ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के माध्यम से लगातार आगे बढ़ रही है। राजनयिक गतिरोध के बीच सामने आई इस जानकारी में अराघची ने यह भी रेखांकित किया कि समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को तय अवधि के छठे दिन पूरी तरह से खोल दिया जाना था। वाशिंगटन ने शुरुआत में ईरान के सात दिवसीय प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, परंतु बाद में उसने कई अतिरिक्त शर्तें जोड़ने का प्रयास किया, जिनका विस्तृत ब्यौरा देने से ईरानी विदेश मंत्री ने इनकार कर दिया। अराघची ने इस पूरी प्रक्रिया का हवाला देते हुए जोर देकर कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिकी प्रशासन पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता।
कच्चे तेल का रुख और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के बुनियादी पहलू
भू-राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक चर्चाओं के बीच ऊर्जा बाजार में सतर्कता का माहौल देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड का भाव मामूली 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.05 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में WTI क्रूड सबसे प्रमुख बेंचमार्क में से एक है, जिसकी तुलना ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ की जाती है। इस तेल को आमतौर पर हल्का और मीठा कच्चा तेल कहा जाता है, क्योंकि इसमें घनत्व कम होता है और सल्फर की मात्रा भी काफी कम पाई जाती है। अपनी इस गुणवत्ता के कारण रिफाइनरियों में इसे संसाधित करना और विभिन्न ईंधनों में बदलना बेहद आसान माना जाता है।
यह कच्चा तेल मुख्य रूप से अमेरिका के भीतर से निकाला जाता है और इसका प्रमुख वितरण केंद्र ओक्लाहोमा का कुशिंग हब है। कुशिंग को वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहीं से भारी मात्रा में कच्चे तेल का भंडारण और परिवहन नियंत्रित होता है। वैश्विक वित्तीय मीडिया और जिंस बाजारों में WTI का मूल्य ऊर्जा लागत के एक मानक संकेतक के तौर पर उद्धृत किया जाता है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा व्यापार की दिशा तय होती है।
मांग, आपूर्ति और अमेरिकी डॉलर का असर
अन्य सभी प्रमुख संपत्तियों की तरह WTI कच्चे तेल की कीमतें भी बुनियादी तौर पर मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करती हैं। जब वैश्विक आर्थिक विकास की गति मजबूत होती है, तो औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन में ईंधन की मांग तेजी से बढ़ती है, जिससे कीमतों को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत वैश्विक आर्थिक मंदी या कमजोर विकास मांग को घटाकर कीमतों पर दबाव डालता है। इसके अलावा युद्ध, क्षेत्रीय राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं, जिससे बाजारों में भारी उथल-पुथल मचती है।
कच्चे तेल की कीमतों को निर्धारित करने में अमेरिकी डॉलर के मूल्य की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। दुनिया भर में कच्चे तेल का अधिकांश लेन-देन अमेरिकी डॉलर में ही किया जाता है। ऐसे में जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले देशों और कारोबारियों के लिए कच्चा तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग में तेजी आती है। वहीं अगर डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के लिए तेल आयात करना महंगा हो जाता है, जिससे खपत और कीमतों पर विपरीत असर पड़ता है।
साप्ताहिक भंडार आंकड़े और अमेरिकी एजेंसियों की भूमिका
ऊर्जा बाजार के व्यापारी तेल के मूल्य रुझानों को समझने के लिए अमेरिका के साप्ताहिक इन्वेंट्री डेटा पर पैनी नजर रखते हैं। यह डेटा अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट यानी API और एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA द्वारा जारी किया जाता है। भंडार के स्तर में होने वाले बदलाव से बाजार में आपूर्ति और मांग के वास्तविक उतार-चढ़ाव की सटीक तस्वीर मिलती है। यदि जारी आंकड़ों में तेल के भंडार में कमी दिखाई देती है, तो इसका अर्थ होता है कि खपत बढ़ रही है, जिससे कीमतों में उछाल आने की संभावना बन जाती है। इसके विपरीत यदि भंडार बढ़ता हुआ दर्ज किया जाता है, तो यह बाजार में जरूरत से ज्यादा आपूर्ति का संकेत होता है, जिससे भाव गिरने लगते हैं।
API की ओर से यह साप्ताहिक रिपोर्ट प्रत्येक मंगलवार को जारी की जाती है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA अगले दिन यानी बुधवार को अपने आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक करती है। ऐतिहासिक रूप से दोनों एजेंसियों के नतीजों में काफी समानता देखी जाती है और लगभग 75 प्रतिशत मामलों में उनके आंकड़ों का अंतर 1 प्रतिशत के भीतर ही रहता है। हालांकि ऊर्जा बाजार के विश्लेषक और निवेशक EIA के आंकड़ों को अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय मानते हैं, क्योंकि यह एक प्रत्यक्ष सरकारी संस्थान द्वारा संकलित किया जाता है।
