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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल के नरम पड़ने से डॉलर इंडेक्स 102 के करीब फिसलाबाज़ार
9 अक्तू॰ 2026, 9:33 am (1 घंटे पहले)· 0

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल के नरम पड़ने से डॉलर इंडेक्स 102 के करीब फिसला

ट्रेजरी यील्ड में नरमी और भू-राजनीतिक तनाव घटने से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स फिसलकर 102.02 के स्तर पर आ गया है, जबकि बाजार की नजरें अब आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़ों पर टिकी हैं।

DX-Y.NYB━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण9 अक्टूबर 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

DX-Y.NYB अभी $102 पर है, जबकि EMA20 $101, EMA50 $101 और EMA200 $99.54 पर हैं।

आगे संभावित चाल

EMA20 ($101) तक गिरावट पर खरीदार बचाव करते हैं।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

DX-Y.NYB का RSI 68 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया तेजी थमने और सरकारी बॉन्ड प्रतिफल में आई गिरावट के चलते डॉलर इंडेक्स (DXY) फिसलकर 102.02 के करीब पहुंच गया है। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य का आकलन करने वाले इस इंडेक्स में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान करीब 0.1% की कमजोरी दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स इससे पहले चालू साल के अपने उच्चतम स्तर 102.54 को पार करने में विफल रहा था, जिसके बाद गुरुवार देर शाम से ही इसमें तेज बिकवाली का दबाव देखा जा रहा था। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने इस बिकवाली को और हवा दी है।

ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर

अमेरिकी सरकार की प्रतिभूतियों पर मिलने वाले प्रतिफल में आई तेज गिरावट इस सुस्ती का मुख्य कारण बनी है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड गुरुवार के उच्च स्तर 5.35% से गिरकर 5.23% के आसपास आ गया है। बॉन्ड बाजार में यह राहत तब देखने को मिली जब कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया बढ़त थम गई। तेल की कीमतों में नरमी का सीधा संबंध अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने साफ किया कि मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के खिलाफ दोबारा कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस स्पष्टीकरण ने पश्चिम एशिया में नए सैन्य टकराव और तेल आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं को फिलहाल टाल दिया, जिससे सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड दोनों पर दबाव बना।

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आगामी सीपीआई डेटा और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति

विदेशी मुद्रा बाजार के कारोबारियों के लिए अगला सबसे बड़ा घटनाक्रम बुधवार को जारी होने वाला सितंबर महीने का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा होगा। यह मुद्रास्फीति आंकड़ा तय करेगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। वर्तमान में सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े दर्शाते हैं कि वित्तीय बाजारों ने इस कैलेंडर वर्ष के बचे हुए महीनों में कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि की संभावना को पूरी तरह समाहित कर लिया है। यदि महंगाई दर उम्मीद से अधिक रहती है तो केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है, जिससे डॉलर को दोबारा सहारा मिल सकता है।

दैनिक चार्ट पर तकनीकी तस्वीर और प्रमुख समर्थन स्तर

दैनिक मूल्य चार्ट के आधार पर डॉलर इंडेक्स का स्पॉट भाव 102.03 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। तकनीकी संरचना को देखें तो यह 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 101.24 से ऊपर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि अल्पकालिक रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है और इसे गतिशील समर्थन हासिल है। हालांकि, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 67.91 के स्तर पर मँडरा रहा है, जो ओवरबॉट यानी अत्यधिक खरीद वाले क्षेत्र के ठीक नीचे है। यह संकेत देता है कि बढ़त की रफ्तार मजबूत तो है, लेकिन अब यह एक परिपक्व चरण में प्रवेश कर रही है जहां से आगे की तेजी धीमी हो सकती है या कुछ समय के लिए ठहराव आ सकता है।

नीचे की ओर, डॉलर के लिए तात्कालिक मजबूत समर्थन 20-दिवसीय EMA यानी 101.24 पर स्थित है। यदि डॉलर इस स्तर से नीचे निर्णायक रूप से टूटता है, तो इसकी तेजी की संरचना कमजोर पड़ जाएगी और पहले के कंसॉलिडेशन जोन की ओर एक गहरी गिरावट का रास्ता खुल सकता है। वहीं ऊपर की ओर, इस साल का उच्चतम स्तर 102.54 सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है, जिसे पार किए बिना नई लंबी तेजी की उम्मीद कम है।

वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में डॉलर की भूमिका और इतिहास

अमेरिकी डॉलर (USD) संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक राष्ट्रीय मुद्रा है, साथ ही यह दुनिया भर के कई अन्य देशों में स्थानीय नोटों के साथ प्रचलन में रहने वाली वास्तविक यानी 'डी फैक्टो' मुद्रा भी है। यह वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जिसकी विदेशी मुद्रा विनिमय के कुल वैश्विक दैनिक कारोबार में 88% से अधिक की हिस्सेदारी है। साल 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस बाजार में औसतन 6.6 लाख करोड़ डॉलर ($6.6 ट्रिलियन) का दैनिक लेन-देन दर्ज किया जाता है।

