अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में सफेद धातु यानी चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली है। कच्चे तेल के दामों में आई ताजा गिरावट ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को लेकर बनी चिंताओं को कुछ हद तक शांत किया है। ऊर्जा कीमतों के घटने से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं पर ब्रेक लगा है, जिससे डॉलर के दबाव में कमी आई और चांदी को संभलने का ठोस आधार मिला। इसके चलते XAG/USD का भाव 60 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। हालांकि इस उछाल के बावजूद तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि दीर्घावधि रुझान अब भी पूरी तरह से मंदड़ियों के चंगुल से बाहर नहीं निकला है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल में गिरावट
ऊर्जा बाजार में यह राहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ताजा बयान के बाद देखने को मिली, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बेहद रचनात्मक बातचीत चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिका की तरफ से ईरान पर किसी भी तरह के सैन्य हमले का कोई इरादा नहीं है। कूटनीतिक मोर्चे पर तनाव घटने की इस खबर से तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम कम हुआ और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। चूंकि ऊर्जा की ऊंची कीमतें ही पिछले काफी समय से वैश्विक महंगाई को हवा दे रही थीं, इसलिए तेल की कमजोरी ने सीधे तौर पर वित्तीय बाजारों में जोखिम उठाने की क्षमता को सहारा दिया।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का समीकरण
महंगाई के दबाव में नरमी आने से ब्याज दरों को लेकर बाजार का मिजाज बदला है। CME FedWatch टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि व्यापारी अब चालू महीने की आगामी नीतिगत बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की केवल 17.7 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं। यह आंकड़ा महज एक सप्ताह पहले के 38 प्रतिशत के अनुमान से काफी नीचे आ चुका है। हालांकि बाजार अभी भी इस बात को लेकर काफी हद तक आश्वस्त है कि फेडरल रिजर्व अपनी दिसंबर की बैठक में सख्ती दिखा सकता है, जहां ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना करीब 83 प्रतिशत आंकी जा रही है।
इसी बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता वॉलर ने मौद्रिक सख्ती के पक्ष में कड़ा रुख पेश किया है। उनके हालिया संबोधन को नीतिगत सख्ती के पैमाने पर 10 में से 8 अंक दिए गए हैं, जो कि 7.2 के ऐतिहासिक औसत से कहीं अधिक आक्रामक है। वॉलर ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि महंगाई को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए और दर वृद्धियों की आवश्यकता है, भले ही वे लगातार हर बैठक में न की जाएं। उनके अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI में भारी निवेश और ऊर्जा के झटकों से महंगाई की ताकतें लगातार बनी हुई हैं, जबकि मजबूत होती अर्थव्यवस्था और ठोस श्रम बाजार केंद्रीय बैंक को सख्त रुख बनाए रखने की छूट देते हैं। करीब साढ़े पांच वर्षों से लक्ष्य से ऊपर बनी महंगाई अगर अनियंत्रित होती है तो यह डॉलर को और मजबूती दे सकती है, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों पर असर पड़ना तय है।
तकनीकी विश्लेषण और चार्ट पर प्रमुख स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो XAG/USD 60.10 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, जहां निकट अवधि का रुझान मंदड़ियों के पक्ष में बना हुआ है। हाजिर भाव अपने अल्पकालिक और मध्यमकालिक दोनों ही घातीय मूविंग एवरेज यानी EMA से नीचे बना हुआ है। नौ-अवधि और 50-अवधि के EMA ऊपर स्थित हैं, जो चांदी के लिए एक बहुस्तरीय तकनीकी रुकावट का काम कर रहे हैं। वहीं 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI करीब 40.7 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि बाजार अभी पूरी तरह से ओवरसोल्ड नहीं हुआ है बल्कि उस पर नीचे की तरफ का दबाव लगातार जारी है।
ऊपर की ओर पहला मजबूत प्रतिरोध नौ-अवधि के EMA के करीब 60.74 डॉलर पर स्थित है। यदि भाव इस बाधा को पार कर लेता है, तो अगला बड़ा प्रतिरोध 50-अवधि के EMA पर 63.39 डॉलर के आसपास होगा। बाजार में एक ठोस और टिकाऊ सुधार के लिए इस स्तर के ऊपर टिकाव बेहद जरूरी है। इसके अभाव में यदि मौजूदा स्तरों से फिसलन बढ़ती है, तो चार्ट पर कोई स्पष्ट संरचनात्मक सहारा न होने के कारण भाव नए निचले स्तरों की तलाश में और गिर सकता है।
लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार जिंस सत्र के दौरान चांदी वायदा (SI=F) 59.06 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था, जिसमें पिछले बंद स्तर 59.90 डॉलर के मुकाबले 1.39 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी का दायरा 45.85 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिन के औसत से 1.70 गुना अधिक बना हुआ है। अन्य संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 36 पर आ गया है, जबकि MACD -1.39 पर है जो सिग्नल लाइन -0.98 से नीचे रहकर मंदी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय EMA 62.24 डॉलर, 50-दिवसीय EMA 63.56 डॉलर और 200-दिवसीय EMA 67.41 डॉलर पर है। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे होना एक डेथ क्रॉस दर्शाता है जो लंबी अवधि की मंदी की पुष्टि करता है। बॉलिंगर बैंड्स 58.14 डॉलर से 67.37 डॉलर के दायरे में हैं, और दैनिक अस्थिरता सूचकांक ATR 1.41 डॉलर दर्ज किया गया है। पिवट बिंदु 59.01 डॉलर पर है, जिसमें निकटतम प्रतिरोध R1 59.11 डॉलर व R2 59.16 डॉलर और समर्थन S1 58.96 डॉलर व S2 58.87 डॉलर पर आंका गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में चांदी का दोहरा चरित्र
