अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। हाजिर सोने की कीमत 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 4,175 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है, जबकि हाजिर चांदी करीब 2 प्रतिशत चढ़कर 60.6 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। चांदी अब तेजी से 61 डॉलर प्रति औंस के स्तर की ओर बढ़ रही है। वैश्विक रुझानों को देखते हुए घरेलू बाजार में भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में इस मजबूती का असर दिखने की पूरी संभावना है।
कच्चे तेल के दामों में गिरावट और मध्य पूर्व का तनाव
कमोडिटी बाजार में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका इस समय ईरान के साथ उपयोगी बातचीत कर रहा है और मध्यावधि चुनावों से पहले देश पर हमला करने से परहेज करेगा। राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ऊर्जा बाजार में आपूर्ति संबंधी आशंकाएं कुछ हद तक शांत हुईं, जिससे कच्चे तेल के दामों में गिरावट देखने को मिली।
हालांकि, भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसी हफ्ते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर अपने हमले तेज कर दिए थे। इसके अलावा, एक समुद्री तूफान के कारण मेक्सिको की खाड़ी में अमेरिकी अपतटीय कच्चा तेल उत्पादन भी बाधित हुआ है। इन जटिल परिस्थितियों के बीच सुरक्षित निवेश के तौर पर बुलियन बाजार को मजबूत सहारा मिला है और निवेशकों का रुझान सोने व चांदी की ओर बना हुआ है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स की चाल
मुद्रा और ऋण बाजार में भी कई अहम हलचलें देखने को मिल रही हैं। अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड शुक्रवार को 5.23 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी रही। 30 वर्षीय बॉन्ड की सफल नीलामी के बाद यह यील्ड अपने 24 साल के उच्चतम स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है। वहीं, 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 5.61 प्रतिशत के आसपास स्थिर दर्ज की गई।
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर में मामूली गिरावट दर्ज की गई, हालांकि डॉलर इंडेक्स 102 के स्तर के आसपास ही टिका रहा। बॉन्ड प्रतिफल में स्थिरता और डॉलर पर बने दबाव ने कीमती धातुओं की कीमतों को ऊपर बनाए रखने में मदद की है, क्योंकि डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए सोना-चांदी अधिक आकर्षक हो जाते हैं।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का परिदृश्य
वित्तीय बाजारों में इस समय अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत कदमों का गहन आकलन किया जा रहा है। वित्तीय बाजार मौजूदा समय में इस बात की लगभग 82 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा और दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, दिसंबर की बैठक को लेकर बाजार का रुख अलग है, जहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 81 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है।
ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयान भी नीतिगत सख्ती का संकेत दे रहे हैं। गुरुवार को सेंट लुइस फेड के अध्यक्ष अल्बर्टो मुसालेम ने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति को केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक वापस लाने के लिए अगले छह से नौ महीनों में ब्याज दरों को बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। आगामी महीनों में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेतों के बावजूद मौजूदा समय में सुरक्षित निवेश की मांग सोने और चांदी को नई रफ्तार दे रही है।


















