अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से हाल ही में नीतिगत ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी और उसके बाद आए सख्त रुख के बयानों ने वैश्विक स्तर पर सर्राफा बाजार के समीकरणों को हिला कर रख दिया है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी ने 16 सितंबर को अपनी बैठक में एकमत फैसले के तहत टारगेट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की, जिससे ब्याज दर का दायरा बढ़कर 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस नीतिगत निर्णय के पक्ष में सभी 12 सदस्यों ने मतदान किया, जो इस बात का स्पष्ट संकेत था कि मौद्रिक नीति निर्माता महंगाई पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाने में पूरी तरह एकजुट हैं। केंद्रीय बैंक ने अपने आकलन में रेखांकित किया कि आर्थिक गतिविधियां ठोस गति से आगे बढ़ रही हैं, घरेलू खर्च मजबूत बना हुआ है, उत्पादकता वृद्धि में तेजी है और पूंजीगत निवेश की स्थिति भी बेहतर है। इसके बावजूद, केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और मौद्रिक नीति को सख्त बनाए रखने का उद्देश्य महंगाई को दो प्रतिशत के तय लक्ष्य पर समयबद्ध तरीके से वापस लाना है।
फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और ब्याज दरों का भविष्य
आर्थिक अनुमानों के सारांश यानी एसईपी के तहत जारी किए गए सितंबर के डॉट प्लॉट ने निवेशकों को चौंका दिया। समिति के 18 नीति निर्माताओं में से 12 अधिकारियों का मानना है कि वर्ष 2026 में ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की एक और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा चार सदस्यों ने दो अतिरिक्त बढ़ोतरी का अनुमान जताया, जबकि केवल दो अधिकारी ऐसे रहे जिन्होंने आगे किसी तरह की दर वृद्धि न होने की संभावना व्यक्त की। इसका सीधा अर्थ यह निकला कि 18 में से 16 नीति निर्माता चालू वर्ष के अंत से पहले कम से कम एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। फेड अध्यक्ष केविन वार्श ने भी इस आक्रामक मौद्रिक रुख की पुष्टि करते हुए दोहराया कि महंगाई अभी भी अस्वीकार्य रूप से ऊंची है और कीमतों में स्थिरता बहाल करना ही केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस सख्त संदेश का असर सीधे तौर पर वित्तीय बाजारों में देखने को मिला, जहां अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई और ट्रेजरी यील्ड में उछाल दर्ज किया गया। बिना ब्याज देने वाली संपत्ति होने के नाते सोने पर भारी बिकवाली का दबाव बना और फैसला आने के बाद इसमें एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे भाव गिरकर लगभग 4,240 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया।
मैक्रो आर्थिक ताकतें और सोने का बाजार व्यवहार
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के महीने में सोने में आई तेजी को ईटीएफ की मजबूत खरीदारी, फ्यूचर्स बाजार की सक्रियता और कमजोर अमेरिकी डॉलर का सहारा मिला था। काउंसिल ने साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि बढ़ती बॉन्ड यील्ड, बढ़ते राजकोषीय दबाव और नीतिगत हस्तक्षेप का आपसी तालमेल पीली धातु के आगामी परिदृश्य को तय करने में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। इस समय बाजार में सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि फेडरल रिजर्व का रुख सोने के लिए मंदी लाएगा या तेजी, बल्कि यह है कि केंद्रीय बैंक डॉलर और बॉन्ड यील्ड को किस हद तक ऊपर धकेल सकता है, इससे पहले कि व्यापक आर्थिक ताकतें इस पर पलटवार करें।
बाजार तात्कालिक फैसलों के बजाय आने वाले समय के नतीजों और अपेक्षाओं पर कारोबार करते हैं। यदि सोने के भाव में 4,200 डॉलर या 4,000 डॉलर के स्तर तक गिरावट आती है, तो वहां से एक तेज उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि लगातार ऊंची बनी रहने वाली ब्याज दरें अंततः अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर देती हैं, महंगाई जिद्दी बनी रहती है या बढ़ते राजकोषीय संकट के बीच यह सवाल खड़ा होता है कि दरें कब तक इस स्तर पर टिक पाएंगी, तो वही मौद्रिक सख्ती जो शुरुआत में सोने को नुकसान पहुंचा रही थी, बाद में इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकती है। बाजार की पहली प्रतिक्रिया बताती है कि निवेशकों ने क्या सुना, जबकि आने वाले दिनों का रुख यह दिखाता है कि बाजार वास्तव में किस बात पर भरोसा करता है।
तकनीकी स्तरों पर रस्साकशी और अहम सपोर्ट
