हंगरी के केंद्रीय बैंक हंगेरियन नेशनल बैंक (MNB) ने मौद्रिक नीति समीक्षा में अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 5.50 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के जोखिमों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया है। इसके साथ ही बैंक ने मध्यम अवधि के मुद्रास्फीति लक्ष्य को 2028 से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने की घोषणा की है। वहीं वर्ष 2027 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान में मामूली बढ़ोतरी की है। प्रशासनिक एवं नीतिगत मोर्चे पर एक बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए केंद्रीय बैंक ने निर्णय लिया है कि वर्ष 2027 से नीतिगत दरों पर फैसले के लिए हर महीने बैठक करने के बजाय साल भर में केवल आठ बैठकें आयोजित की जाएंगी।
सतर्क नीतिगत रुख और हंगेरियन फ़ोरिंट की चाल
कमर्जबैंक की विश्लेषक आंत्ये प्रेफके ने हंगेरियन केंद्रीय बैंक के इस फैसले का मूल्यांकन करते हुए कहा कि जब तक ब्याज दरों में दोबारा कटौती का सिलसिला शुरू नहीं होता, तब तक बैंक का यह सतर्क और आंकड़ों पर आधारित दृष्टिकोण हंगेरियन फ़ोरिंट (HUF) के लिए सहारा देने वाला साबित होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि मुख्य मुद्दा अंततः यूरो क्षेत्र के साथ तालमेल बिठाने का है और मौजूदा कम मुद्रास्फीति दर इस निर्णय को समर्थन देती है। हालांकि, सूखे और ऊर्जा की कीमतों की वजह से मुद्रास्फीति से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं, जिसे केंद्रीय बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में भी स्वीकार किया है।
दरों को 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप रहा। मौद्रिक समीक्षा के बाद हंगेरियन मुद्रा फ़ोरिंट में शुरुआती बढ़त दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो में आई कमजोरी के दबाव के कारण इसने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती का चक्र फिर से शुरू नहीं करता, तब तक उसकी मौजूदा मौद्रिक नीति फ़ोरिंट के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनी रहेगी।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर का दबाव और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
हंगरी के घटनाक्रम के साथ ही व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर का दबदबा साफ नजर आ रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) मुद्रा जोड़ी नए बिकवाली दबाव में आ गई और 0.7100 के स्तर का परीक्षण करती दिखी। ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती फ्लैश पीएमआई आंकड़ों ने संकेत दिया कि विनिर्माण क्षेत्र संकुचन के दायरे में आ गया है, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार कर रहा है। इन कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट को और तेज कर दिया। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती इस जोड़ी के लिए बाधा बनी हुई है, जबकि निवेशक गुरुवार को होने वाले ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस बीच, बाजारों ने अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत के दौर को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया है।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि और जापानी येन पर असर
एशियाई सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन (USD/JPY) 157.00 के मध्य स्तर के आसपास बना रहा, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम है, जो कई हफ्तों से बाजार की व्यापक अपेक्षाओं से पूरी तरह मेल खाता था। हालांकि, बैंक ऑफ जापान की इस बढ़ोतरी को बाजार ने अपेक्षाकृत नरम माना, जिसके चलते जापानी येन लगातार दबाव में रहा। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख के कारण डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे USD/JPY को अतिरिक्त समर्थन मिल रहा है। हालांकि, जापानी येन में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने इस जोड़ी की आगे की बढ़त को सीमित कर रखा है।
सोने की कीमतों में गिरावट और फेडरल रिजर्व का रुख
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोने में लगातार गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन 4,300 डॉलर के निचले स्तर से हुई आंशिक रिकवरी पलट गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत दृष्टिकोण के चलते डॉलर की लगातार खरीदारी जारी रही। ब्याज न देने वाली पीली धातु यानी सोने से निवेशकों का रुझान हटने और पूंजी प्रवाह डॉलर की तरफ मुड़ने का मुख्य कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक का सख्त रुख ही माना जा रहा है।
वाशिंगटन में ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर टिकीं वैश्विक निगाहें
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सबसे बड़ी घटना गुरुवार को होने जा रही है, जब संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वाशिंगटन में एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए मिलेंगे। वित्तीय बाजार इस बैठक पर बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका और चीन के बीच कई महीनों से व्यापारिक तनाव में कमी देखी जा रही थी। ऐसे में यह बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने मौजूदा व्यापारिक समझौते और शांति को आगे बढ़ाएंगी या फिर वे अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेंगी।



















