अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन के बीच का विनिमय अनुपात काफी हद तक सीमित दायरे में बना रहा। ब्रिटेन के आर्थिक आंकड़े मिले-जुले रहे हैं, जहां एक तरफ प्रमुख सेवा क्षेत्र की रफ्तार उम्मीद से अधिक धीमी दर्ज की गई, वहीं दूसरी तरफ विनिर्माण क्षेत्र से मिले सकारात्मक संकेतों ने पाउंड को बड़ा नुकसान उठाने से बचा लिया। इसी के साथ जापानी येन में जारी अंतर्निहित कमजोरी ने भी इस मुद्रा जोड़े में तेज गिरावट को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। बाजार के प्रतिभागी इस समय ब्रिटेन की राजकोषीय स्थिति और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों के साथ-साथ अमेरिका और चीन के बीच होने वाली शीर्ष स्तरीय रणनीतिक बैठक पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
ब्रिटेन के सेवा और विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों का प्रभाव
एसएंडपी ग्लोबल की ओर से जारी किए गए ब्रिटेन के प्रारंभिक परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई के ताजा आंकड़ों ने बाजार विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। सितंबर महीने में यूके सर्विसेज पीएमआई गिरकर 51.7 के स्तर पर आ गया, जबकि अगस्त के महीने में यह आंकड़ा 52.5 दर्ज किया गया था। वित्तीय बाजार के विश्लेषक इस आंकड़े के 52 के आसपास रहने का अनुमान लगा रहे थे, जिसके मुकाबले यह प्रदर्शन कुछ कमजोर साबित हुआ है। हालांकि, तकनीकी दृष्टिकोण से 50 से ऊपर का कोई भी स्तर क्षेत्र में आर्थिक विस्तार को दर्शाता है, जिससे यह साफ होता है कि सुस्ती के बावजूद ब्रिटेन का सेवा क्षेत्र अब भी वृद्धि के दायरे में बना हुआ है।
दूसरी ओर, ब्रिटेन के विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़ों ने बाजार को सकारात्मक रूप से चौंकाया है। विनिर्माण गतिविधियों में आई इस अप्रत्याशित मजबूती ने कमजोर सेवा आंकड़ों के नकारात्मक असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रभाव के चलते पाउंड स्टर्लिंग में किसी बड़ी घबराहट वाली बिकवाली का माहौल नहीं बना और यह वैश्विक पटल पर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अपनी स्थिति बचाने में सफल रहा।
सार्वजनिक उधारी और आगामी बजट को लेकर बढ़ती चुनौतियां
आर्थिक संकेतकों से इतर, ब्रिटिश पाउंड पर ब्रिटेन के सार्वजनिक वित्त की बिगड़ती स्थिति का भारी दबाव लगातार बना हुआ है। हाल ही में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में सार्वजनिक क्षेत्र की शुद्ध उधारी बढ़कर 18.27 अरब पाउंड तक पहुंच गई, जो कि जुलाई के महीने में दर्ज की गई 2.04 अरब पाउंड की उधारी की तुलना में एक बहुत बड़ा उछाल है। इस तेज बढ़ोतरी के साथ ही चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अगस्त के दौरान देश का संचयी राजकोषीय घाटा 77.3 अरब पाउंड के स्तर पर पहुंच गया है।
चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि यह संचयी घाटा ऑफिस फॉर बजट रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी ओबीआर के आधिकारिक अनुमान से 8.1 अरब पाउंड अधिक है। बढ़ते घाटे और भारी कर्ज लागत ने ब्रिटेन की चांसलर ऑफ द एक्सचेकर रेचेल रीव्स के सामने आगामी राष्ट्रीय बजट से पहले गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। देश में आर्थिक वृद्धि की सुस्त रफ्तार और बढ़ती उधारी लागत के कारण सरकार के पास नए नीतिगत फैसले लेने या कर रियायतें देने के लिए वित्तीय गुंजाइश बेहद सीमित हो गई है, जिससे विदेशी निवेशक ब्रिटिश परिसंपत्तियों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि के बाद येन की चाल
जापान की मुद्रा की बात करें तो बैंक ऑफ जापान के हालिया नीतिगत फैसलों के बाद येन में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। बैंक ऑफ जापान ने अपनी नीतिगत बैठक में 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। हालांकि यह कदम मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था और बाजार भी हफ्तों से इसी की उम्मीद कर रहा था, लेकिन केंद्रीय बैंक के समग्र रुख को निवेशकों ने काफी नरम आंका।