ओपेक और ओपेक प्लस का उत्पादन नियंत्रण
वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय करने में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक का सीधा दखल रहता है। ओपेक 12 प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जो हर साल आयोजित होने वाली अपनी दो औपचारिक बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा निर्धारित करता है। जब ओपेक सदस्य आपूर्ति को सीमित करने के लिए उत्पादन कोटा घटाने का फैसला लेते हैं, तो बाजार में तेल की उपलब्धता कम हो जाती है और भाव चढ़ने लगते हैं। इसके विपरीत जब समूह द्वारा उत्पादन बढ़ाया जाता है, तो आपूर्ति में विस्तार होने से कीमतें नीचे की ओर फिसलती हैं।
इस समीकरण में ओपेक प्लस की भूमिका भी निर्णायक बन चुकी है, जिसमें ओपेक के मूल देशों के साथ दस अतिरिक्त गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं। इन सहयोगी देशों में सबसे प्रमुख हिस्सेदार रूस है, जिसके उत्पादन फैसले वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माने जाते हैं। ओपेक प्लस के सामूहिक फैसलों से तय होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहेगी या बाजार को कृत्रिम कमी का सामना करना पड़ेगा।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल और डॉलर का कमजोर प्रदर्शन
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने मजबूत बढ़त हासिल की। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर डॉलर के मुकाबले 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 0.7017 के दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस मुद्रा जोड़ी में यह तेजी ऐसे समय में आई जब ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका दोनों ही देशों में कोई बड़ा आर्थिक डेटा जारी नहीं हुआ था। आर्थिक कैलेंडर शांत रहने के बावजूद डॉलर में बिकवाली ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान की।
दूसरी ओर एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी 158.50 के आसपास स्थिर बनी रही। मुद्रा व्यापारी शुक्रवार को जारी होने वाले जापान के राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले किसी बड़े जोखिम से बचते दिखे और उन्होंने किनारे बैठना बेहतर समझा। हालांकि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर ने जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर को नीचे गिरने से रोके रखा और उसे एक सीमित दायरे में सहारा दिया।
सोने की चाल और बिटकॉइन का नैस्डैक से बढ़ता जुड़ाव
जिंस बाजार में बहुमूल्य धातु सोने का कारोबार मंगलवार को किसी स्पष्ट दिशा के बिना सीमित दायरे में घूमता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,170 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास संघर्ष करता रहा और सोमवार को आई गिरावट के बाद इसमें कोई बड़ी बढ़त देखने को नहीं मिली। इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी और डॉलर में आई गिरावट ने पीली धातु को एक आधार जरूर दिया, लेकिन नए खरीदारों की कमी साफ दिखाई दी।
डिजिटल एसेट बाजार में सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की चाल एक बार फिर तकनीकी शेयरों वाले अमेरिकी सूचकांक नैस्डैक के साथ जुड़ती दिखी। पिछले हफ्ते तकनीकी शेयरों में आई बिकवाली के साथ बिटकॉइन भी फिसला था, जिसके बाद अब इसका नैस्डैक के साथ सहसंबंध फिर से बढ़ रहा है। व्यापक आर्थिक दबावों के चलते बिटकॉइन के लिए 82,500 डॉलर का महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर खतरे में बना हुआ है। के33 रिसर्च ने मंगलवार को जारी अपने शोध में बताया कि हालिया मूल्य उतार-चढ़ाव के बाद बिटकॉइन ने तकनीक-प्रधान नैस्डैक की दिशा में ही कदम बढ़ाना दोबारा शुरू कर दिया है।
स्पेसएक्स के तिमाही नतीजे और कर्मचारियों के शेयर बेचने की समयसीमा
कॉर्पोरेट क्षेत्र में एलन मस्क द्वारा स्थापित एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने मंगलवार के कारोबारी सत्र के समापन के बाद अपने तीसरे तिमाही के नतीजों की घोषणा की। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के आगामी एक महीने की दिशा इन घोषित वित्तीय नतीजों से नहीं, बल्कि एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम से तय होगी। नतीजों के जारी होने के बाद दूसरे पूर्ण कारोबारी दिन यानी गुरुवार को कंपनी के कर्मचारियों और शुरुआती निवेशकों के पास मौजूद 1.3 अरब शेयर बिक्री के लिए पात्र हो जाएंगे। इतनी भारी मात्रा में शेयरों की संभावित बिक्री आने वाले दिनों में बाजार की धारणा और मूल्यांकन पर बड़ा असर डाल सकती है।


















