राजस्थान के अलवर जिले अंतर्गत कठूमर क्षेत्र में कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन सह-प्रभारी दीपक बालियान के आवास पर पुलिस के कदम रखने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। मानखेड़ा गांव में स्थित उनके घर पर बुधवार की देर शाम शुरू हुआ यह घटनाक्रम सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम के सीधे प्रसारण में भी दर्ज हुआ। इस पूरे वाकये को लेकर राजनीतिक दल और पुलिस प्रशासन के बीच तीखा टकराव सामने आ रहा है, जहां पार्टी ने प्रशासन पर मनमानी और अवैध हिरासत का आरोप जड़ा है, वहीं पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया है।
सोशल मीडिया पर सीधा संवाद और पुलिस दल की आमद
पार्टी की ओर से साझा किए गए विवरण के अनुसार, बुधवार रात लगभग 8 बजे पुलिसकर्मी सबसे पहले मानखेड़ा गांव स्थित दीपक बालियान के घर पहुंचे थे। उस वक्त जवानों ने बालियान से स्थानीय थाने में उपस्थित होने के लिए कहा। थाने बुलाए जाने का कोई स्पष्ट कारण न मिलने पर बालियान ने अपने स्मार्टफोन से इंस्टाग्राम पर लाइव प्रसारण शुरू कर दिया और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों से जवाब मांगने लगे। इस दौरान उनके साथ दल के एक अन्य नेता आशुतोष रांका भी डिजिटल रूप से जुड़े और बातचीत में शामिल हुए।
वायरल हुए इस वीडियो फुटेज में कठूमर थाने के ड्यूटी ऑफिसर एवं हेड कांस्टेबल पप्पू खान अपने दल के साथ खड़े दिखाई दिए। रिकॉर्डिंग के दौरान बालियान लगातार यह मांग कर रहे थे कि उन्हें बुलाने का ठोस आधार बताया जाए और उच्चाधिकारियों से उनकी सीधे बातचीत कराई जाए। इसी बातचीत के क्रम में रांका ने भी जवानों से कानूनी आधार की जानकारी मांगी। प्राथमिक बातचीत खत्म होने पर पुलिसकर्मी वहां से रवाना हो गए। हालांकि दल का आरोप है कि पुलिस दल ने दोबारा लौटकर वीडियो फुटेज हटाने का दबाव बनाया था।
रात दस बजे दो वाहनों में पहुंचे जवान, हिरासत पर खींचतान
पार्टी का कहना है कि जब वीडियो इंटरनेट से नहीं हटाया गया, तो रात करीब 10 बजे पुलिस के दो वाहन अचानक बालियान के घर पहुंचे। इन जीपों में सवार होकर आए सुरक्षाकर्मी दीपक बालियान को अपने साथ ले गए। इस पूरे घटनाक्रम के तुरंत बाद संगठन ने पुलिसिया कार्रवाई की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए और इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया। दूसरी तरफ, पुलिस विभाग के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की गैरकानूनी या अवैध हिरासत नहीं की गई है और सारे आरोप बेबुनियाद हैं।
इस पूरे मामले में वीडियो में दिखाई दिए हेड कांस्टेबल पप्पू खान ने अपना पक्ष रखा है। खान ने बताया, "अधिकारियों की ओर से निर्देश मिले थे कि दीपक बालियान को थाने आने के लिए सूचित किया जाए।" उन्होंने आगे कहा कि वह इलाके में सामान्य गश्त पर तैनात थे और दिए गए निर्देशों के पालन में ही बालियान के घर तक गए थे। खान के मुताबिक, उस प्रारंभिक सूचना के बाद मौके पर क्या कुछ घटित हुआ, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी और चुनावी विवाद का संदर्भ
दीपक बालियान के आवास पर हुई यह पुलिसिया हलचल ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आई है जब कॉकरोच जनता पार्टी ने राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर आंदोलन की रूपरेखा तय कर रखी है। संगठन ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का खुला आह्वान किया है। यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। दल की मुख्य चिंता यह है कि मतदाता सूची के इस व्यापक पुनरीक्षण अभियान के चलते एक बड़े जनसमूह से उनके वोट का अधिकार छिन सकता है। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी जोरदार विरोध दर्ज कराने की घोषणा की है।
सीजेपी के वरिष्ठ नेता आशुतोष रांका ने साफ किया है कि पुलिस की इस कार्रवाई से आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही दिल्ली में जुटान होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दल के तमाम कार्यकर्ता किसी भी गिरफ्तारी या पुलिसिया दबाव का सामना करने के लिए तैयार हैं। संगठन में बालियान का कद काफी अहम माना जाता है, जिन्हें अगस्त 2026 में ही पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन सह-प्रभारी के साथ-साथ नॉर्थ जोन का प्रभार सौंपा था। इसी संगठनात्मक जिम्मेदारी के बीच अचानक हुए इस घटनाक्रम ने पूरे इलाके में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।



