इस नरम नीतिगत संदेश के चलते येन में अपेक्षित मजबूती नहीं आ सकी और इसकी कमजोरी ने जीबीपी/जेपीडब्ल्यूवाई जोड़े को निचले स्तरों पर गिरने से रोक लिया। फिर भी, विदेशी मुद्रा बाजार में जापानी नीति निर्माताओं द्वारा संभावित प्रत्यक्ष हस्तक्षेप का डर बना हुआ है। यदि येन में और अधिक तेज गिरावट आती है, तो जापानी वित्तीय अधिकारी बाजार में उतरकर येन की खरीद कर सकते हैं, यही आशंका सट्टेबाजों को येन के खिलाफ बहुत बड़े आक्रामक दांव लगाने से रोक रही है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार की व्यापक स्थिति
वैश्विक स्तर पर प्रमुख मुद्राओं के आपसी प्रदर्शन पर नजर डालें तो बुधवार को ब्रिटिश पाउंड ने विभिन्न मुद्राओं के मुकाबले अलग-अलग दिशाएं दिखाईं। पाउंड स्टर्लिंग ने सबसे मजबूत प्रदर्शन न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले दर्ज किया, जहां इसे अच्छी बढ़त हासिल हुई। वैश्विक मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव को मापने वाले करेंसी हीट मैप के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच पाउंड अपनी सापेक्ष मजबूती को संतुलित रखने में कामयाब रहा है।
वहीं दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म यानी एयूडी/यूएसडी नए सिरे से बिकवाली के दबाव में आ गया है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान यह जोड़ी 0.7100 के अहम स्तर का परीक्षण करती दिखी। ऑस्ट्रेलिया के शुरुआती पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र संकुचन के दायरे में फिसल गया, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से आगे बढ़ा। इन कमजोर घरेलू आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की धारणा को काफी कमजोर कर दिया है।
अमेरिकी डॉलर का दबदबा और ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर निगाहें
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त और आक्रामक नीतिगत रुख के कारण अमेरिकी डॉलर पूरे वैश्विक बाजार में बेहद मजबूत बना हुआ है। इस डॉलर मजबूती के चलते यूएसडी/जेपीवाई की दर बुधवार को एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तरों के इर्द-गिर्द घूमती रही, जो पिछले शुक्रवार को छूए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के बेहद करीब है। बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि के बावजूद दोनों देशों के ब्याज दरों में भारी अंतर डॉलर के पक्ष में काम कर रहा है।
इसी बीच वित्तीय बाजारों का मुख्य ध्यान वॉशिंगटन में गुरुवार को होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित शिखर बैठक पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव में कई महीनों की नरमी के बाद यह बैठक बेहद नाजुक मोड़ पर हो रही है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्षों की यह बातचीत तय करेगी कि दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध में जारी अस्थायी राहत आगे भी जारी रहेगी या फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेगी। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में संपन्न हुई अप्रत्यक्ष वार्ताओं को बाजार ने काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया है।
सोने की कीमतों पर फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
अमेरिकी डॉलर के लगातार बढ़ते प्रभाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक आर्थिक दृष्टिकोण ने बहुमूल्य धातुओं के बाजार को भी प्रभावित किया है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रही। इस गिरावट के साथ सोने ने पिछले कारोबारी सत्र में 4,300 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर से की गई अपनी रिकवरी का एक हिस्सा गंवा दिया। अमेरिकी डॉलर में लगातार बनी रहने वाली खरीदारी की वजह से निवेशक बिना ब्याज देने वाली सुरक्षित परिसंपत्ति यानी सोने से पूंजी निकालकर डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।



