दूसरे विश्व युद्ध के समापन के बाद, अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह ली और दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा बन गया। अपने लंबे इतिहास के अधिकांश हिस्से में अमेरिकी डॉलर सोने के समर्थन पर आधारित था, लेकिन साल 1971 में हुए ब्रेटन वुड्स समझौते के खात्मे के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद से यह एक पूरी तरह से फिएट मुद्रा प्रणाली के तहत काम कर रहा है।

फेडरल रिजर्व के दोहरे लक्ष्य, मात्रात्मक सहजता और सख्ती

अमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा एकल कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के पास दो प्राथमिक अधिदेश हैं: पहला कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, और दूसरा अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेडरल रिजर्व मुख्य रूप से ब्याज दरों को घटाने या बढ़ाने का सहारा लेता है। जब उपभोक्ता कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई फेड के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग और कीमत में मजबूती आती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2% से नीचे गिर जाती है या बेरोजगारी दर बहुत बढ़ जाती है, तो फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका नकारात्मक असर डॉलर की ताकत पर पड़ता है।

असाधारण वित्तीय संकटों के समय, फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापने और मात्रात्मक सहजता (Quantitative Easing या QE) लागू करने का गैर-पारंपरिक कदम भी उठा सकता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली में तरलता और ऋण प्रवाह को काफी हद तक बढ़ा देता है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे को उधार देने का भरोसा खत्म हो जाता है और केवल ब्याज दरें घटाने से अर्थव्यवस्था को गति नहीं मिल पाती। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय फेडरल रिजर्व ने वित्तीय संस्थानों से बड़े पैमाने पर सरकारी बॉन्ड खरीदकर यही रास्ता अपनाया था। मात्रात्मक सहजता आमतौर पर डॉलर को कमजोर करती है।

इसके ठीक उलट प्रक्रिया को मात्रात्मक सख्ती (Quantitative Tightening या QT) कहा जाता है। इसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन को नए बॉन्ड में फिर से निवेश नहीं करता। इस कदम से बाजार में डॉलर की आपूर्ति घटती है, जो सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक और उसे मजबूती देने वाला साबित होता है।

अन्य प्रमुख मुद्राओं, सोने और तेल पर असर

डॉलर के कमजोर पड़ने का असर अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा गया। शुक्रवार को प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर साबित हुआ। एशियाई कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ा, जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से दोहरा समर्थन मिला।

दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा। जापान के घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने येन पर भारी दबाव डाला। डॉलर की कमजोरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच जापानी अर्थव्यवस्था की इस कमजोरी ने इस जोड़ी की गिरावट को सीमित कर दिया। इस बीच, सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई और यह दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए $4,200 प्रति औंस की ओर बढ़ गया। डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में सुस्ती ने सर्राफा बाजार को राहत दी है, हालांकि दैनिक चार्ट पर सोने का आरएसआई अब भी मंदी के संकेत दे रहा है।

सवाल-जवाब

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में ताजा गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 5.35% से गिरकर 5.23% पर आना और कच्चे तेल में आई नरमी इसकी मुख्य वजह है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या बयान दिया है?
उन्होंने पुष्टि की है कि मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स के लिए महत्वपूर्ण समर्थन स्तर कौन सा है?
डॉलर के लिए प्राथमिक समर्थन स्तर 20-दिवसीय ईएमए 101.24 पर स्थित है।
आने वाले दिनों में डॉलर के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर क्या रहने वाला है?
बुधवार को जारी होने वाला सितंबर का अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति डेटा अगला बड़ा ट्रिगर होगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·32 मिनट पहले

बाजार में उतार-चढ़ाव तो चलता रहता है, पर आंकड़े आने से पहले थोड़ा संभलकर चलना ही ठीक है।

Michael Anderson@michael-anderson·52 मिनट पहले

ट्रंप के इस बयान से सचमुच चैन की सांस मिली। जब मैं पिछले साल वाशिंगटन में था, तब ईरान को लेकर हर कोई डरा हुआ था कि बाजार किसी भी समय क्रैश हो सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·52 मिनट पहले

माइकल, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। ईरान को लेकर तनाव कम होने से बाजार को बड़ी राहत मिली है।

Ravikash Gupta@ravikash·58 मिनट पहले

ट्रंप का ईरान पर बयान आते ही कच्चे तेल के दाम थम गए, बाज़ार को राहत मिल गई।

Rohan Gupta@rohan-gupta·58 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो सही है पर क्या आपको लगता है कि ईरान पर यह शांति चुनाव तक ही टिकेगी?

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