तकनीकी नजरिए से सोने का मौजूदा मूल्य ढांचा मिला-जुला संकेत दे रहा है। सोना 50-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए से ऊपर संभलने में कामयाब रहा है, जिससे किसी फौरी तकनीकी पतन का खतरा टल गया है। हालांकि, मौजूदा भाव 21-दिवसीय और 200-दिवसीय एसएमए के नीचे कारोबार कर रहे हैं। दैनिक चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 50 के स्तर से ठीक नीचे बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि मध्यम अवधि में तेजी का मोमेंटम अभी पूरी तरह वापस नहीं लौटा है। 23 सितंबर के लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोना 4,353 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 4,376 डॉलर के मुकाबले 0.55 प्रतिशत की गिरावट दिखाता है। 14-दिवसीय आरएसआई 44 के स्तर पर दर्ज किया गया है, जबकि एमएसीडी -11.13 पर है जो सिग्नल लाइन 6.05 के मुकाबले मंदी का संकेत देता है। इसके अलावा 50-दिवसीय ईएमए 4,390 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,431 डॉलर के साथ डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शा रहे हैं।
ऊपर की ओर, खरीदारी लौटने पर पहला लक्ष्य 4,400 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर होगा, जिसके बाद 21-दिवसीय एसएमए के करीब 4,430 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए पर 4,500 डॉलर का स्तर प्रतिरोध का काम करेगा। यदि सोने को अपनी व्यापक तेजी का रुझान दोबारा स्थापित करना है, तो दैनिक या साप्ताहिक आधार पर 4,540 डॉलर के स्तर के ऊपर ब्रेकआउट देना अनिवार्य होगा, जिसके बाद अगला रेजिस्टेंस दायरा 4,600 डॉलर से 4,690 डॉलर के बीच स्थित है।
दूसरी तरफ, यदि सोना फेड के फैसले के बाद बने 4,240 डॉलर के सपोर्ट को गंवा देता है, तो गिरावट का जोखिम 4,100 डॉलर और फिर 4,000 डॉलर तक गहरा सकता है। इस समय 4,240 डॉलर का स्तर तकनीकी तौर पर सबसे संवेदनशील माना जा रहा है, जिसे टूटने पर एक लंबा करेक्शन शुरू हो सकता है। इसके विपरीत, यदि खरीदार इस सपोर्ट को बचाने में कामयाब रहते हैं और भाव दोबारा 4,400 डॉलर के पार निकल जाता है, तो हालिया बिकवाली एक बड़े सुधार की नींव बन सकती है। मौजूदा 14-दिवसीय एटीआर 101.17 डॉलर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है, जबकि 20-दिवसीय दायरा 4,273 डॉलर के सपोर्ट और 4,731 डॉलर के रेजिस्टेंस के बीच बंधा हुआ है।
सुरक्षित निवेश और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा एक मूल्यवान परिसंपत्ति और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। आभूषणों के निर्माण और इसकी चमक के अलावा, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में इसे एक सुरक्षित ठिकाने यानी सेफ-हेवन एसेट के रूप में मान्यता प्राप्त है। कठिन आर्थिक दौर और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के समय निवेशक इसे सुरक्षा कवच मानते हैं। किसी भी विशिष्ट सरकार या संस्था पर निर्भर न होने के कारण यह मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के खिलाफ एक प्राकृतिक हेज के रूप में काम करता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। अशांत और अनिश्चित समय में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और सोने की खरीदारी करते हैं। पर्याप्त मात्रा में सोने का भंडार किसी भी देश की आर्थिक साख और भुगतान क्षमता पर वैश्विक भरोसा बढ़ाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में 1,136 टन सोना शामिल किया, जिसकी कुल कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में की गई सोने की सबसे बड़ी शुद्ध खरीदारी थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपनी स्वर्ण संपत्तियों में तेजी से इजाफा कर रहे हैं।
मुद्रा बाजार के समीकरण और भू-राजनीतिक हलचल
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ विपरीत संबंध देखा जाता है, जो दोनों ही वैश्विक स्तर पर प्रमुख रिजर्व और सुरक्षित संपत्तियां हैं। जब डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोने की कीमतों में उछाल आता है, जिससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, शेयर बाजारों में तेज उछाल के समय सोने की मांग घटती है, जबकि जोखिम वाली परिसंपत्तियों में बिकवाली होने पर सोना निवेशकों की पहली पसंद बन जाता है। चूंकि वैश्विक बाजार में सोने का मूल्य अमेरिकी डॉलर में तय होता है, इसलिए डॉलर सूचकांक की मजबूती सोने पर सीधा अंकुश लगाती है।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी इन नीतिगत बदलावों की स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई दे रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में आकर बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र में 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता दिखा। ऑस्ट्रेलिया के ताजा पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन और सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने धीमी वृद्धि दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर-जापानी येन की जोड़ी 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करती रही। बैंक ऑफ जापान ने नीति सामान्यीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर की मजबूती के आगे जापानी येन में नरमी बनी हुई है। वैश्विक व्यापारी अब गुरुवार को होने वाली ट्रंप-शी बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं के पूरा होने पर बाजार ने सीमित प्रतिक्रिया दी है।



