चांदी की गिनती दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सबसे सक्रिय रूप से कारोबार की जाने वाली कीमती धातुओं में होती है। ऐतिहासिक रूप से इसे मूल्य के भंडारण और विनिमय के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। यद्यपि सोने की तुलना में इसका व्यापार कुछ कम व्यापक है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव यानी हेजिंग के लिए चांदी की ओर रुख करते हैं। निवेशक इसे भौतिक रूप से सिक्कों और सिल्लियों के रूप में खरीद सकते हैं, या फिर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF जैसे वित्तीय साधनों के जरिए इसका व्यापार कर सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय हाजिर कीमतों पर नजर रखते हैं।
चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव कई जटिल कारकों पर निर्भर करता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी आर्थिक मंदी की आशंका के समय चांदी को भी सोने की तरह एक सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन माना जाता है, हालांकि इसका प्रभाव सोने जितना गहरा नहीं होता। चूंकि चांदी पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलता, इसलिए केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती किए जाने पर इसके दाम आमतौर पर चढ़ते हैं। इसके अलावा चांदी का भाव अमेरिकी डॉलर में तय होने के कारण डॉलर की सेहत भी इसका रास्ता तय करती है। मजबूत डॉलर चांदी पर दबाव बनाता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को पंख लगाता है। खनन आपूर्ति, जो कि सोने से काफी अधिक प्रचुर है, और रीसाइक्लिंग की दरें भी इसकी आपूर्ति को प्रभावित करती हैं।
एक कीमती धातु होने के साथ-साथ चांदी एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा माल भी है। सभी ज्ञात धातुओं में सबसे अधिक विद्युत चालकता होने के कारण इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा के फोटोवोल्टिक उपकरणों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। तांबे और सोने से भी बेहतर चालकता के कारण हरित ऊर्जा की दिशा में बढ़ते कदम चांदी की औद्योगिक मांग को लगातार गति दे रहे हैं। ऐसे में औद्योगिक मांग का बढ़ना कीमतों को सीधे ऊपर धकेलता है।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक गतिविधियां चांदी के भाग्य का फैसला करती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी की खपत करते हैं। वहीं भारत में आम उपभोक्ताओं और आभूषण प्रेमियों की मांग दुनिया भर में चांदी के हाजिर भाव तय करने में एक निर्णायक भूमिका निभाती है। त्योहारों और शादियों के मौसम में भारतीय मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में संतुलन बनाती है।
सोने के साथ संबंध और व्यापक मुद्रा बाजार का हाल
कीमती धातुओं के बाजार में चांदी की चाल काफी हद तक सोने के पदचिन्हों पर चलती है। जब सोने में तेजी आती है, तो चांदी भी आमतौर पर उसी दिशा में आगे बढ़ती है। दोनों धातुओं के बीच के मूल्य संबंध को मापने के लिए विश्लेषक गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का उपयोग करते हैं। यह अनुपात बताता है कि सोने के एक औंस का मूल्य प्राप्त करने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। जब यह अनुपात ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर चला जाता है, तो कई निवेशक मानते हैं कि चांदी अपनी वास्तविक कीमत से कम आंकी जा रही है या सोना अत्यधिक महंगा हो चुका है। इसके विपरीत जब अनुपात नीचे आता है, तो यह चांदी के मुकाबले सोने के अपेक्षाकृत सस्ते होने का संकेत देता है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी इस व्यापक आर्थिक उथल-पुथल का गहरा असर देखा जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात भर आई नरमी ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे धकेला, जिससे अन्य मुद्राओं को राहत मिली। एशियाई व्यापार सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश करता दिखा, जहां ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक RBA की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों ने भी इसे सहारा दिया। दूसरी ओर USD/JPY का भाव 158.00 के आसपास अपनी बढ़त पर टिका रहा, क्योंकि जापान में घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने येन पर दबाव बनाए रखा। वहीं सोना अपने दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए शुक्रवार को 4,200 डॉलर प्रति औंस की ओर मजबूती से कदम बढ़ाता दिखा। तेल और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के साथ डॉलर के नरम पड़ने से सोने को बल मिला है, भले ही इसका दैनिक RSI अब भी सतर्कता बरतने की सलाह दे रहा हो।
























