अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती के कारण वैश्विक मुद्राओं पर दबाव साफ तौर पर गहराता जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी दर्ज की गई है, जबकि यूरो के मुकाबले पाउंड में मामूली मजबूती दिखाई दी है। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने बाजार विश्लेषकों की उम्मीदों को झटका दिया है, जिससे बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। वैश्विक निवेशक इस समय प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों और बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं।
ब्रिटेन के आर्थिक आंकड़ों में नरमी और बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरें
यूनाइटेड किंगडम के सितंबर महीने के पीएमआई आंकड़े विश्लेषकों के अनुमान से कमजोर रहे हैं। कंपोजिट पीएमआई गिरकर तीन महीने के निचले स्तर 51.7 पर आ गया, जबकि अगस्त में यह 52.5 पर था और बाजार को इसके 52.0 पर रहने की उम्मीद थी। इन आंकड़ों के ब्योरे से पता चलता है कि सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ी है, हालांकि विनिर्माण गतिविधियों में कुछ सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव पहले से अधिक तीव्र होता दिखाई दे रहा है, जो नीति निर्माताओं के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहा है।
स्वैप्स कर्व के मौजूदा संकेतों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अगले बारह महीनों में ब्याज दरों में लगभग 100 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह 4.75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं को देखते हुए यह संभावना भी जताई जा रही है कि केंद्रीय बैंक को शायद बाजार की उम्मीदों के अनुरूप इतनी ज्यादा सख्ती करने की आवश्यकता न पड़े। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पहले से ही अपनी पूरी क्षमता से नीचे काम कर रही है। इसके अलावा 3.75 प्रतिशत की मौजूदा बैंक दर बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के अनुमानित तटस्थ दायरे के ऊपरी स्तर के करीब है, और आने वाले समय में राजकोषीय नीति के और अधिक प्रतिबंधात्मक होने की पूरी संभावना है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर बिकवाली का असर
बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर भी बिकवाली का नया दबाव देखा गया, जहां यह 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के फ्लैश पीएमआई आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र संकुचन के दायरे में फिसल गया। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने बहुत धीमी गति से विस्तार दर्ज किया गया है। घरेलू आर्थिक नरमी के अलावा अमेरिकी डॉलर की तेजी इस मुद्रा जोड़ी के लिए बड़ी बाधा बन रही है, जबकि कारोबारी गुरुवार को होने वाली ट्रंप और शी की महत्वपूर्ण शिखर वार्ता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं, बाजार ने अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत के घटनाक्रम पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति
जापानी येन के मोर्चे पर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी बुधवार के एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर के आसपास बनी रही, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के काफी करीब है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7 के मुकाबले 2 मतों से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की व्यापक उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप था।
हालांकि, बैंक ऑफ जापान की इस ब्याज दर वृद्धि के अपेक्षाकृत नरम रहने से जापानी येन पर दबाव लगातार बना हुआ है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के बीच डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे इस जोड़ी को सहारा मिल रहा है। इसके बावजूद, बाजार में जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित मुद्रा हस्तक्षेप की आशंकाओं ने डॉलर की बढ़त को सीमित कर रखा है। निवेशक ट्रंप और शी के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से पहले अमेरिका-ईरान की अप्रत्यक्ष वार्ता पूरी होने के घटनाक्रम पर बहुत कम ध्यान दे रहे हैं।
सोने की कीमतों में फिसलन
अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण सर्राफा बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ी है। गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर ऊंची ब्याज दरों का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसके चलते सोने पर लगातार दबाव देखा जा रहा है। वैश्विक बाजार में सोना लगभग 4,315 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, जो दिन के आधार पर 1.0 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। मुद्रा बाजार और कीमती धातुओं में यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि केंद्रीय बैंकों के आगामी नीतिगत कदम आने वाले दिनों में वित्तीय संपत्तियों की दिशा तय करने में बेहद अहम भूमिका निभाएंगे।


















