अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और जापानी येन के बीच का लेन-देन यानी ईयूआर/जेपीवाई क्रॉस इस समय किसी साफ दिशा में आगे बढ़ने के लिए जूझ रहा है। एक तरफ जहां यूरोप के निजी क्षेत्र से आए ताजा कारोबारी आंकड़े बेहद उत्साहजनक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जर्मनी के भीतर गहराते राजनीतिक संकट ने साझा मुद्रा यूरो की बढ़त पर ब्रेक लगा दिया है। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान के नीतिगत रुख ने येन को कमजोर बनाए रखा है, जिससे इस जोड़ी को नीचे के स्तरों पर सहारा मिल रहा है। विभिन्न आर्थिक और राजनीतिक संकेतों के टकराव के चलते वैश्विक बाजार में कारोबारी किसी भी बड़े दांव से बचते दिखाई दे रहे हैं।
यूरोपीय अर्थव्यवस्था में उछाल और ईसीबी पर ब्याज दर बढ़ाने का दबाव
यूरो क्षेत्र से सामने आए एचसीओबी कंपोजिट पीएमआई के शुरुआती आंकड़ों ने विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए जोरदार उछाल दर्ज किया है। सितंबर के दौरान यह सूचकांक बढ़कर 53.1 पर पहुंच गया, जो अप्रैल 2023 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। इस कारोबारी विस्तार में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र दोनों ने मजबूत भूमिका निभाई है, हालांकि सितंबर के महीने में मुख्य बढ़त सेवा क्षेत्र की गतिविधियों के दम पर दर्ज की गई।
सर्वेक्षण से जुड़े विस्तृत आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि यूरोपीय कंपनियों को पिछले चार महीनों में पहली बार परिचालन लागत में इतनी तीव्र बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। लगातार बढ़ती लागत और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण इस बात की संभावना काफी मजबूत हो गई है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) आगामी अक्टूबर महीने में ही ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करने का फैसला ले सकता है। आम तौर पर केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीति मुद्रा को मजबूती देती है, लेकिन इस बार सियासी समीकरणों ने गणित बिगाड़ दिया है।
जर्मनी का राजनीतिक संकट और चांसलर पद पर मंडराता खतरा
शानदार पीएमआई आंकड़ों के बावजूद यूरो को खरीदारों का समर्थन जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यूरोप की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था जर्मनी में उपजी राजनीतिक अस्थिरता है। प्रांतीय चुनावों में जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिक मर्ज की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) को करारी और अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है।
चुनावी नतीजों के बाद स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि मर्ज की पार्टी संसद में बैठने के लिए जरूरी 5 प्रतिशत की न्यूनतम सीमा से भी नीचे खिसक गई है। इस राजनीतिक झटके के बाद मुल्क के गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि कार्यकाल के बीच में ही चांसलर बदला जा सकता है, जिसे राजनीतिक हलकों में चांसलर स्वैप कहा जा रहा है। यूरोप के सबसे बड़े आर्थिक इंजन में सत्ता के इस डांवाडोल होने की आशंका ने यूरो पर भारी दबाव बना रखा है और ईयूआर/जेपीवाई को आगे बढ़ने से रोक दिया है।
बैंक ऑफ जापान की नीति और येन में गिरावट का रुख
दूसरी तरफ जापानी मुद्रा येन का कमजोर प्रदर्शन लगातार जारी है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने पिछले हफ्ते एक अहम फैसले के तहत अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह दर बढ़ोतरी जापान में 31 साल के उच्चतम स्तर पर है और नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो बाजार की हफ्तों पुरानी उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रही।
हालांकि ब्याज दर में बढ़ोतरी के बावजूद बैंक ऑफ जापान का समग्र रुख काफी नरम बना रहा, जिसके कारण येन में बिकवाली का माहौल बना हुआ है। येन की इस कमजोरी ने ईयूआर/जेपीवाई की गिरावट को थामने में मदद की है और इसे पिछले सोमवार को दर्ज किए गए 177.80 के स्तर यानी साल के सबसे निचले स्तर से उबरने के बाद 180.00 के पार बनाए रखा है। फिर भी, बाजार में इस बात का डर बना हुआ है कि जापानी अधिकारी गिरते येन को संभालने के लिए सीधे तौर पर मुद्रा हस्तक्षेप कर सकते हैं। हस्तक्षेप के इसी जोखिम की वजह से कारोबारी येन पर बहुत आक्रामक बिकवाली करने से कतरा रहे हैं।
एशियाई सत्र में डॉलर का दबदबा और वैश्विक मुद्राओं की स्थिति
बुधवार के कारोबारी सत्र में सिर्फ यूरो और येन ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों और संपत्तियों पर भी उथल-पुथल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव बना है और एयूडी/यूएसडी एशियाई सत्र के दौरान 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती पीएमआई आंकड़ों ने संकेत दिया है कि विनिर्माण क्षेत्र संकुचन में फिसल गया है, जबकि सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर लगातार दूसरे महीने सुस्त रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर दबाव और गहरा गया है।
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी यानी यूएसडी/जेपीवाई बुधवार को एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर मंडरा रही है, जो पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान के नरम रुख ने जापानी मुद्रा को कमजोर रखा है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीति डॉलर को लगातार ताकत दे रही है। बाजार अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं के संपन्न होने पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा है।
सोने में फिसलन और वॉशिंगटन में ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर नजर
मुद्रा बाजारों के साथ-साथ कीमती धातुओं में भी हलचल है। यूरोपीय सत्र के पहले पहर में सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखी गई, जिससे पिछले दिन 4,300 डॉलर से नीचे के स्तर से दर्ज की गई रिकवरी का एक हिस्सा वापस छिन गया। अमेरिकी डॉलर में जारी लगातार खरीदारी और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने गैर-उपज वाले सोने से निवेशकों का रुख मोड़ दिया है।
इस बीच पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन में होने वाली एक महाबैठक पर टिकी हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वॉशिंगटन में एक उच्चस्तरीय शिखर बैठक करने जा रहे हैं। दोनों महाशक्तियों के बीच कई महीनों से व्यापारिक तनावों में आई कमी के बाद, यह बैठक तय करेगी कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने संघर्ष विराम को आगे बढ़ाएंगी या फिर एक नए व्यापारिक अनिश्चितता के दौर में प्रवेश करेंगी।


















