घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है, और इसी सिलसिले में रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स समाधान प्रदान करने वाली अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड के शेयरों में निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। बुधवार को शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई शेयरों में खरीदारी की वापसी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयर में मामूली नरमी दर्ज की गई। एनएसई पर 23 सितंबर को दोपहर 2:39 बजे कंपनी का शेयर 0.27 प्रतिशत फिसलकर 405.65 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इस कारोबारी सत्र में स्टॉक 410 रुपये पर खुला, दिन के उच्चतम स्तर 412.40 रुपये तक गया और निचले स्तर पर 403.50 रुपये तक भी पहुंचा।
ऑर्डर बुक में तेज उछाल से बढ़ा कारोबारी भरोसा
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का मुख्य व्यवसाय रक्षा, एयरोस्पेस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े जटिल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और तकनीकी समाधानों की आपूर्ति करना है। पिछले कुछ तिमाहियों में कंपनी के कारोबारी आंकड़े यह दिखाते हैं कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण को प्राथमिकता मिलने से निजी आपूर्तिकर्ताओं का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। बाजार का ध्यान खींचने वाली सबसे बड़ी वजह कंपनी के ऑर्डर बुक में आया भारी इजाफा है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1FY26) में कंपनी का ऑर्डर बुक 735 करोड़ रुपये पर था, जो वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1FY27) तक उछलकर 1,704 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
इतने बड़े पैमाने पर मिले ऑर्डर्स निवेशकों को कंपनी की भविष्य की आय और व्यावसायिक निरंतरता को लेकर एक स्पष्ट दृश्यता प्रदान करते हैं। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केवल ऑर्डर हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कंपनी कितनी तेजी से इन ऑर्डर्स को पूरा करके राजस्व में बदल पाती है और अपने परिचालन मुनाफे के मार्जिन को बरकरार रखती है, यह आने वाले समय में प्रदर्शन का मुख्य पैमाना रहेगा।
भविष्य के नए प्रोजेक्ट्स और प्रबंधन की योजनाएं
हैदराबाद स्थित इस इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता का प्रबंधन आगे के विकास को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहा है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का अनुमान है कि पूरे वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान उसे 2,500 करोड़ रुपये से लेकर 3,000 करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त नए ऑर्डर्स मिलने की पूरी संभावना है। ये सभी आगामी व्यावसायिक अवसर मुख्य रूप से विभिन्न मिसाइल कार्यक्रमों और अन्य रणनीतिक रक्षा परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं, जहां उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अत्यधिक मांग रहती है।
आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने कंपनी की स्थिति का आकलन करते हुए कहा है कि अपोलो माइक्रो सिस्टम्स रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में अपनी मजबूत मौजूदगी का फायदा उठाने की पूरी क्षमता रखती है। ब्रोकरेज के विश्लेषण के अनुसार, कंपनी के पास अब तक 700 से अधिक तकनीकी नवाचार दर्ज हैं और इसने 150 से अधिक स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई है।
तकनीकी क्षमताएं और 485 रुपये का 12 महीने का लक्ष्य
रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो आधुनिक युद्धक तकनीकों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों की भूमिका काफी बढ़ चुकी है। ब्रोकरेज ने विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित किया है जहां कंपनी के लिए नए दरवाजे खुल रहे हैं, जिनमें हवा में मंडराने वाले हथियार (लोइटरिंग म्यूनिशन्स), मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी), डायरेक्टेड एनर्जी हथियार और हाइपरसोनिक वाहन शामिल हैं। इन जटिल कार्यक्रमों में विशेष प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, मार्गदर्शन, नियंत्रण और एम्बेडेड तकनीक की जरूरत होती है, जो अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के मुख्य उत्पाद पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं।
इन सभी बुनियादी मजबूतियों और भविष्य की कमाई की संभावनाओं के आधार पर आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयर के लिए 12 महीने का टारगेट प्राइस 485 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। ब्रोकरेज ने अपने मूल्यांकन को वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) की अनुमानित कंसोलिडेटेड आय के 60 गुना पीई अनुपात पर आधारित किया है। इसके अलावा, मूल्यांकन के हिस्से के रूप में प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स के लिए 67 रुपये प्रति शेयर का मूल्य भी जोड़ा गया है। वर्तमान में 405.65 रुपये के भाव पर चल रहा यह शेयर ब्रोकरेज के तय लक्ष्य से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है, और अब निवेशकों की पूरी नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि कंपनी नए ऑर्डर कितनी तेजी से जीतती है और मौजूदा 1,704 करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक का निष्पादन किस गति से करती है।


















