लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट अपने नए शेयर बिक्री प्रस्ताव यानी आईपीओ के साथ आगामी सप्ताह में पूंजी बाजार में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी ने खुदरा और संस्थागत दोनों श्रेणी के निवेशकों के लिए ₹92 से ₹97 प्रति शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने कुल आईपीओ साइज में कटौती करते हुए इसे ₹1,617.5 करोड़ तय किया है, जबकि पहले इसे ₹2,342.3 करोड़ जुटाने के लक्ष्य के साथ तैयार किया गया था। इश्यू का आकार छोटा करने का फैसला कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या घटाने के निर्णय के बाद लिया गया है।
इश्यू साइज में कटौती और शेयरहोल्डर्स का फैसला
आईपीओ के कुल आकार को ₹2,342.3 करोड़ से घटाकर ₹1,617.5 करोड़ करने का निर्णय कंपनी के शुरुआती निवेशकों और प्रमोटर्स की संशोधित बिक्री रणनीति को दर्शाता है। ऑफर फॉर सेल के जरिए वेंचर कैपिटल फंड्स और प्रमुख शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में बेच रहे हैं। शिपरॉकेट के सबसे बड़े संस्थागत शेयरधारकों में शामिल लाइटरॉक इस प्रक्रिया में अपनी हिस्सेदारी बिक्री के लिए आगे आया है।
अगर बिक्री करने वाले प्रमुख फंड्स की बात करें, तो एलआर इंडिया फंड सबसे बड़ा बिकवाली भागीदार है, जो ₹272 करोड़ मूल्य के शेयर ऑफलोड कर रहा है। इसके बाद वेंचर कैपिटल फर्म ट्राइब कैपिटल का नाम आता है, जो लगभग ₹120 करोड़ मूल्य के शेयर बेचने की योजना बना रही है। इनके अलावा वैश्विक मीडिया और निवेश समूह बर्टल्समैन सहित कंपनी के प्रमुख संस्थापकों और नेतृत्वकर्ताओं साहिल गोयल, गौतम कपूर और विशेष खुराना द्वारा भी अपने शेयरों की बिक्री की जा रही है।
प्राइस बैंड, लॉट साइज और निवेश की राशि
प्राथमिक बाजार में निवेश करने के इच्छुक खुदरा निवेशक ₹92 से ₹97 प्रति शेयर के मूल्य दायरे में अपनी बोलियां लगा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए कंपनी ने एक लॉट का आकार 154 शेयरों का तय किया है। इसका तात्पर्य यह है कि ऊपरी प्राइस बैंड ₹97 के आधार पर एक खुदरा निवेशक को न्यूनतम ₹14,938 (154 शेयर गुणा ₹97) का निवेश करना होगा।
निवेशक अपनी इच्छा और वित्तीय क्षमता के अनुसार 154 शेयरों के गुणकों में अधिक लॉट के लिए आवेदन दर्ज कर सकते हैं। इस संपूर्ण पब्लिक इश्यू के प्रबंधन, बुक बिल्डिंग और अंडरराइटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए निवेश बैंकिंग फर्म एक्सिस कैपिटल को एकमात्र बुक रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।
आईपीओ टाइमलाइन: ओपनिंग, अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखें
शिपरॉकेट आईपीओ के लिए बोलियां लगाने की प्रक्रिया बुधवार, 12 अगस्त को सुबह खुलेगी। इच्छुक निवेशक और बाजार प्रतिभागी शुक्रवार, 14 अगस्त को आईपीओ बंद होने तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। तीन दिवसीय सबस्क्रिप्शन विंडो समाप्त होने के बाद, शेयरों के आवंटन के आधार को सोमवार, 17 अगस्त को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
जिन निवेशकों को शेयर आवंटित किए जाएंगे, उनके डिमैट खातों में शेयर जमा कर दिए जाएंगे। इसके बाद कंपनी के इक्विटी शेयरों की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर संभावित लिस्टिंग बुधवार, 19 अगस्त को होगी।
कंपनी का प्रोफाइल और बिजनेस मॉडल
साल 2011 में स्थापित शिपरॉकेट भारत की प्रमुख ई-कॉमर्स इनेबलमेंट और लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करने वाली कंपनी है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने एक मजबूत डिजिटल ढांचा तैयार किया है, जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स और बड़े रिटेलर्स को ऑनलाइन व्यापार स्थापित करने और उसे बढ़ाने में मदद करता है।
शुरुआत में एक शिपिंग एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई शिपरॉकेट ने अब अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। इसके प्रमुख समाधानों में घरेलू शिपिंग सेवाएं और शिपिंग सॉफ्टवेयर शामिल हैं, जो व्यापारियों को तुरंत पिकअप, रियल-टाइम ऑर्डर ट्रैकिंग, सुरक्षित डिलीवरी प्रबंधन और स्वचालित वजन सत्यापन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करते हैं। इन सेवाओं के जरिए छोटे विक्रेता अपने लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बेहतर बना पाते हैं।
आईपीओ फंड का इस्तेमाल और भविष्य की योजनाएं
शिपरॉकेट आईपीओ के नए फ्रेश इश्यू हिस्से से प्राप्त होने वाली पूंजी का उपयोग अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और बिजनेस ग्रोथ को गति देने के लिए करेगी। जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा बकाए कर्ज के भुगतान में खर्च करेगी, जिससे ब्याज का बोझ कम होगा और बैलेंस शीट मजबूत होगी।
बाकी बची राशि का उपयोग तकनीकी सुधारों, प्लेटफॉर्म विस्तार, रणनीतिक अधिग्रहणों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। विशेष रूप से कंपनी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक के एकीकरण और प्लेटफॉर्म के विस्तार के लिए योजना बनाई है ताकि डिलीवरी नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।



















