ से इन पर भारी पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ, केविन वॉर्श के नेतृत्व में Fed की बदलती नीतिगत दिशा और वैश्विक तेल बाजार से पैदा होने वाला बदलता रिस्क सेंटीमेंट भी इन करेंसियों की चाल को प्रभावित कर रहा है।
MUFG का कुल नजरिया यह है कि एशिया की करेंसियां इस वक्त एक नाजुक मोड़ पर खड़ी हैं। AI निर्यात से उपजी ग्रोथ की ताकत और अमेरिकी मौद्रिक नीति के सख्त होने का जोखिम दोनों एक साथ इन करेंसियों की दिशा तय करेंगे। जो भी पक्ष ज्यादा हावी होगा, वही एशिया FX की अगली बड़ी चाल को आकार देगा।













